दो घंटे की समझाइश और बदल गया पूरा खेल, जवाहर सिंह बेढ़म की एंट्री के बाद विचित्रा सिंह ने छोड़ी मेयर की रेस, अनुराधा सिंह का रास्ता साफ

भरतपुर नगर निगम मेयर चुनाव में बड़ा सियासी मोड़ आया है। निर्दलीय विचित्रा सिंह ने नामांकन वापस ले लिया, जिसके बाद भाजपा की अनुराधा सिंह अकेली उम्मीदवार रह गई हैं।

भरतपुर। भरतपुर नगर निगम की मेयर की कुर्सी को लेकर चल रही सियासी उठापटक ने शुक्रवार सुबह अचानक नया मोड़ ले लिया। जिस मुकाबले में निर्दलीय पार्षद विचित्रा सिंह और भाजपा की अनुराधा सिंह आमने-सामने थीं, उसमें अब विचित्रा सिंह ने अपना नामांकन वापस ले लिया है। इसके साथ ही मेयर पद पर भाजपा की अनुराधा सिंह के सामने फिलहाल कोई दूसरा उम्मीदवार नहीं बचा है।

नाम वापसी से ठीक पहले भरतपुर की राजनीति में पर्दे के पीछे चल रही कवायद भी सामने आई। राजस्थान के गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म खुद उस होटल/रिसॉर्ट में पहुंचे, जहां विचित्रा सिंह और उनके साथ कई पार्षद ठहरे हुए थे। बताया गया कि मंत्री और विचित्रा सिंह के बीच करीब दो घंटे तक बातचीत और समझाइश का दौर चला। इसके बाद विचित्रा सिंह ने मेयर पद की दौड़ से हटने का फैसला किया।

विचित्रा सिंह के नामांकन वापस लेने के बाद अब अनुराधा सिंह अकेली उम्मीदवार रह गई हैं। हालांकि अंतिम निर्वाचन की औपचारिक प्रक्रिया अभी बाकी है, लेकिन मौजूदा स्थिति में उनके निर्विरोध चुने जाने का रास्ता साफ हो गया है।

36 निर्दलीयों ने बनाया था पूरा खेल

भरतपुर नगर निगम के चुनाव परिणामों ने इस बार मेयर चुनाव को खासा पेचीदा बना दिया था। 65 वार्डों में भाजपा के 20, कांग्रेस के 7 और निर्दलीयों के 36 पार्षद जीतकर आए। बसपा और आरएलपी को एक-एक सीट मिली। ऐसे में किसी भी खेमे के लिए निर्दलीयों का समर्थन निर्णायक बन गया था।

नामांकन के समय वार्ड नंबर 17 की निर्दलीय पार्षद विचित्रा सिंह ने दो नामांकन पत्र दाखिल किए थे। उनके साथ उनके पति और पूर्व मेयर शिव सिंह भोंट भी सक्रिय रहे। विचित्रा सिंह ने उस समय कांग्रेस के समर्थन का दावा करते हुए नगर निगम में बोर्ड बनाने की बात कही थी।

दूसरी तरफ भाजपा ने वार्ड नंबर 61 की पार्षद अनुराधा सिंह को मैदान में उतारा। नामांकन के बाद दोनों पक्ष अपने-अपने समर्थन का दावा कर रहे थे और 36 निर्दलीय पार्षद पूरे मुकाबले का सबसे बड़ा फैक्टर बन गए थे।

विचित्र सिंह

41 वोट से जीती थीं अनुराधा सिंह

अनुराधा सिंह वार्ड नंबर 61 से भाजपा की प्रत्याशी थीं। उन्हें 673 वोट मिले, जबकि दूसरे स्थान पर रहीं अनीता सिंह को 632 वोट मिले। इस तरह अनुराधा सिंह ने 41 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। अनुराधा सिंह पहले भी पार्षद रह चुकी हैं। उनके पति हजारी सिंह पूर्व पार्षद और भाजपा युवा मोर्चा के पूर्व जिला अध्यक्ष रहे हैं।

विचित्रा सिंह ने क्या कहा?

नामांकन वापस लेने के बाद विचित्रा सिंह ने कहा कि वह भरतपुर के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाना चाहती हैं और इसी सोच के साथ उन्होंने यह फैसला लिया है।

विचित्रा सिंह के पति और पूर्व मेयर शिव सिंह भोंट ने दावा किया था कि उनके पास पूरा बहुमत है और अलग-अलग दलों के पार्षद उनके संपर्क में हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि मतदान के समय भाजपा के पार्षद क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं। अब विचित्रा सिंह के नामांकन वापस लेने के बाद इन दावों से आगे निकलकर चुनावी तस्वीर बदल चुकी है। जिस मेयर चुनाव में निर्दलीय पार्षदों के रुख को सबसे बड़ा सवाल माना जा रहा था, वहां अब भाजपा की अनुराधा सिंह के सामने कोई प्रतिद्वंद्वी नहीं बचा है।

राज्य निर्वाचन आयोग की तय प्रक्रिया के तहत नाम वापसी की अवधि पूरी होने के बाद अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी। राजस्थान में निकाय प्रमुखों के लिए मतदान 21 सितंबर को निर्धारित है।

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