भरतपुर में जयपुर से नवजात बेटे का शव लेकर लौट रही एम्बुलेंस हादसे का शिकार हो गई। हादसे में पिता की मौत हो गई, जबकि पत्नी, पिता, चाची और चालक गंभीर रूप से घायल हैं।
भरतपुर। जिस पिता ने कुछ घंटे पहले अपने 15 दिन के नवजात बेटे को खोया था, वह शायद यह नहीं जानता था कि घर तक पहुंचने से पहले उसकी अपनी जिंदगी भी उसी सफर में खत्म हो जाएगी। जयपुर से बेटे का शव लेकर भरतपुर लौट रही एम्बुलेंस मंगलवार अलसुबह हादसे का शिकार हो गई और एक परिवार पर दुखों का ऐसा पहाड़ टूटा, जिसने हर किसी को झकझोर दिया।
खेत में बिखर गया पूरा परिवार | पहले पत्नी और मासूम बच्चों का गला दबाया, फिर फंदे से लटककर दे दी जान
यह दर्दनाक हादसा भरतपुर के आगरा-बीकानेर राष्ट्रीय राजमार्ग-21 पर सेवर थाना क्षेत्र के लुधावई गांव के पास हुआ। शुरुआती जानकारी के मुताबिक एम्बुलेंस चालक को नींद की झपकी आने से वाहन अनियंत्रित हो गया और आगे चल रहे एक वाहन से जा टकराया। टक्कर इतनी तेज थी कि एम्बुलेंस बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।
हादसे में भरतपुर के बी-नारायण गेट निवासी 29 वर्षीय हेतराम की मौके पर ही मौत हो गई। विडंबना यह रही कि वह अपने नवजात बेटे का शव लेकर जयपुर के जे.के. लोन अस्पताल से घर लौट रहा था। बेटे की मौत के कुछ ही घंटे बाद पिता की जान भी चली गई।
15 दिन पहले घर में गूंजी थी किलकारी, अब पसरा मातम
हेतराम की पत्नी खुशबू ने करीब 15 दिन पहले भरतपुर के जनाना अस्पताल में बेटे को जन्म दिया था। समय से पहले जन्म होने के कारण नवजात की हालत गंभीर थी, इसलिए डॉक्टरों ने उसे जयपुर के जे.के. लोन अस्पताल रेफर कर दिया। इलाज के दौरान सोमवार रात मासूम ने दम तोड़ दिया।
इसके बाद परिवार एम्बुलेंस से बच्चे का शव लेकर भरतपुर लौट रहा था। लेकिन यह सफर परिवार के लिए एक और त्रासदी बन गया।
पत्नी, पिता और चाची समेत चालक गंभीर
हादसे में हेतराम की पत्नी खुशबू (26), पिता जगदीश (50), चाची गुड्डी (40) और एम्बुलेंस चालक गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी को भरतपुर के आरबीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार एम्बुलेंस चालक की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हादसे की वजह चालक को आई नींद की झपकी मानी जा रही है। पुलिस ने मामला दर्ज कर दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है।
एक ही रात में पहले बेटे और फिर पिता की मौत ने पूरे परिवार को ऐसी त्रासदी में धकेल दिया है, जिसकी भरपाई शायद कभी नहीं हो सकेगी।
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