अजमेर में नगर निगम चुनाव से पहले भाजपा को बड़ा झटका लगा है। दो बार के मेयर धर्मेंद्र गहलोत ने पार्टी छोड़ते हुए वासुदेव देवनानी पर दबाव बनाने के आरोप लगाए।
अजमेर। नगर निगम चुनाव से पहले अजमेर भाजपा में ऐसा सियासी विस्फोट हुआ है, जिसकी गूंज चुनाव तक सुनाई दे सकती है। पार्टी के दो बार महापौर रहे धर्मेंद्र गहलोत ने भाजपा से अपना नाता तोड़ लिया है। खास बात यह है कि इस्तीफा ऐसे वक्त आया है, जब भाजपा ने उन्हें नागौर नगर परिषद चुनाव की जिम्मेदारी सौंपी थी।
गहलोत ने जिम्मेदारी लेने से इनकार करने के साथ ही पार्टी की प्राथमिक सदस्यता भी छोड़ दी। इसके बाद उन्होंने जो बातें कहीं, उन्होंने अजमेर भाजपा की अंदरूनी राजनीति को सार्वजनिक बहस के केंद्र में ला दिया। गहलोत ने विधायक वासुदेव देवनानी पर राजनीतिक विरोधियों को कमजोर करने के लिए सरकारी तंत्र के इस्तेमाल का आरोप लगाया और साफ कहा कि वह उनके सामने नहीं झुकेंगे।
जिम्मेदारी मिली तो उठाया इस्तीफे का कदम
भाजपा ने गहलोत को हाल ही में नागौर नगर परिषद चुनाव का प्रभारी बनाया था। लेकिन गहलोत ने यह जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय पार्टी से ही किनारा कर लिया। वीडियो संदेश में उन्होंने भाजपा के साथ अपने लंबे राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए पार्टी के प्रति आभार जताया, लेकिन यह भी स्पष्ट कर दिया कि मौजूदा परिस्थितियों में वह प्रभारी की भूमिका नहीं निभा सकते। इसके बाद उन्होंने भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफे का ऐलान कर दिया।
चुनाव करीब आया तो पुराने मामलों के नोटिस का मुद्दा गरमाया
गहलोत ने अपने इस्तीफे की वजह बताते हुए सीधे देवनानी पर निशाना साधा। उनका आरोप है कि दोनों के बीच लंबे समय से राजनीतिक मतभेद हैं और इसी के चलते स्वायत्त शासन विभाग के माध्यम से उनके खिलाफ दो मामलों में नोटिस भेजे गए। गहलोत के मुताबिक, इनमें एक मामला उनके महापौर कार्यकाल से जुड़ा है, जबकि दूसरा करीब छह साल पुराना है। गहलोत का दावा है कि नगर निगम चुनाव के ठीक पहले इन मामलों को सामने लाकर उन पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह इस दबाव में अपना राजनीतिक रुख नहीं बदलेंगे।
‘देवनानी के सामने नहीं झुकूंगा’
गहलोत ने अपने बयान में अपने राजनीतिक गुरु माने जाने वाले अजमेर नगर निकाय के पूर्व अध्यक्ष वीर कुमार का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि वीर कुमार ने कभी किसी के सामने झुककर राजनीति नहीं की और वह भी उसी रास्ते पर चलेंगे। गहलोत ने साफ शब्दों में कहा कि इसके लिए उन्हें चाहे कोई भी कीमत चुकानी पड़े, वह देवनानी के सामने नहीं झुकेंगे। यही तेवर अब इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश बन गया है।
इस्तीफा सिर्फ पार्टी छोड़ना या चुनावी समीकरण का संकेत?
गहलोत का भाजपा से अलग होना ऐसे समय हुआ है, जब अजमेर नगर निगम चुनाव सिर पर हैं। ऐसे में यह घटनाक्रम सिर्फ एक नेता के इस्तीफे तक सीमित नहीं माना जा रहा।
दो बार महापौर रह चुके गहलोत की स्थानीय राजनीति में पहचान और प्रभाव को देखते हुए भाजपा के सामने अब दोहरी चुनौती है—एक तरफ चुनावी तैयारी और दूसरी तरफ संगठन के भीतर उभरी नाराजगी को संभालना।
वहीं, गहलोत के इस्तीफे ने देवनानी और उनके बीच चल रही खींचतान को भी अब पर्दे से बाहर ला दिया है। आने वाले दिनों में यह टकराव अजमेर की चुनावी राजनीति को किस दिशा में ले जाता है, इस पर सबकी नजर रहेगी।
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