एग्रीविजन-2026 के द्वितीय उत्तर-पश्चिम क्षेत्र सम्मेलन का उदयपुर में समापन हुआ। 624 प्रतिभागियों ने कृषि नवाचार, उद्यमिता और रोजगार पर विचार साझा किए।
उदयपुर। कृषि को केवल नौकरी का जरिया नहीं, बल्कि नवाचार, उद्यमिता और रोजगार सृजन का बड़ा क्षेत्र बनाने के संदेश के साथ एग्रीविजन-2026 के द्वितीय उत्तर-पश्चिम क्षेत्र सम्मेलन का समापन हुआ। दो दिवसीय सम्मेलन में कृषि विद्यार्थियों को तकनीक, उद्यमिता, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका को लेकर विशेषज्ञों ने मार्गदर्शन दिया। सम्मेलन में कुल 624 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
सम्मेलन के दूसरे दिन अश्विनी शर्मा ने ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने वंदे मातरम् के ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह केवल गीत नहीं, बल्कि देश और राष्ट्र के लिए कार्य करने की प्रेरणा देने वाला राष्ट्रभाव का प्रतीक है।
इसके बाद कृषि उद्यमिता आधारित रोल मॉडल सत्र हुआ। इसमें कृषि और उद्यमिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहे चार रोल मॉडल्स ने विद्यार्थियों के साथ अपने अनुभव साझा किए। राजेश कुमार ओझा ने ‘ट्राइबल वेदा’, डॉ. श्रवण यादव ने ‘ग्रामीण युवाओं के लिए जैविक खेती : एक लाभकारी उद्यम’ तथा अंकित जैन (फसल) ने ‘कृषि में तकनीक एवं नवाचार’ विषय पर व्याख्यान दिया। वक्ताओं ने युवाओं को कृषि में नवाचार, उद्यमिता और आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित किया।
‘बांस’ से किसान की आय बढ़ाने का रास्ता
सम्मेलन में पाशा पटेल, अध्यक्ष, महाराष्ट्र राज्य कृषि मूल्य आयोग तथा पर्यावरण एवं सतत विकास से जुड़े कार्यों के प्रमुख हस्ताक्षरकर्ता, ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया। ‘बांस मैन ऑफ इंडिया’ के रूप में प्रसिद्ध पटेल ने बांस की खेती, उसके बहुआयामी उपयोग, किसानों की आय बढ़ाने की संभावनाओं और पर्यावरण संरक्षण में इसकी भूमिका पर विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने बताया कि बांस को केवल वनस्पति के रूप में देखने के बजाय कृषि, उद्योग, ऊर्जा और ग्रामीण रोजगार के आधार के रूप में विकसित किया जा सकता है। इससे किसानों के लिए अतिरिक्त आय का प्रभावी साधन तैयार हो सकता है।
कृषि में महिलाओं की बढ़ती भूमिका पर भी चर्चा
महिलाओं की कृषि क्षेत्र में भूमिका को लेकर विशेष मार्गदर्शन सत्र आयोजित किया गया। डॉ. विमला डूंकवाल ने कृषि में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी, नेतृत्व क्षमता और उद्यमिता की संभावनाओं पर विद्यार्थियों से संवाद किया।
इसके बाद समारोह सत्र में एग्रीविजन के सह-आयोजक सचिव डॉ. अमित कुमार ने सम्मेलन की प्रमुख गतिविधियों और निष्कर्षों का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में दो तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों ने व्याख्यान दिए। प्रतिभागियों ने अपने शोध कार्य भी प्रस्तुत किए। सम्मेलन में कुल 15 उप-विषयों पर शोध पत्र प्रस्तुत किए गए।
दो दिवसीय आयोजन में कृषि में नवाचार, तकनीकी विकास, उद्यमिता और युवाओं की भूमिका सहित विभिन्न विषयों पर व्यापक शोध एवं विचार-विमर्श हुआ।
कुलगुरु बोले—शिक्षा डिग्री तक सीमित न रहे
समारोह सत्र की अध्यक्षता महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर के कुलगुरु डॉ. प्रताप सिंह ने की। उन्होंने विद्यार्थियों से स्पष्ट विजन के साथ शिक्षा और कौशल विकास पर ध्यान केंद्रित करते हुए राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।
डॉ. प्रताप सिंह ने कहा कि शिक्षा केवल डिग्री हासिल करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसका जुड़ाव समाज और राष्ट्रहित से होना चाहिए। उन्होंने बताया कि एग्रीविजन का गठन वर्ष 2015 में कृषि विद्यार्थियों को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने के उद्देश्य से किया गया था।
उन्होंने विद्यार्थियों से कृषि नवाचार, रोजगार और उद्यमिता के माध्यम से आगे बढ़ने की अपील की। साथ ही राष्ट्रभावना, पर्यावरण संरक्षण और पौधों की देखभाल पर जोर देते हुए ‘एक पेड़ मां के नाम’ की तर्ज पर ‘एक पेड़ पिता के नाम’ पौधा लगाने का आह्वान किया। उन्होंने ‘वंदे मातरम्’ के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करने का भी संदेश दिया।
‘युवा आज के राष्ट्र निर्माण का हिस्सा’
मुख्य अतिथि डॉ. पारस टांक ने कहा कि कृषि क्षेत्र में युवाओं के लिए रोजगार, स्वरोजगार और उद्यमिता की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षा के साथ राष्ट्र निर्माण और समाज सेवा में सक्रिय भागीदारी की अपील की।
उन्होंने कहा कि युवा केवल भविष्य नहीं, बल्कि आज के राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। विद्यार्थियों को ग्रामीण क्षेत्रों और किसानों की समस्याओं को समझने तथा कृषि नवाचार को बढ़ावा देने की जरूरत है। उन्होंने विद्यार्थियों से केवल नौकरी की तलाश करने के बजाय स्वरोजगार अपनाकर दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा करने का आह्वान किया।
‘जॉब प्रोवाइडर बनने की दिशा में बढ़ें विद्यार्थी’
विशिष्ट अतिथि श्री विक्रम सिंह फरस्वान ने कृषि विद्यार्थियों से नौकरी तलाशने वाले के बजाय जॉब प्रोवाइडर यानी रोजगार प्रदाता बनने की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।
उन्होंने बताया कि एग्रीविजन के प्रयासों से कृषि डिग्री को प्रोफेशनल डिग्री का दर्जा दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य हुआ है। उनके अनुसार एग्रीविजन के माध्यम से अब तक करीब 150 उद्यमी तैयार हो चुके हैं, जो कृषि क्षेत्र में रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर पैदा कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि देश के 77 राज्य कृषि विश्वविद्यालयों में से लगभग 60 विश्वविद्यालयों में एग्रीविजन सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। विद्यार्थी गांवों में किसानों के साथ मिलकर कृषि चौपाल जैसी गतिविधियों के जरिए सीधे संवाद कर रहे हैं और कृषि की नई तकनीकों व जानकारियों को किसानों तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं।
पोस्टर, शोधपत्र और युवा संसद के प्रतिभागी सम्मानित
समापन समारोह में उत्कृष्ट पोस्टर प्रेजेंटेशन करने वाले विद्यार्थियों तथा युवा संसद में पक्ष-विपक्ष की भूमिका प्रभावी ढंग से निभाने वाले प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया।
सह-आयोजन सचिव डॉ. अमित विष्णोई ने बताया कि उद्यमिता में युवाओं की भूमिका विषय पर उत्कृष्ट योगदान के लिए विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार दिए गए। पोस्टर प्रस्तुतीकरण में 13, मौखिक शोध-पत्र प्रस्तुतीकरण में 3 तथा युवा संसद के पक्ष और विपक्ष में 3-3 प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान किए गए। इसके अलावा 8 विभिन्न प्रदर्शनियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को भी सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. अंशुल शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया, जबकि सुश्री पीयूषा शर्मा ने मंच संचालन किया।
दो दिवसीय सम्मेलन का समापन राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के सामूहिक गायन के साथ हुआ। सम्मेलन ने विद्यार्थियों को कृषि उद्यमिता की राह पर आगे बढ़ने, नवाचार अपनाने और अपने ज्ञान-कौशल का उपयोग राष्ट्र के विकास में करने का संदेश दिया।
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