नई दिल्ली
विनय कुमार त्रिपाठी को रेलवे बोर्ड का नया चेयरमैन और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नियुक्त किया गया है। कैबिनेट की नियुक्ति समिति (एसीसी) ने त्रिपाठी की नियुक्ति पर मुहर लगा दी। विनय कुमार त्रिपाठी ने सुनीत शर्मा ने जगह ली है जो कि शुक्रवार को सेवानिवृत्त हो गए।
सुनीत शर्मा को 1 जनवरी, 2020 में रेलवे बोर्ड चेयरमैन (Chairman Railway Board) नियुक्त किया गया था। रेलवे बोर्ड चेयरमैन नियुक्त होने से पहले वह पूर्वी रेलवे में महाप्रबंधक के रूप में कार्यरत थे। उनको रेलवे बोर्ड के पूर्व चेयरमैन और CEO वीके यादव की जगह नियुक्त किया गया था।
रेलवे बोर्ड के नव-नियुक्त चेयरमैन विनय कुमार त्रिपाठी पूर्वोत्तर रेलवे, गोरखपुर के महाप्रबंधक और 1983 बैच के सीनियर IRSEE अधिकारी हैं। Railway Board के चेयरमैन के तौर पर त्रिपाठी की यह नियुक्ति एक जनवरी, 2022 से 30 जून, 2022 के लिए छह माह के लिए की गई है। कमेटी ने उनकी नियुक्ति को 31 दिसंबर, 2022 तक विस्तार देने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है।
कमेटी की संस्थापन अधिकारी व सचिव दिप्ती उमाशंकर की ओर से जारी किए गए आदेशों के मुताबिक विनय कुमार त्रिपाठी (Vinay Kumar Tripathi) जोकि वर्तमान में पूर्वोत्तर रेलवे, गोरखपुर के महाप्रबंधक पद पर कार्यरत हैं। उनकी नियुक्ति अगले छह माह के लिए रेलवे बोर्ड के नए चेयरमैन व सीईओ के रूप में की जा रही है। यह नियुक्ति 1 जनवरी, 2022 से प्रभावी मानी जाएगी। इस बाबत आदेशों की कॉपी रेलवे बोर्ड के चेयरमैन सुनीत शर्मा को भी भेज दी गई है।
विनय कुमार त्रिपाठी ने पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबन्धक के रूप में 27 अक्टूबर, 2020 को पदभार ग्रहण किया।महाप्रबंधक पद संभालने से पहले वह रेलवे बोर्ड, नई दिल्ली में अपर सदस्य/ संकर्षण के पद पर कार्यरत भी रहे। रूड़की से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक की उपाधि प्राप्त करने के बाद विनय त्रिपाठी 1983 बैच के भारतीय रेल विद्युत इंजीनियरिंग सेवा (आई.आर.एस.ई.ई.) के अधिकारी के रूप में रेल सेवा में आए। उनकी पहली नियुक्ति उत्तर रेलवे में सहायक विद्युत इंजीनियर के पद पर हुई।
उत्तर रेलवे, मध्य रेलवे, पश्चिम रेलवे में भी विद्युत इंजीनियरिंग विभाग के अनेक महत्वपूर्ण पदों के उत्तरदायित्व संभाल चुके हैं। उन्होंने स्विटजरलैंड एवं अमेरिका में उच्च प्रबन्धन में प्रशिक्षण प्राप्त किया है। इसके अलावा अद्यतन तकनीक के तीन फेज वाले विद्युत लोकोमोटिव के विकास एवं इसके स्वदेशीकरण में सराहनीय योगदान दिया है। ये इंजन आज भारतीय रेल के अग्रवाहक हैं।
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