जोधपुर
प्रशासन शहरों के संग अभियान के तहत सेक्टर-जोनल प्लान नोटिफाइड किए बगैर पट्टे जारी नहीं हो सकेंगे। हाईकोर्ट ने राजस्थान सरकार की ओर से चलाये जा रहे प्रशासन शहरों और गांवों के संग अभियान में 5 अहम कैटेगिरी में पट्टा जारी करने पर रोक लगा दी है। रोक के बाद अब पार्क की भूमि, वन भूमि, गोचर भूमि, मन्दिर की भूमि और कच्ची बस्तियों के पट्टे होंगे जारी नहीं होंगे।
राजस्थान उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश संगीत लोढ़ा व न्यायाधीश मनोज कुमार गर्ग की खंडपीठ ने रोशन व्यास की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया है। इसके अनुसार अब प्रशासन शहरों के संग अभियान के तहत किसी प्रकार की रियायत देकर पट्टे जारी करने पर अंतरिम रोक लगा दी गई है। उच्च न्यायालय ने कहा कि गुलाब कोठारी के जजमेंट के तहत पट्टे जारी किए जा सकते हैं, लेकिन उस निर्णय के अलावा बिना जोनल प्लान और सेक्टर प्लान के किसी प्रकार का नियमितीकरण नहीं किया जा सकता।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मनोज बोहरा व मोती सिंह राजपुरोहित ने पक्ष रखते हुए कहा कि सरकार प्रशासन शहरों के संग अभियान के तहत रियायत देकर कृषि भूमि, सार्वजनिक भूमि व सेटबैक के मामलों में छूट दे रही है। इसके लिए सरकार ने 20 सितंबर, 2021 को एक आदेश भी जारी किया है। सरकार अभियान के तहत छूट देकर भूमि का नियमितीकरण कर रही है, यह अवैधानिक है। इस पर पट्टा जारी करने पर अंतरिम रोक लगते हुए उच्च न्यायालय ने सभी पक्षकारों को नोटिस जारी कर 22 अक्टूबर को जवाब तलब किया है। साथ ही यह निर्देश दिया कि अनधिकृत का कोई भी नियमितीकरण 20 सितंबर के आदेश के तहत सरकार नहीं करेगी।
हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार जोनल डेवलपमेंट प्लान और सेक्टर प्लान के विपरीत किसी प्रकार का पूरे राजस्थान के किसी कस्बे या शहर में नियमितीकरण नहीं किया जाएगा। मास्टर डेवलपमेंट प्लान के अनुरूप अंतिम रूप दिया है उसे अधिसूचित किया है तो ही पट्टे जारी होंगे। राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता रेखा बोराणा में नोटिस स्वीकार किए हैं। वहीं जयपुर विकास प्राधिकरण की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद पुरोहित ने पक्ष रखा।
खंडपीठ ने कहा कि वर्ष 2017 व वर्ष 2018 में इस कोर्ट की तरफ से जारी आदेश की अवहेलना न की जाए। खंड पीठ ने कहा कि प्रत्येक शहर या कस्बे का जोनल व सेक्टर प्लान नोटिफाइड होना अनिवार्य है। साथ ही यह मास्टर प्लान के साथ जुड़ा हो। इसके बगैर किसी तरह के निर्माण या कॉलोनी को रेगुलाइज नहीं किया जा सकता है। खंड पीठ ने कहा कि सड़कों की चौड़ाई सहित अन्य सुविधाओं के बारे में इस कोर्ट की तरफ से पूर्व में जारी आदेश की सख्ती से पालना हो। मामले की अगली सुनवाई अब 22 अक्टूबर को होगी।
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