जयपुर
कोर्ट की कड़ी टिप्पणी: अनुसंधान अधिकारी ने कोर्ट को टूल बनाने का प्रयास किया
राजधानी के अधीनस्थ न्यायालय ने विधायक खरीद-फरोख्त प्रकरण में केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह का वॉयस सेम्पल लेने के लिए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की ओर से पेश प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि अनुसंधान अधिकारी ने कोर्ट को टूल बनाकर अनुसंधान पूरा करने की मंशा से प्रार्थना पत्र पेश किया।
जयपुर महानगर द्वितीय क्षेत्र के किराया अधिकरण के पीठासीन अधिकारी ने हाल ही एसीबी का प्रार्थना पत्र खारिज करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि प्रार्थना पत्र स्वीकार करने योग्य नहीं है। संजय जैन के बयान के अनुसार ऑडियो में स्वयं जैन व केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह की आवाज होना मानते हुए एसीबी ने यह प्रार्थना पत्र पेश किया।
कोर्ट ने कहा कि कानूनी प्रावधान के अनुसार वॉयस सेम्पल या मेडिकल परीक्षण के लिए उपस्थित होने का आदेश उसी परिस्थिति में दिया जा सकता है, जब व्यक्ति गिरफ्तार हो या गिरफ्तार किया गया हो। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में ऐसा नहीं था।
कोर्ट ने कहा कि केस डायरी से यह भी स्पष्ट है कि ऑडियो क्लिप में गजेन्द्र सिंह की आवाज होने के संबंध में संजय जैन के कथन के आधार पर अनुसंधान किया। गजेन्द्र सिंह का वॉयस सेम्पल लेने के लिए अनुसंधान अधिकारी की ओर से पेश प्रार्थना पत्र दर्शाता है कि इसे कोर्ट को यंत्र बनाकर अनुसंधान पूर्ण करने की मंशा से पेश किया गया। उल्लेखनीय है कि विधायकों की खरीद-फरोख्त के बारे में सरकारी मुख्य सचेतक महेश जोशी ने शिकायत दी थी, जिसके आधार पर ही एसीबी ने मामला दर्ज किया था।
फाइल एसीबी कोर्ट को लौटाई
कोर्ट ने इसी मामले में संजय जैन के वॉयस सेम्पल देने से इनकार करने पर कोर्ट ने जैन का वॉयस सैंपल लेने का अनुसंधान अधिकारी का प्रार्थना पत्र भी निस्तारित कर दिया। जयपुर महानगर द्वितीय क्षेत्र के किराया अधिकरण के पीठासीन अधिकारी ने मामले की पूरी फाइल बंद लिफाफे में जयपुर स्थित भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम मामलों के विशिष्ट न्यायालय (क्रम संख्या-1) को लौटा दी।
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