भरतपुर के अपना घर आश्रम में 212 से अधिक महिला प्रभुजियों ने करवाचौथ का निर्जला व्रत रखा। 12 साल से आश्रम में रह रहीं मंजू और प्रिया की उम्मीद ने भावुक किया।
भरतपुर। वक्त ने अपनों से दूर कर दिया, जिंदगी ने घर-परिवार का साथ छीन लिया, लेकिन दिल में अपने जीवनसाथी के लिए बसी मोहब्बत आज भी कायम है। इसी प्रेम और उम्मीद की एक भावुक तस्वीर गुरुवार को भरतपुर के अपना घर आश्रम में दिखाई दी। यहां 212 से अधिक महिला प्रभुजियों ने अपने पतियों की लंबी उम्र की कामना के साथ करवाचौथ का निर्जला व्रत रखा। इनमें कुछ ऐसी महिलाएं भी हैं, जिनकी आंखें वर्षों से अपनों के लौटने की राह देख रही हैं, लेकिन उनके मन में पति के प्रति प्रेम और विश्वास आज भी कम नहीं हुआ है।
कभी किसी परिवार की खुशियों का हिस्सा रहीं ये महिलाएं आज मानसिक और शारीरिक अस्वस्थता के चलते अपनों से बिछड़कर आश्रम में रह रही हैं। यहां उन्हें सेवा और उपचार मिल रहा है, लेकिन परिवार से दूर होने की कसक उनके मन में अब भी है। करवाचौथ के मौके पर उनके इसी भावनात्मक जुड़ाव ने पर्व को एक अलग ही अर्थ दे दिया। यह व्रत उनके लिए केवल परंपरा नहीं, बल्कि उस रिश्ते के प्रति समर्पण की अभिव्यक्ति भी बना, जिससे वे आज भी मन से जुड़ी हुई हैं।
12 साल से आश्रम में हैं मंजू, फिर भी पति के लौटने की आस
अपना घर आश्रम में पिछले 12 वर्षों से रह रहीं प्रभुजी मंजू और पिछले पांच साल से करवाचौथ का व्रत रख रहीं प्रिया की कहानी इस उम्मीद को सामने लाती है। लंबा समय गुजर जाने के बावजूद उनके मन में यह विश्वास कायम है कि एक दिन उनके पति उन्हें लेने आश्रम जरूर आएंगे।
उनकी प्रतीक्षा में प्रेम की कसक भी है और अपनों से दोबारा मिलने की उम्मीद भी। पति के लौटने का भरोसा उनके लिए भावनात्मक संबल बना हुआ है। ईश्वर के प्रति अटूट आस्था के सहारे वे उस दिन की प्रतीक्षा कर रही हैं, जब परिवार से बिछड़ने का दर्द खत्म होगा और अपनों का साथ फिर नसीब होगा।
मेहंदी, चुनरी और सुहाग गीतों के बीच मनाया पर्व
आश्रम में करवाचौथ का दिन महिला प्रभुजियों के लिए भावनाओं के साथ उत्सव का अवसर भी बना। उन्होंने हाथों में मेहंदी लगाई, पारंपरिक शृंगार किया और चुनरी के परिधान पहनकर पर्व की तैयारियां कीं।
दोपहर एक बजे सभी एकत्र हुईं और चौथ माता की कथा सुनी। इसके बाद ढोलक की थाप पर सुहाग गीत, भजन और लोकगीत गूंजने लगे। महिला प्रभुजियों ने गीतों पर नृत्य किया और एक-दूसरे के साथ पर्व की खुशियां साझा कीं। रात को चंद्र दर्शन के बाद विधि-विधान से चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित किया गया और फिर व्रत खोला गया।
3,642 महिला प्रभुजियों के आश्रय में प्रेम और विश्वास का पर्व
अपना घर आश्रम में इस समय 3,642 महिला प्रभुजी रह रही हैं। इनमें से 212 से अधिक ने करवाचौथ का व्रत रखकर अपने पतियों की लंबी उम्र की कामना की। इस आयोजन ने एक बार फिर उन भावनाओं को सामने रखा, जो दूरी और परिस्थितियों के बावजूद मन में बनी रहती हैं। आश्रम में रह रहीं इन महिलाओं के लिए करवाचौथ केवल चांद देखकर व्रत खोलने का पर्व नहीं, बल्कि अपने जीवनसाथी के प्रति प्रेम, समर्पण और पुनर्मिलन की उम्मीद को जीवित रखने का अवसर भी बना।
नई हवा खबरें अपने मोबाइल पर नियमित और डायरेक्ट प्राप्त करने के लिए व्हाट्सएप नंबर 9460426838 सेव करें और ‘Hi’ और अपना नाम, स्टेट और सिटी लिखकर मैसेज करें। आप अपनी खबर या रचना भी इस नंबर पर भेज सकते हैं।
