राजस्थान SI भर्ती-2016 में अब बदलेगा पदों का गणित, हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, 180 दिन में नए सिरे से तय होगी मेरिट और वरिष्ठता

राजस्थान SI भर्ती-2016 पर हाईकोर्ट ने पदों की श्रेणीवार पुनर्गणना के निर्देश दिए। 90 दिनों में नए सिरे से पद तय होंगे और 180 दिनों में संशोधित मेरिट, कैडर व वरिष्ठता की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

जयपुर। राजस्थान पुलिस उप निरीक्षक (SI) एवं प्लाटून कमांडर भर्ती-2016 में चयनित अभ्यर्थियों और इस भर्ती में अनारक्षित वर्ग के पदों को लेकर चल रहे विवाद पर राजस्थान हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने राज्य सरकार और राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) को पदों की श्रेणीवार गणना दोबारा करने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले के बाद भर्ती में आरक्षण के हिसाब से पदों का निर्धारण, संशोधित मेरिट, कैडर आवंटन और वरिष्ठता सूची नए सिरे से तय करने की प्रक्रिया शुरू होगी।

न्यायाधीश अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने श्याम सिंह व अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि आरक्षण लागू करते समय 50 प्रतिशत की सीमा और अनुसूचित जाति (SC) एवं अनुसूचित जनजाति (ST) की बैकलॉग रिक्तियों से जुड़े नियमों का पालन अनिवार्य है। अदालत ने पूरी प्रक्रिया 180 दिनों में पूरी करने का आदेश दिया है।

456 पदों में सामान्य वर्ग को मिले सिर्फ 142 पद, यहीं उठा विवाद

इस भर्ती का विज्ञापन RPSC ने 5 अक्टूबर 2016 को जारी किया था। इसके बाद 5 दिसंबर 2018 और 23 अगस्त 2019 को संशोधन किए गए। भर्ती को लेकर अदालत पहुंचे याचिकाकर्ताओं का कहना था कि गैर-अनुसूचित क्षेत्र के कुल 456 पदों में से सामान्य वर्ग के लिए केवल 142 पद निर्धारित किए गए। उनके मुताबिक, इससे अनारक्षित श्रेणी के पदों का अनुपात 50 प्रतिशत से काफी कम रह गया।

याचिकाकर्ताओं ने बैकलॉग रिक्तियों का स्पष्ट आधार नहीं बताए जाने और ओबीसी वर्ग की रिक्तियों को उचित कानूनी प्रावधान के बिना आगे के लिए समायोजित किए जाने पर भी सवाल उठाए थे।

सरकार और RPSC की दलीलें कोर्ट को नहीं लगीं पर्याप्त

राज्य सरकार और RPSC ने वर्षवार रिक्तियों तथा अतिरिक्त शपथपत्र के जरिए पदों के निर्धारण को सही ठहराने का प्रयास किया। हालांकि, हाईकोर्ट ने इसे पर्याप्त नहीं माना और भर्ती में आरक्षण के नियमों के अनुरूप पदों की दोबारा गणना करने के निर्देश दिए। अदालत ने RPSC और संबंधित विभाग को 5 अक्टूबर 2016 के मूल विज्ञापन तथा उसके शुद्धिपत्रों के आधार पर आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा और संबंधित नियमों के अनुसार 90 दिनों के भीतर पदों की श्रेणीवार पुनर्गणना करने को कहा है। इस प्रक्रिया की जानकारी कार्मिक विभाग (DOP) और RPSC की वेबसाइट पर प्रकाशित करनी होगी।

अब संशोधित मेरिट से तय होगी चयनित अभ्यर्थियों की स्थिति

हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक, 1 सितंबर 2020 को घोषित परिणाम के आधार पर चयनित अभ्यर्थियों की स्थिति संशोधित मेरिट के अनुसार निर्धारित की जाएगी। इसके बाद नए रोस्टर और मेरिट के आधार पर कैडर आवंटन तथा वरिष्ठता सूची भी तय होगी। इसका मतलब है कि भर्ती के पदों का दोबारा निर्धारण होने के बाद चयनित अभ्यर्थियों की स्थिति और वरिष्ठता पर भी नए सिरे से निर्णय लिया जाएगा। हालांकि, अदालत ने पहले से नियुक्त अभ्यर्थियों को सेवा से हटाने पर स्पष्ट रोक लगाई है।

मेधावी अनारक्षित अभ्यर्थियों के लिए अतिरिक्त पदों का रास्ता खुला

अदालत ने सामान्य यानी अनारक्षित वर्ग के मेधावी अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा के लिए राज्य सरकार को पर्याप्त संख्या में अतिरिक्त पद सृजित करने की स्वतंत्रता भी दी है। इससे संशोधित गणना के दौरान अनारक्षित वर्ग के मेधावी अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा के लिए अतिरिक्त पदों पर विचार किया जा सकेगा।

अब इस भर्ती में अगला अहम पड़ाव पदों की 90 दिनों में होने वाली पुनर्गणना है। इसके बाद संशोधित मेरिट, कैडर आवंटन और वरिष्ठता सूची तय करने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। हाईकोर्ट ने पूरी कवायद के लिए 180 दिनों की समयसीमा निर्धारित की है।

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