‘FSSAI ने 6 महीने तक के शिशुओं के खाद्य उत्पादों में सुक्रोज और फ्रुक्टोज (चीनी) मिलाने पर रोक का प्रस्ताव दिया है। जानिए क्या हैं नए नियम और बच्चों की सेहत पर इसका असर। पूरी खबर यहाँ पढ़ें।’
दूध में मीठे का खेल खत्म? क्या अब शिशुओं के आहार से हटेगी चीनी?
नई दिल्ली: भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने हाल ही में बच्चों के खान-पान को लेकर एक बेहद सख्त कदम उठाया है। संस्था ने ‘खाद्य सुरक्षा और मानक (शिशु पोषण के लिए खाद्य पदार्थ) संशोधन विनियम, 2026’ का एक नया मसौदा गजट में जारी कर दिया है। इसके तहत अब जन्म से लेकर 6 महीने तक के शिशुओं के लिए तैयार होने वाले खाद्य उत्पादों में कृत्रिम मिठास यानी सुक्रोज (Sucrose) और फ्रुक्टोज (Fructose) मिलाने पर पूरी तरह पाबंदी लगाने की तैयारी चल रही है।
क्या है नियमों में बदलाव की असली वजह?
अक्सर देखा गया है कि बच्चों के शुरुआती उत्पादों में स्वाद बढ़ाने के लिए अतिरिक्त शर्करा (एडेड शुगर) का इस्तेमाल किया जाता है, जो उनकी नाजुक सेहत पर बुरा असर डालती है।
शुरुआती 6 महीने बेहद खास: जीवन के पहले छह महीने बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास की नींव होते हैं। इस दौरान केवल स्तनपान को बढ़ावा दिया जाता है, लेकिन जिन बच्चों को बाहरी उत्पाद दिए जाते हैं, उन्हें शुद्ध पोषण मिलना जरूरी है।
मोटापे और बीमारियों पर लगाम: विशेषज्ञों के मुताबिक, बचपन में जरूरत से ज्यादा शुगर देने से भविष्य में मोटापे, डायबिटीज और अन्य स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ जाते हैं। इसी खतरे को भांपते हुए FSSAI ने नियमों को और ज्यादा कड़ा करने का फैसला किया है।
मौजूदा नियमों से कितना अलग है नया प्रस्ताव?
मौजूदा नियमों (साल 2020) के अनुसार, 24 महीने तक के बच्चों के आहार में कार्बोहाइड्रेट के रूप में लैक्टोज और ग्लूकोज पॉलिमर को प्राथमिकता दी जाती थी। हालांकि, कुछ खास परिस्थितियों में निर्धारित सीमा के भीतर सुक्रोज या फ्रुक्टोज मिलाने की अनुमति थी। लेकिन अब इस नए मसौदे के आने के बाद, 6 महीने तक के बच्चों के लिए बनने वाले उत्पादों में इनके इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाने का स्पष्ट प्रस्ताव है।
आगे की प्रक्रिया: जनता के सुझावों पर टिकी नजरें
यह संशोधन अभी एक मसौदा (Draft) के रूप में सार्वजनिक परामर्श के लिए खुला है।
सुझाव देने की समय-सीमा: आधिकारिक राजपत्र की प्रतियां जनता के लिए उपलब्ध होने की तारीख से 60 दिनों के भीतर देश के आम नागरिक, विशेषज्ञ और उद्योग से जुड़े हितधारक अपनी आपत्तियां और सुझाव दर्ज करा सकते हैं।
अंतिम निर्णय: FSSAI निर्धारित समय सीमा के भीतर मिलने वाले सभी सुझावों की समीक्षा करने के बाद ही इन नए नियमों को अंतिम रूप देगा।
एक बड़ा सवाल: क्या इस नए नियम के लागू होने के बाद शिशु आहार बनाने वाली कंपनियों को अपने उत्पादों के फॉर्मूलेशन में बड़ा बदलाव करना होगा? आने वाले दिनों में इस पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी।
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