एमपीयूएटी उदयपुर में 28 से 30 सितंबर तक लिप्पन कला पर तीन दिवसीय कार्यशाला आयोजित हुई। विद्यार्थियों ने मिट्टी और दर्पण से सजावटी कला की तकनीक सीखी।
उदयपुर। मिट्टी पर दर्पणों की सजावट और लोक-प्रेरित आकृतियों से पहचान बनाने वाली गुजरात के कच्छ की पारंपरिक लिप्पन कला अब उदयपुर के विद्यार्थियों ने भी करीब से जानी। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी) के सामुदायिक एवं व्यावहारिक विज्ञान महाविद्यालय में विद्यार्थियों के लिए 28 से 30 सितंबर तक तीन दिवसीय लिप्पन कला कार्यशाला आयोजित की गई।
कार्यशाला का आयोजन महाविद्यालय के परिधान एवं वस्त्र विज्ञान विभाग की ओर से किया गया। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय पारंपरिक कला एवं शिल्प से परिचित कराने के साथ उनकी रचनात्मकता, कलात्मक अभिव्यक्ति और व्यावहारिक कौशल को बढ़ावा देना था।
मिट्टी-दर्पण से सजावटी डिजाइन तैयार करना सीखा
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को लिप्पन कला की मूल तकनीक से लेकर डिजाइन तैयार करने, दर्पणों की सजावट और अलग-अलग सजावटी उत्पादों पर इस कला के प्रयोग का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। लिप्पन कला गुजरात के कच्छ क्षेत्र की प्रसिद्ध पारंपरिक सजावटी कला है। इसमें मिट्टी और दर्पणों की मदद से ज्यामितीय तथा लोक संस्कृति से प्रेरित आकृतियां तैयार की जाती हैं। कार्यशाला के जरिए विद्यार्थियों को इस पारंपरिक कला की तकनीक को समझने और उसे अपनी रचनात्मकता के साथ प्रयोग करने का अवसर मिला।
डीन ने पहल को बताया परंपरा और कौशल का संगम
कार्यशाला के समापन अवसर पर सामुदायिक एवं व्यावहारिक विज्ञान महाविद्यालय की डीन डॉ. सरला लखावत ने विभाग की पहल की सराहना करते हुए पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला परंपरा, रचनात्मकता और कौशल विकास के सुंदर समन्वय का सफल उदाहरण है।
कार्यशाला का समन्वय विभागाध्यक्ष डॉ. रूपल बाबेल ने किया। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्यशालाएं विद्यार्थियों को भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के साथ उनके कौशल, सृजनात्मकता और नवाचार को भी बढ़ावा देती हैं। आयोजन को सफल बनाने में भूमिका, कृतिका, स्नेहा, दक्षा, नम्रता, भावना, आरती एवं मालदिनी का सक्रिय सहयोग रहा।
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