बयाना में 90 हजार रुपये के चेक अनादरण के करीब चार साल पुराने मामले में वैर एसीजेएम कोर्ट ने आरोपी रामकुमार जाटव को कानूनी और तकनीकी खामियों के चलते दोषमुक्त कर बरी कर दिया।
बयाना (राजीव झालानी)। करीब चार साल से चल रहे 90 हजार रुपये के चेक अनादरण के चर्चित मामले में अदालत ने आरोपी को बड़ी राहत दी है। वैर के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय ने मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद रामकुमार जाटव को दोषमुक्त कर बरी करने के आदेश दिए हैं। अदालत के समक्ष मामले में सामने आई कानूनी और तकनीकी खामियां फैसले का अहम आधार बनीं।
यह मामला लंबे समय से चर्चा में था और इसकी सुनवाई को लेकर वकीलों के बीच भी काफी बातचीत होती रही। आरोपी पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने बताया कि रामकुमार जाटव के खिलाफ वैर तहसील के खेरली गूजर निवासी मोहन सिंह ने 90 हजार रुपये के चेक के अनादरण को लेकर एनआई एक्ट के तहत परिवाद पेश किया था।
शिकायतकर्ता ने पेश किए 6 दस्तावेजी साक्ष्य
मामले की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से अपने दावे के समर्थन में 6 दस्तावेजी साक्ष्य के साथ गवाह भी न्यायालय के समक्ष पेश किए गए। वहीं आरोपी की ओर से अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने मामले के कानूनी पहलुओं और तकनीकी खामियों को अदालत के सामने रखते हुए आरोपी को दोषमुक्त किए जाने की पैरवी की।
कानूनी और तकनीकी खामियों के चलते बरी
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीश मुनीष कुमार सिन्हा ने मामले पर गहन सुनवाई की। अदालत ने मामले में सामने आई कानूनी और तकनीकी खामियों को ध्यान में रखते हुए आरोपी रामकुमार जाटव को चेक अनादरण के मामले में दोषमुक्त कर दिया।
अदालत के इस आदेश के साथ ही करीब चार साल से चल रहे इस चर्चित मामले का पटाक्षेप हो गया और आरोपी को मामले में बरी कर दिया गया।
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