आरोपों पर राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस ने तोड़ी चुप्पी, बोले- ‘सब बेबुनियाद’ | CJI सूर्यकांत के फैसले के बाद खुद मीडिया के सामने रखेंगे अपना पक्ष

राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा ने न्यायाधीश संदीप मेहता के आरोपों को झूठा और तथ्यहीन बताया। CJI सूर्यकांत को जवाब भेजा, फैसले के बाद मीडिया के सामने रखेंगे पक्ष।

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश संदीप मेहता की ओर से लगाए गए आरोपों पर पहली बार खुलकर अपना पक्ष रखा है। उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद, झूठा और तथ्यहीन करार दिया है। साथ ही साफ किया है कि इस पूरे विवाद पर उनका विस्तृत पक्ष अभी सार्वजनिक नहीं किया जाएगा।

न्यायाधीश शर्मा के मुताबिक उन्होंने आरोपों को लेकर अपना जवाब भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को भेज दिया है। इसमें उन्होंने न्यायाधीश संदीप मेहता की ओर से लगाए गए आरोपों का प्रमाण सहित खंडन किया है। अब उनकी नजर सीजेआई के निर्णय पर है।

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तीन गोपनीय पत्र सार्वजनिक होने के बाद बढ़ा विवाद

दरअसल, न्यायाधीश संदीप मेहता की ओर से सीजेआई सूर्यकांत को लिखे गए तीन गोपनीय पत्र 26 अगस्त को मीडिया और सोशल मीडिया पर सार्वजनिक हो गए थे। इन पत्रों में राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा को लेकर कई आरोप लगाए गए थे। इसके बाद न्यायिक गलियारों से लेकर सार्वजनिक चर्चा तक यह मामला लगातार सुर्खियों में रहा।

अब न्यायाधीश शर्मा ने इन आरोपों पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा है कि पत्रों में लगाए गए आरोपों में कोई तथ्य नहीं है। उन्होंने सीजेआई को भेजे अपने जवाब में प्रत्येक आरोप का प्रमाण के साथ खंडन करने की बात कही है।

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‘अभी धैर्य रखें, सही समय पर खुद सामने आऊंगा’

न्यायाधीश शर्मा ने इस मामले में मीडिया, अधिवक्ताओं और अन्य संबंधित लोगों से फिलहाल धैर्य बनाए रखने की अपील की है। उनका कहना है कि पूरे मामले में न्याय के सिद्धांत और न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान किया जाना चाहिए तथा सीजेआई के निर्णय तक इंतजार करना उचित होगा।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह हमेशा के लिए चुप नहीं रहेंगे। सीजेआई की स्वीकृति मिलने के बाद सही समय पर वह स्वयं मीडिया के सामने आएंगे और पूरे मामले में अपना पक्ष रखेंगे।

अब नजर सीजेआई के फैसले पर

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश का यह बयान ऐसे समय आया है, जब उनके और न्यायाधीश संदीप मेहता से जुड़े आरोप-प्रत्यारोप को लेकर सार्वजनिक स्तर पर चर्चा तेज है। शर्मा ने फिलहाल अपने विस्तृत जवाब को सार्वजनिक करने के बजाय उसे सीजेआई के समक्ष रखने का रास्ता चुना है।

उन्होंने भारतीय न्याय प्रणाली में पूरा विश्वास जताते हुए संकेत दिया है कि सीजेआई के निर्णय के बाद इस विवाद पर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

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