CAG रिपोर्ट में रेलवे की बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। 55 kmph की औसत रफ्तार पूरी नहीं करने वाली ट्रेनों से भी सुपरफास्ट चार्ज लिया गया। 100 ट्रेनें मार्च 2026 तक मानक से नीचे मिलीं।
नई दिल्ली। आपकी ट्रेन 55 किलोमीटर प्रति घंटे की औसत रफ्तार भी हासिल नहीं कर रही, लेकिन टिकट में आपसे ‘सुपरफास्ट’ का पैसा जरूर लिया जा रहा है। भारतीय रेलवे की इसी व्यवस्था ने अब यात्रियों की जेब और रेलवे के दावों दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
CAG की रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि अप्रैल 2022 से मार्च 2023 के बीच रेलवे ने ऐसी ट्रेनों के यात्रियों से करीब 168 करोड़ रुपये का सुपरफास्ट सरचार्ज वसूल लिया, जो तय मानकों पर सुपरफास्ट थीं ही नहीं। और मामला सिर्फ पुराना नहीं है। ऑडिट में जिन 190 ट्रेनों पर सवाल उठाया गया था, उनमें से 100 ट्रेनें मार्च 2026 तक भी 55 किलोमीटर प्रति घंटे की औसत रफ्तार से नीचे चल रही थीं। इसके बावजूद यात्रियों से सुपरफास्ट चार्ज की वसूली जारी रही।
टिकट में ‘सुपरफास्ट’, पटरियों पर रफ्तार 55 से कम
रेलवे के नियम के मुताबिक ब्रॉड गेज की ट्रेन को सुपरफास्ट श्रेणी में रखने के लिए उसकी औसत गति कम से कम 55 किलोमीटर प्रति घंटा होनी चाहिए। इसी श्रेणी की ट्रेन में सफर करने पर यात्री से सामान्य किराये के अतिरिक्त सुपरफास्ट सरचार्ज लिया जाता है। लेकिन CAG की पड़ताल में यही पूरा सिस्टम सवालों के घेरे में आ गया। जिन ट्रेनों की रफ्तार तय सीमा से कम थी, उनमें भी यात्रियों के टिकट पर सुपरफास्ट शुल्क जुड़ता रहा। मतलब साफ है—ट्रेन सुपरफास्ट नहीं, लेकिन टिकट में चार्ज सुपरफास्ट!
168 करोड़ की वसूली पर ऑडिट ने उठाया सवाल
CAG ने अप्रैल 2022 से मार्च 2023 के आंकड़ों की जांच के दौरान करीब 168 करोड़ रुपये की अनियमित वसूली पकड़ी। ऑडिट में पाया गया कि जिन ट्रेनों पर यह शुल्क लगाया गया, वे सुपरफास्ट ट्रेन के लिए तय औसत गति के मानक को पूरा नहीं कर रही थीं।
यह मामला अगस्त 2024 में रेलवे के सामने रखा गया। रेलवे ने गलती स्वीकार करते हुए सुधारात्मक कदम उठाने की बात कही। लेकिन बाद की जांच ने तस्वीर पूरी तरह नहीं बदली।
रेलवे के निर्देश के बाद भी 100 ट्रेनें नहीं सुधरीं
CAG ने ICMS के आंकड़ों की दोबारा जांच की। इसमें सामने आया कि ऑडिट में चिन्हित 190 ट्रेनों में से 100 ट्रेनें मार्च 2026 तक भी 55 kmph की सीमा से नीचे चल रही थीं। इसके बावजूद संबंधित क्षेत्रीय रेलवे इन ट्रेनों पर यात्रियों से सुपरफास्ट सरचार्ज वसूलते रहे। CAG ने इसे नवंबर 2025 में रेलवे मंत्रालय की ओर से जारी निर्देशों के प्रभावी तरीके से लागू नहीं होने का संकेत माना है।
यात्री को हर क्लास में देना पड़ता है अतिरिक्त पैसा
सुपरफास्ट ट्रेन के नाम पर लिया जाने वाला यह चार्ज टिकट की श्रेणी के हिसाब से तय है। जनरल/सेकेंड क्लास में यात्री से 15 रुपये, स्लीपर में 30 रुपये और एसी थ्री टियर, एसी थ्री टियर इकोनॉमी तथा सेकेंड एसी में 45 रुपये सुपरफास्ट सरचार्ज लिया जाता है। वहीं फर्स्ट एसी में यह रकम 75 रुपये है। यानी ट्रेन को सुपरफास्ट मानकर टिकट जारी हुआ तो यात्री को यात्रा के बाकी किराये के साथ यह रकम भी चुकानी होगी।
अब रेलवे बोर्ड को करना होगा फैसला
CAG ने रेलवे बोर्ड से कहा है कि ट्रेन शेड्यूल की समीक्षा की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि सिर्फ मानक पूरा करने वाली ट्रेनों को ही सुपरफास्ट घोषित किया जाए।
सवाल अब सिर्फ 168 करोड़ रुपये की पुरानी वसूली का नहीं है। बड़ा सवाल यह है कि जब 100 ट्रेनें मार्च 2026 तक भी सुपरफास्ट की निर्धारित रफ्तार हासिल नहीं कर रही थीं, तो उनसे यात्रियों से सुपरफास्ट चार्ज क्यों लिया जाता रहा?
CAG की रिपोर्ट ने रेलवे की उस व्यवस्था पर सीधा सवाल खड़ा कर दिया है, जिसमें ट्रेन की रफ्तार कुछ और है और टिकट पर उसकी पहचान कुछ और।
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