बीकानेर में CBI ने 48 करोड़ रुपये के रेलवे प्रोजेक्ट के बिल पास कराने के बदले 1.20 लाख रुपये की रिश्वत लेते SSO राजेंद्र चौधरी और राकेश को गिरफ्तार किया।
बीकानेर। रेलवे के करीब 48 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट के बिल भुगतान की राह आसान करने के बदले रिश्वत मांगना दो रेल कार्मिकों को भारी पड़ गया। सीबीआई की जयपुर शाखा की भ्रष्टाचार निरोधक इकाई ने बीकानेर में ट्रैप कार्रवाई करते हुए सीनियर सेक्शन ऑफिसर राजेंद्र चौधरी और कार्मिक राकेश को 1 लाख 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।
कार्रवाई के बाद रेलवे के संबंधित कार्यालयों में हड़कंप मच गया। सीबीआई अब यह पता लगाने में जुटी है कि बिल भुगतान के इस मामले में रिश्वत की डिमांड तक मामला सीमित था या इससे पहले भी इसी प्रोजेक्ट अथवा दूसरे टेंडरों में कोई लेन-देन हुआ है।
48 करोड़ के प्रोजेक्ट के बिल बने रिश्वत का जरिया
मामला कोलकाता की MRT कंपनी से जुड़े रेलवे के करीब 48 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट का बताया जा रहा है। कंपनी की ओर से काम पूरा किए जाने के बाद भुगतान के लिए बिल रेलवे कार्यालय में लगाए गए थे।
आरोप है कि इन बिलों को पास कराने और भुगतान जारी कराने के बदले संबंधित रेल कार्मिकों की ओर से रिश्वत की मांग की जा रही थी। शिकायत सीबीआई तक पहुंची तो अधिकारियों ने पहले तथ्यों का सत्यापन कराया और इसके बाद ट्रैप की योजना तैयार की।
1.20 लाख लेकर जैसे ही बैठे, CBI ने घेर लिया
सीबीआई के अनुसार, बिल क्लीयर कराने के लिए 1 लाख 20 हजार रुपये की रकम तय हुई थी। कंपनी की ओर से नवल किशोर यह रकम लेकर पहुंचा। जैसे ही राजेंद्र चौधरी और राकेश ने उससे रिश्वत की राशि ली, पहले से तैयार सीबीआई टीम ने कार्रवाई कर दोनों को मौके पर पकड़ लिया।
ट्रैप के दौरान रिश्वत की रकम भी बरामद की गई। कार्रवाई के बाद दोनों आरोपियों से पूछताछ शुरू कर दी गई है।
अब नवल किशोर से भी पूछताछ, पुराने लेन-देन पर नजर
रिश्वत की रकम लेकर पहुंचे कंपनी प्रतिनिधि नवल किशोर से भी सीबीआई पूछताछ कर रही है। जांच का एक अहम बिंदु यह है कि क्या इस प्रोजेक्ट के बिलों के भुगतान के लिए पहली बार रिश्वत मांगी गई थी या पहले भी किसी तरह का अवैध लेन-देन हुआ है।
सीबीआई अब मामले से जुड़े दूसरे दस्तावेजों और लेन-देन की कड़ियों को भी खंगाल रही है।
रेलवे की फाइलों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच
कार्रवाई के बाद सीबीआई की टीम ने 48 करोड़ रुपये के टेंडर प्रोजेक्ट से जुड़ी फाइलें, बिल, वाउचर और डिजिटल दस्तावेज अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू की है। अधिकारियों के मुताबिक जांच का दायरा केवल ट्रैप की रकम तक सीमित नहीं रखा जा रहा, बल्कि प्रोजेक्ट से जुड़े भुगतान और संबंधित दस्तावेजों की भी पड़ताल की जा रही है।
दोनों आरोपियों के ठिकानों पर भी पहुंची टीम
ट्रैप कार्रवाई के बाद सीबीआई की अलग-अलग टीमें राजेंद्र चौधरी और राकेश के आवासीय परिसरों पर भी जांच कर रही हैं। यहां उनकी संपत्तियों और अन्य दस्तावेजों से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है।
आरोपियों को आगे सीबीआई की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा। इसके बाद जांच एजेंसी को पूछताछ के लिए रिमांड मिलने की संभावना है।
इस कार्रवाई ने रेलवे के एकाउंट्स और इंजीनियरिंग से जुड़े कामकाज पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सीबीआई अब यह पता लगाने में जुटी है कि 48 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट में बिल भुगतान की प्रक्रिया के दौरान रिश्वत की मांग किस स्तर तक पहुंची थी और इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क तो सक्रिय नहीं था।
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