उदयपुर में एग्रीविजन-2026 का शुभारंभ हुआ। राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने कृषि में AI, ड्रोन, सेंसर, रोबोटिक्स और स्टार्टअप को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
उदयपुर। खेती अब सिर्फ खेत और मौसम के भरोसे रहने वाला काम नहीं रह गया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन, सेंसर, रोबोटिक्स और स्टार्टअप जैसी तकनीकें कृषि की तस्वीर बदल रही हैं और इस बदलाव में युवाओं की भूमिका सबसे अहम हो सकती है। इसी सोच को केंद्र में रखते हुए महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी), उदयपुर और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय द्वितीय जोनल कन्वेंशन ‘एग्रीविजन-2026’ का आगाज हुआ।
राजस्थान कृषि महाविद्यालय के महाराणा प्रताप सभागार में आयोजित सम्मेलन का विषय ‘कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में नवाचार एवं उद्यमिता विकास में युवाओं की भूमिका’ रखा गया है। कार्यक्रम का शुभारंभ राजस्थान के राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति हरिभाऊ किसनराव बागड़े के मुख्य आतिथ्य में हुआ।
कार्यक्रम से पहले राज्यपाल ने महाराणा प्रताप की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की, वृक्षारोपण किया और विश्वविद्यालय की ओर से लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया।
कृषि भूमि घट रही, तकनीक से बढ़ानी होगी उत्पादकता
राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने कृषि के सामने बढ़ती चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि राजस्थान में करीब 1.8 करोड़ हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है, जो देश की कुल कृषि योग्य भूमि का लगभग 11 प्रतिशत है। गैर-कृषि उपयोग बढ़ने और आबादी में वृद्धि के साथ कृषि भूमि पर दबाव भी बढ़ रहा है। ऐसे में उपलब्ध भूमि और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करते हुए उनका टिकाऊ और विवेकपूर्ण इस्तेमाल जरूरी है।
उन्होंने कहा कि भारत की जलवायु और मिट्टी की विविधता कृषि के लिए बड़ी ताकत है। युवाओं को इसी ताकत को आधुनिक तकनीक से जोड़ना होगा। AI, ड्रोन, सेंसर, रोबोटिक्स और स्टार्टअप के जरिए कृषि उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने में युवा बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
कभी बाहर से मंगाना पड़ता था अनाज, अब आत्मनिर्भर भारत
राज्यपाल ने कृषि क्षेत्र में भारत की यात्रा का उदाहरण देते हुए कहा कि 1980-90 के दशक में भारत को अमेरिका सहित दूसरे देशों से लाल ज्वार और गेहूं आयात करना पड़ता था। आज किसानों की मेहनत और आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से देश खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर हो चुका है और जरूरतमंद वर्गों को निःशुल्क खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है।
उन्होंने युवाओं से खाद्य पदार्थों की बर्बादी रोकने, ‘फार्म-टू-कंज्यूमर’ व्यवस्था को बढ़ाने और कृषि आधारित स्टार्टअप एवं नवाचार को आगे ले जाने का आह्वान किया।
राज्यपाल ने युवाओं को भारतीय कृषि परंपरा से जुड़ने की भी प्रेरणा दी। उन्होंने चक्रपाणि, महर्षि पराशर और भारत के कृषि मनीषियों के साहित्य का अध्ययन करने की बात कही, ताकि आत्मनिर्भरता, विवेक और उच्च नैतिक चरित्र की प्रेरणा मिल सके। साथ ही उन्होंने नशा-मुक्त समाज के निर्माण में युवाओं की सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया।
एमपीयूएटी की उपलब्धियां भी सामने रखीं
विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. प्रताप सिंह ने अध्यक्षीय उद्बोधन में विश्वविद्यालय की शोध एवं नवाचार संबंधी उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय अब तक 59 फसल किस्में विकसित कर चुका है। विभिन्न संस्थानों और निजी बीज कंपनियों के साथ 81 एमओयू किए गए हैं।
जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए 71 तकनीकों को पैकेज ऑफ प्रैक्टिसेज (PoP) में शामिल किया गया है, जबकि कृषि क्षेत्र में अनुसंधान एवं नवाचार को आगे बढ़ाने की दिशा में विश्वविद्यालय को अब तक 58 पेटेंट प्राप्त हुए हैं।
डॉ. प्रताप सिंह ने कहा कि ये उपलब्धियां टिकाऊ, प्राकृतिक और तकनीक आधारित कृषि के विकास तथा किसानों के हित में विश्वविद्यालय के प्रयासों को दर्शाती हैं।
इसी दौरान कुलगुरु ने राज्यपाल के समक्ष प्रदेश के पांचों कृषि विश्वविद्यालयों से जुड़ी पेंशन समस्या भी उठाई और इसके शीघ्र एवं स्थायी समाधान के लिए आवश्यक पहल का अनुरोध किया।
दो राज्यों से पहुंचेंगे 600 से ज्यादा वैज्ञानिक और शोधार्थी
आयोजन सचिव डॉ. लोकेश गुप्ता ने सम्मेलन की रूपरेखा और उद्देश्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में दो राज्यों से 600 से अधिक कृषि वैज्ञानिक एवं शोधार्थी प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन में कृषि और उद्यमिता विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श होगा।
एबीवीपी के जोनल संगठन सचिव अश्वनी शर्मा ने कहा कि विद्यार्थी परिषद आंदोलनों के साथ रचनात्मक गतिविधियों के जरिए विद्यार्थियों और युवाओं की आवाज उठाने तथा उन्हें नवाचार और स्टार्टअप की दिशा में प्रेरित करने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि परिषद कृषि से जुड़े मुद्दों पर भी लगातार सक्रिय है।
उन्होंने कहा कि एग्रीविजन के जरिए किसानों और कृषि क्षेत्र की समस्याओं को सामने लाने तथा उनके समाधान के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। कृषि को सम्मानजनक और लाभकारी क्षेत्र बनाने तथा चुनौतियों से जूझ रहे अन्नदाता को आगे लाने की दिशा में भी एग्रीविजन काम कर रहा है।
एग्रीविजन की राष्ट्रीय सह-संयोजक सुश्री तन्वी चौधरी ने संगठन की गतिविधियों और उद्देश्यों की जानकारी देते हुए युवाओं से राष्ट्रहित को केंद्र में रखकर सोच विकसित करने और काम करने का आह्वान किया।
पांचों कृषि विश्वविद्यालयों के कुलगुरु समेत जुटे विशेषज्ञ
कार्यक्रम में प्रदेश के पांचों कृषि विश्वविद्यालयों के कुलगुरुओं की उपस्थिति रही। इनमें डॉ. विमला दुंकवाल (कृषि विश्वविद्यालय, कोटा), डॉ. आर. बी. दुबे (स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर) और डॉ. वी. एस. जैतावत (कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर) शामिल रहे।
इसके अलावा डॉ. वी. डी. मुडगल, पद्मश्री श्याम पालीवाल और प्रगतिशील कृषक पाशा पटेल भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। विश्वविद्यालयों के अधिष्ठाता, निदेशक, विभागाध्यक्ष, वैज्ञानिक, प्राध्यापक और विद्यार्थी भी सम्मेलन से जुड़े।
सम्मेलन में बड़ी संख्या में कृषि वैज्ञानिक, शोधार्थी और विद्यार्थी भाग ले रहे हैं। प्रतिभागी पोस्टर और व्याख्यानों के माध्यम से अपने शोध-पत्र एवं शोध कार्य प्रस्तुत करेंगे।
कार्यक्रम के अंत में चित्तौड़ प्रांत के राज्य संयोजक डॉ. अंशुल शर्मा ने आभार व्यक्त किया। मंच संचालन सुश्री श्रेया भट्ट ने किया।
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