दिल्ली-जयपुर NH-48 पर शाहजहांपुर टोल प्लाजा भी MLFF फ्री-फ्लो सिस्टम से जुड़ गया है। अब बिना रुके FASTag से टोल कटेगा। जानिए 72 घंटे का नियम, डबल जुर्माना और नए टोल नियम।
जयपुर/नई दिल्ली। अगर आप दिल्ली, गुरुग्राम, नीमराणा, बहरोड़, कोटपूतली या जयपुर के बीच अक्सर सफर करते हैं तो आज से आपकी यात्रा पहले जैसी नहीं रहेगी। हाईवे पर टोल प्लाजा आते ही ब्रेक लगाने, लंबी कतार में खड़े रहने और अपनी बारी का इंतजार करने का दौर अब इस रूट पर लगभग खत्म हो गया है।
राष्ट्रीय राजमार्ग-48 (NH-48) पर गुरुग्राम से जयपुर के बीच करीब 270 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर को पूरी तरह बैरियर-फ्री कर दिया गया है। राजस्थान-हरियाणा सीमा पर स्थित शाहजहांपुर टोल प्लाजा पर मल्टी लेन फ्री फ्लो (MLFF) सिस्टम शुरू होने के साथ ही अब इस पूरे मार्ग पर वाहन बिना रुके गुजर सकेंगे और टोल अपने आप FASTag से कट जाएगा। लेकिन इस नई सुविधा के साथ एक सख्त नियम भी लागू हो गया है—यदि FASTag में बैलेंस नहीं हुआ तो सिर्फ टोल ही नहीं, दोगुना भुगतान भी करना पड़ सकता है।
अब टोल प्लाजा पर नहीं लगेगी लाइन
अब तक दिल्ली-जयपुर हाईवे पर सफर करने वालों के लिए सबसे बड़ी परेशानी टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारें थीं। छुट्टियों, त्योहारों और पीक ऑवर्स में कई बार 15 से 30 मिनट तक इंतजार करना पड़ता था।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद अब वाहन चालक को न बैरियर के सामने रुकना होगा और न ही टोल बूथ पर भुगतान करना होगा। गाड़ी सामान्य रफ्तार से आगे बढ़ेगी और ऊपर लगे हाईटेक सिस्टम कुछ सेकेंड में पूरा काम कर देगा।
कैसे काम करेगा नया सिस्टम?
हाईवे पर लगाए गए विशाल स्टील गेंट्री फ्रेम में RFID रीडर और ANPR (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन) कैमरे लगाए गए हैं।
जैसे ही कोई वाहन इनके नीचे से गुजरता है, कैमरे उसकी नंबर प्लेट पढ़ लेते हैं और RFID रीडर विंडशील्ड पर लगे FASTag को स्कैन कर लेता है। इसके बाद टोल राशि सीधे लिंक बैंक खाते से कट जाती है और वाहन मालिक के मोबाइल पर तुरंत संदेश पहुंच जाता है।
पूरी प्रक्रिया इतनी तेज होती है कि चालक को इसका अहसास तक नहीं होता।
शाहजहांपुर बना आखिरी पड़ाव
राजस्थान के मनोहरपुरा और दौलतपुर टोल प्लाजा पहले ही MLFF तकनीक से जुड़ चुके थे। अब शाहजहांपुर के शामिल होने के बाद गुरुग्राम से जयपुर तक पूरा कॉरिडोर बैरियर-फ्री हो गया है।
यानी अब इस पूरे रूट पर कहीं भी बूम बैरियर नहीं मिलेगा और हाईवे फ्री-वे की तरह संचालित होगा।
सबसे ज्यादा फायदा किन लोगों को?
इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभ रोजाना दिल्ली-एनसीआर और राजस्थान के बीच आने-जाने वाले हजारों यात्रियों को मिलेगा।
विशेष रूप से जयपुर, कोटपूतली, बहरोड़, नीमराणा, अलवर और शाहजहांपुर के दैनिक यात्रियों, ट्रांसपोर्ट कंपनियों, बस ऑपरेटरों और पर्यटकों की यात्रा पहले से अधिक तेज और सुगम होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि बार-बार रुकने और चलने की जरूरत खत्म होने से ईंधन की बचत होगी, यात्रा का समय कम होगा और वाहनों से होने वाले प्रदूषण में भी कमी आएगी।
लेकिन यहां जरा संभल जाइए…
नई व्यवस्था का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि अब टोल देना नहीं पड़ेगा।
NHAI ने साफ किया है कि यात्रा शुरू करने से पहले FASTag में पर्याप्त बैलेंस होना जरूरी है। यदि FASTag निष्क्रिय, खराब या बैलेंस रहित मिला तो सिस्टम तुरंत वाहन की पहचान कर लेगा।
72 घंटे का नियम क्या है?
यदि किसी वाहन का FASTag वैध नहीं पाया गया या खाते में पर्याप्त राशि नहीं हुई तो वाहन स्वामी को इलेक्ट्रॉनिक नोटिस भेजा जाएगा।
इसके बाद 72 घंटे के भीतर बकाया टोल जमा करना होगा। समय सीमा निकलने पर दोगुना टोल (Double Penalty) लगाया जा सकता है।
कैमरों से नहीं बच पाएगा कोई वाहन
अगर किसी वजह से FASTag स्कैन नहीं होता, तब भी हाईवे पर लगे ANPR कैमरे वाहन की नंबर प्लेट पढ़कर उसकी पहचान कर लेंगे।
सिस्टम वाहन की तस्वीर और वीडियो रिकॉर्ड करेगा तथा बकाया टोल को वाहन के रिकॉर्ड से जोड़ देगा। इसके बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
देशभर में लागू होगी नई व्यवस्था
केंद्र सरकार का लक्ष्य मार्च 2029 तक देश के सभी चार लेन और उससे चौड़े राष्ट्रीय राजमार्गों एवं एक्सप्रेसवे को इसी तरह बैरियर-फ्री फ्री-फ्लो टोलिंग सिस्टम से जोड़ने का है।
फिलहाल यह व्यवस्था गुजरात के चोरयासी (NH-48), दिल्ली के मुंडका (UER-II), हरियाणा के घरौंडा (NH-44) और राजस्थान के मनोहरपुरा, दौलतपुर तथा शाहजहांपुर में लागू हो चुकी है।
यात्रा पर निकलने से पहले ये 5 काम जरूर करें
- FASTag का बैलेंस चेक करें।
- FASTag सक्रिय (Active) है या नहीं, इसकी पुष्टि करें।
- मोबाइल नंबर बैंक खाते से लिंक रखें ताकि भुगतान का संदेश मिल सके।
- FASTag को विंडशील्ड पर सही स्थान पर लगाएं।
- नोटिस मिलने पर 72 घंटे के भीतर भुगतान जरूर करें।
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