भरतपुर में माहेश्वरी समाज ने ऋषि पंचमी पर परंपरानुसार रक्षाबंधन पर्व मनाया। महिलाओं ने सप्त ऋषियों की पूजा, कथा श्रवण और व्रत के बाद भाइयों को राखी बांधी।
भरतपुर। भाई-बहन के प्रेम और रक्षा के संकल्प से जुड़ा रक्षाबंधन माहेश्वरी समाज में अपनी अलग परंपरा के साथ मनाया गया। ऋषि पंचमी के अवसर पर समाज की महिलाओं ने सप्त ऋषियों की पूजा-अर्चना की, कथा का श्रवण किया और व्रत रखा। इसके बाद महिलाओं ने अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी दीर्घायु, सुख और समृद्धि की कामना की।
व्रत के दौरान महिलाओं ने संवा के चावलों से तैयार प्रसाद ग्रहण किया। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ रक्षाबंधन का यह पर्व समाज के परिवारों में श्रद्धा और उत्साह के माहौल में मनाया गया।
भादों की तीज से ऋषि पंचमी तक चलती है परंपरा
माहेश्वरी समाज के जिलाध्यक्ष ओ. पी. माहेश्वरी ने बताया कि समाज में रक्षाबंधन का पर्व सामान्य रूप से एक दिन का आयोजन नहीं है, बल्कि इसकी परंपरा भाद्रपद मास की तृतीया से शुरू होकर ऋषि पंचमी के दिन पूर्ण होती है। ऋषि पंचमी के दिन देशभर में माहेश्वरी समाज इस पर्व को अपनी परंपरा के अनुसार मनाता है।
उन्होंने समाज की मान्य परंपरा का उल्लेख करते हुए बताया कि माहेश्वरी जाति की उत्पत्ति महेश नवमी के दिन हुई थी। इसके बाद भादों मास की तीज के अवसर पर माँ पार्वती द्वारा माहेश्वरी समाज की मातृशक्ति का मिलन कराया गया, जिसे समाज में सातूड़ी तीज के रूप में मनाया जाता है।
सातूड़ी तीज के बाद आने वाली ऋषि पंचमी को रक्षाबंधन पर्व के रूप में मनाने की परंपरा है। यही वजह है कि माहेश्वरी समाज में रक्षाबंधन का यह आयोजन अपनी धार्मिक और सामाजिक परंपराओं से जुड़ा हुआ है।
जिलाध्यक्ष ने दी समाज को शुभकामनाएं
इस अवसर पर जिलाध्यक्ष ओ. पी. माहेश्वरी ने माहेश्वरी समाज के सभी परिवारों को रक्षाबंधन पर्व की बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने समाज के प्रत्येक परिवार के लिए सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और मंगलमय जीवन की कामना की।
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