राजस्थान के सरकारी स्कूलों में AI की एंट्री: शिक्षा विभाग और पीरामल फाउंडेशन के बीच ऐतिहासिक MoU; कक्षा 8 से 12 तक के छात्र अब डिजिटल तकनीक से पढ़ेंगे

राजस्थान सरकार और पीरामल फाउंडेशन के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर हुए। AI, Personalized Adaptive Learning, डिजिटल शिक्षा, छात्रवृत्ति और बालिका शिक्षा को नई मजबूती मिलेगी।

जयपुर। राजस्थान की स्कूली शिक्षा को अधिक आधुनिक, तकनीक-संचालित और भविष्योन्मुख बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। गुरुवार को शासन सचिवालय में शिक्षा विभाग और पीरामल फाउंडेशन के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस साझेदारी के तहत अब सरकारी स्कूलों के बच्चों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और पर्सनलाइज्ड एडेप्टिव लर्निंग (PAL) आधारित डिजिटल शिक्षा से जोड़ा जाएगा, जिससे छात्रों के सीखने के स्तर (लर्निंग आउटकम) में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।

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आला अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ समझौता

यह ऐतिहासिक समझौता स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजेश यादव की अध्यक्षता और समग्र शिक्षा की राज्य परियोजना निदेशक डॉ. रश्मि शर्मा की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। इस साझेदारी के तहत पीरामल फाउंडेशन एक ‘टेक्निकल सपोर्ट यूनिट’ के तौर पर काम करेगा और राज्य की डिजिटल शिक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए पूरा तकनीकी सहयोग प्रदान करेगा।

बालिकाओं को स्कॉलरशिप और पढ़ाई में मिलेगी बड़ी मदद

यह पहल न केवल पढ़ाई के स्तर को सुधारेगी, बल्कि प्रदेश में बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने में भी मील का पत्थर साबित होगी। इसके जरिए छात्राओं को मिलने वाली छात्रवृत्ति (स्कॉलरशिप) संबंधी योजनाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और सुगम बनाया जाएगा, ताकि बिना किसी परेशानी के हर जरूरतमंद बेटी तक मदद पहुंच सके।

इस डिजिटल साझेदारी की 4 बड़ी बातें:

  • कक्षा 8 से 12 पर विशेष फोकस: इस तकनीक के जरिए आठवीं से बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लर्निंग आउटकम में उल्लेखनीय सुधार लाने का लक्ष्य रखा गया है।

  • PAL डैशबोर्ड से गवर्नेंस: पीएएल (PAL) डैशबोर्ड के माध्यम से डेटा और डेटाबेस गवर्नेंस को पहले से कहीं अधिक मजबूत, सटीक और व्यवस्थित किया जाएगा।

  • शिक्षकों का होगा क्षमता संवर्धन: एडटेक (एजूकेशन टेक्नोलॉजी) आधारित विशेष कार्यक्रमों के जरिए शिक्षकों और तकनीकी सहयोगियों को लगातार ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि वे नई तकनीक में माहिर हो सकें।

  • हर बच्चे तक समावेशी शिक्षा: इस पूरे प्रोजेक्ट का अंतिम उद्देश्य राज्य के हर आखिरी छोर पर बैठे विद्यार्थी तक गुणवत्तापूर्ण, समावेशी और व्यक्तिगत (पर्सनलाइज्ड) डिजिटल शिक्षा की पहुँच सुनिश्चित करना है।

शिक्षा विभाग की यह अनूठी साझेदारी आने वाले समय में राजस्थान के शैक्षिक परिदृश्य को एक नया विस्तार देगी और प्रदेश के सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों के मुकाबले तकनीकी रूप से ज्यादा सशक्त बनाएगी।

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