भीलवाड़ा में एसीबी ने सिटी कोतवाली थाने के कांस्टेबल रज्जाक मोहम्मद को 6 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। पुराने केस की फाइल का जल्द निस्तारण कराने के नाम पर रिश्वत मांगने का आरोप है।
भीलवाड़ा। थाने में लंबित पड़ी एक पुरानी केस फाइल को आगे बढ़ाने की कीमत तय कर दी गई थी। आरोप है कि शिकायतकर्ता को बार-बार थाने बुलाया गया और कार्रवाई जल्द करने के नाम पर रिश्वत मांगी गई। लेकिन इस बार रिश्वत का सौदा पूरा होने से पहले ही भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने पूरा खेल पलट दिया।
राजस्थान के भीलवाड़ा में मंगलवार को एसीबी प्रथम की टीम ने सिटी कोतवाली थाने में तैनात कांस्टेबल रज्जाक मोहम्मद को 6 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। आरोपी से पूछताछ जारी है और अब जांच इस बात पर भी केंद्रित है कि क्या इस पूरे मामले में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था।
2022 के केस की फाइल बनी रिश्वत का आधार
एसीबी के अनुसार 29 जून को एक परिवादी ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि वर्ष 2022 में उसके खिलाफ दर्ज एक मामले की जांच लंबे समय से लंबित थी। आरोप है कि उस फाइल से जुड़ा काम कांस्टेबल रज्जाक मोहम्मद देख रहा था और वह शिकायतकर्ता को बार-बार थाने बुलाकर परेशान करता था।
परिवादी का आरोप था कि फाइल का जल्द निस्तारण कराने के बदले कांस्टेबल ने 20 हजार रुपये की रिश्वत मांगी। शिकायत के अनुसार वह पहले ही 5 हजार रुपये ले चुका था और बाकी रकम के लिए लगातार दबाव बना रहा था।
जूस सेंटर के बाहर बिछा ACB का जाल
शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने पहले रिश्वत की मांग का सत्यापन कराया। पुष्टि होने पर ट्रैप की योजना बनाई गई।
मंगलवार दोपहर परिवादी को 6 हजार रुपये देकर सिटी कोतवाली के पीछे स्थित राजा जूस सेंटर भेजा गया। आरोप है कि कांस्टेबल ने रिश्वत की रकम लेकर उसे अपनी मोटरसाइकिल के बैग में रखवा लिया। जैसे ही वह वहां से निकलने लगा, पहले से निगरानी कर रही एसीबी टीम ने उसे दबोच लिया।
तलाशी के दौरान मोटरसाइकिल के बैग से वही 6 हजार रुपये बरामद कर लिए गए, जिसके बाद आरोपी को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया।
क्या रिश्वत की रकम किसी और तक भी पहुंचनी थी?
एसीबी अधिकारियों के मुताबिक पूछताछ के दौरान आरोपी ने यह दावा किया है कि उसने किसी अधिकारी से बात कर रिश्वत की रकम कम करवाई थी। इसी बयान के बाद जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है।
अब एसीबी संबंधित केस फाइल, दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि रिश्वत के इस खेल में केवल कांस्टेबल शामिल था या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क भी काम कर रहा था।
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