अब पढ़ाई नहीं होगी बेकार | बीच में छूटी शिक्षा भी आएगी काम, सरकार ने बताया कैसे बदल रहा है छात्रों का पूरा रिकॉर्ड सिस्टम

शिक्षा मंत्रालय ने APAAR और अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (ABC) की प्रगति की जानकारी दी। जानिए कैसे यह डिजिटल व्यवस्था छात्रों के रिकॉर्ड, क्रेडिट ट्रांसफर और बीच में छूटी पढ़ाई को आसान बना रही है।

नई दिल्ली। अगर किसी छात्र की पढ़ाई बीच में छूट जाए, कॉलेज बदलना पड़े या सालों बाद फिर से पढ़ाई शुरू करनी हो, तो अब मेहनत और हासिल किए गए अंक बेकार नहीं जाएंगे। केंद्र सरकार देश की शिक्षा व्यवस्था को ऐसे डिजिटल मॉडल में बदल रही है, जहां हर छात्र की शैक्षणिक यात्रा एक सुरक्षित डिजिटल खाते में दर्ज रहेगी और जरूरत पड़ने पर वहीं से आगे बढ़ाई जा सकेगी।

इसी दिशा में शिक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (ABC) और APAAR (ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री) की प्रगति और उससे छात्रों को मिलने वाले फायदों का विस्तृत ब्यौरा जारी किया।

26 करोड़ से ज्यादा छात्रों को मिली डिजिटल पहचान

सरकार के मुताबिक जून 2026 तक देशभर में 26.30 करोड़ सत्यापित APAAR आईडी जारी की जा चुकी हैं। यह 12 अंकों की एक यूनिक स्टूडेंट आईडी है, जिसे ‘वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी’ की अवधारणा के तहत विकसित किया गया है।

यह आईडी डिजीलॉकर से जुड़ी होती है और छात्र की स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट और अन्य शैक्षणिक उपलब्धियों का पूरा रिकॉर्ड एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराती है। दूरदराज के इलाकों में भी इसकी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के माध्यम से APAAR आईडी बनाई जा रही है।

ABC: ऐसा डिजिटल बैंक, जहां जमा होंगे आपकी पढ़ाई के ‘क्रेडिट’

अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (ABC) कोई वित्तीय बैंक नहीं, बल्कि छात्रों की शैक्षणिक उपलब्धियों का डिजिटल बैंक है। इसे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) संचालित करता है।

इस प्लेटफॉर्म पर छात्र विभिन्न मान्यता प्राप्त संस्थानों से अर्जित अपने शैक्षणिक क्रेडिट सुरक्षित रख सकते हैं। अगर किसी कारण पढ़ाई बीच में छूट जाती है तो ये क्रेडिट खत्म नहीं होंगे। छात्र भविष्य में दोबारा प्रवेश लेकर इन्हीं क्रेडिट के आधार पर अपनी शिक्षा पूरी कर सकता है।

करीब तीन हजार संस्थान जुड़े, अरबों रिकॉर्ड अपलोड

सरकार के अनुसार अब तक देश के 2,963 उच्च शिक्षण संस्थान ABC प्लेटफॉर्म से जुड़ चुके हैं।

अब तक:

  • 26.29 करोड़ APAAR आईडी बनाई जा चुकी हैं।
  • 110.65 करोड़ शैक्षणिक रिकॉर्ड डिजिटल रूप से अपलोड किए जा चुके हैं।
  • UGC ने सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को 30 जून 2026 तक छात्रों के क्रेडिट डेटा ABC पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए थे।

छात्रों को क्या मिलेगा फायदा?

नई व्यवस्था के तहत छात्रों को कई व्यावहारिक लाभ मिलेंगे। वे अलग-अलग विश्वविद्यालयों के बीच आसानी से क्रेडिट ट्रांसफर कर सकेंगे। मल्टीपल एंट्री और एग्जिट (MEE) व्यवस्था के कारण पढ़ाई रोकने और बाद में दोबारा शुरू करने का विकल्प मिलेगा। डिग्री और प्रमाणपत्र डिजिटल रूप में कहीं से भी उपलब्ध होंगे। इसके साथ ही औपचारिक, अनौपचारिक और अनुभव आधारित शिक्षा को भी मान्यता देने की दिशा में व्यवस्था तैयार की जा रही है।

सरकार का दावा है कि फिलहाल 153 विश्वविद्यालयों में मल्टीपल एंट्री-एग्जिट व्यवस्था लागू हो चुकी है, जिससे 31,156 स्नातक और 5,583 स्नातकोत्तर छात्र लाभान्वित हुए हैं।

SWAYAM और NCrF से भी जुड़ा पूरा सिस्टम

ABC को राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क (NCrF) और SWAYAM ऑनलाइन शिक्षा मंच से भी जोड़ा गया है।

  • 388 विश्वविद्यालय SWAYAM से अर्जित 40 प्रतिशत तक ऑनलाइन क्रेडिट स्वीकार कर रहे हैं।
  • 170 विश्वविद्यालय राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क (NCrF) लागू कर चुके हैं।

डेटा रहेगा सुरक्षित, आएगी ब्लॉकचेन तकनीक

शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि छात्रों के सभी रिकॉर्ड आधुनिक एन्क्रिप्शन तकनीक और आधार-डिजीलॉकर आधारित प्रमाणीकरण के जरिए सुरक्षित रखे जा रहे हैं।

आने वाले समय में भारत प्रमाण चेन (Bharat Praman Chain) के जरिए डिजिटल डिग्री और प्रमाणपत्रों को ब्लॉकचेन तकनीक से जोड़ा जाएगा, जिससे उनमें छेड़छाड़ करना लगभग असंभव होगा। यह स्वदेशी प्लेटफॉर्म डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन द्वारा विकसित किया गया है और डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन कानून के अनुरूप काम करेगा।

केंद्र सरकार का मानना है कि ABC और APAAR मिलकर देश में ऐसी डिजिटल शिक्षा व्यवस्था तैयार कर रहे हैं, जहां छात्र की पढ़ाई किसी संस्थान या शहर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उसका पूरा शैक्षणिक सफर सुरक्षित, पोर्टेबल और भविष्य के लिए हमेशा उपलब्ध रहेगा।

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