डेढ़ लाख दो, राष्ट्रीय खिलाड़ी बन जाओ | खेल कोटे की नौकरी के लिए ताईक्वांडो सर्टिफिकेट का ‘रेट कार्ड’ उजागर

राजस्थान की शिक्षक भर्ती में खेल कोटे के जरिए नौकरी दिलाने के लिए फर्जी राष्ट्रीय ताईक्वांडो प्रमाण-पत्र बनाने के आरोप में एसओजी ने बुधाराम टांक को गिरफ्तार किया है। जांच में लाखों रुपये के लेनदेन और 38 अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच का खुलासा हुआ।

जयपुर। सरकारी शिक्षक बनने का सपना, राष्ट्रीय खिलाड़ी होने का दावा और उसके पीछे कथित तौर पर चल रहा लाखों रुपये का खेल। राजस्थान की शिक्षक भर्ती में खेल कोटे के जरिए नौकरी हासिल करने के एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है, जिसमें राष्ट्रीय स्तर के ताईक्वांडो खिलाड़ी बनने के प्रमाण-पत्र कथित रूप से पैसों के बदले तैयार कराए गए।

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राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने इस मामले में जोधपुर जिले के पीपाड़ सिटी निवासी और टोगोबार खेल संघ के पूर्व सचिव बुधाराम टांक को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि खेल कोटे के तहत सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर अभ्यर्थियों को बैकडेटेड राष्ट्रीय स्तर के ताईक्वांडो प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराए गए, जिनका उपयोग शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में किया गया।

मामला तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती-2022 से जुड़ा है, जिसमें खेल प्रतिभाओं के लिए दो प्रतिशत पद आरक्षित थे। जांच के दौरान एसओजी को ऐसे कई प्रमाण-पत्र संदिग्ध लगे, जिसके बाद पड़ताल शुरू हुई। जांच में सामने आया कि राष्ट्रीय स्तर के ताईक्वांडो खिलाड़ी होने के दस्तावेजों के आधार पर चयन सूची के दायरे में आए 38 अभ्यर्थियों ने अपने प्रमाण-पत्र चयन समिति के समक्ष प्रस्तुत किए थे।

पूछताछ के दौरान गिरफ्तार अभ्यर्थी कविता ने कथित तौर पर खुलासा किया कि खेल कोटे से नौकरी पाने के लिए उसने करीब तीन वर्ष पहले बुधाराम टांक को डेढ़ लाख रुपये दिए थे। इसके बदले उसे वर्ष 2016-17 की राष्ट्रीय ताईक्वांडो प्रतियोगिता में भागीदारी का बैकडेटेड प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराया गया।

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जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 2020 से 2023 के बीच टोगोबार खेल संघ के सचिव रहे बुधाराम टांक के संपर्क हरियाणा के सतीश डूल और विवेक नामक व्यक्तियों से थे। आरोप है कि फर्जी राष्ट्रीय स्तर के ताईक्वांडो प्रमाण-पत्र तैयार कराने में इनकी भूमिका रही। जांच एजेंसियों के अनुसार एक प्रमाण-पत्र की कीमत लगभग दो लाख रुपये तय थी, जबकि अभ्यर्थियों से करीब डेढ़ लाख रुपये वसूले जाते थे।

एसओजी के अतिरिक्त महानिदेशक विशाल बंसल के अनुसार तैयार किए गए प्रमाण-पत्र बस के माध्यम से जोधपुर पहुंचाए जाते थे। वहां से इन्हें संबंधित अभ्यर्थियों तक पहुंचाया जाता और बाद में अन्य शैक्षणिक दस्तावेजों के साथ भर्ती प्रक्रिया में जमा कर दिया जाता था।

अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस कथित नेटवर्क के जरिए कितने अभ्यर्थियों ने लाभ उठाया, कितने प्रमाण-पत्र जारी किए गए और भर्ती प्रक्रिया में इसका असर कितना व्यापक रहा। मामले ने खेल कोटे की चयन प्रणाली और प्रमाण-पत्र सत्यापन प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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