चित्तौड़गढ़ में आयोजित जिला स्तरीय प्राकृतिक खेती कार्यशाला में 1500 किसानों ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने प्राकृतिक और जैविक खेती अपनाकर मिट्टी, पानी और आय बचाने का संदेश दिया।
चित्तौड़गढ़। रासायनिक खादों पर बढ़ती निर्भरता और मिट्टी की घटती उर्वरा शक्ति के बीच चित्तौड़गढ़ में प्राकृतिक खेती को लेकर बड़ा संदेश दिया गया। इंदिरा गांधी ऑडिटोरियम में आयोजित जिला स्तरीय प्राकृतिक खेती कार्यशाला में करीब 1500 किसानों ने भाग लेकर टिकाऊ और कम लागत वाली खेती के मॉडल को समझा तथा प्राकृतिक खेती अपनाने का संकल्प लिया।
कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केन्द्र चित्तौड़गढ़ और इफको के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला में सांसद सी.पी. जोशी, निम्बाहेड़ा विधायक श्रीचंद कृपलानी, जिला कलेक्टर डॉ. मंजू चौधरी सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।
कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. रतन लाल सोलंकी ने किसानों को मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने, जल संरक्षण को बढ़ावा देने और टिकाऊ कृषि पद्धतियां अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कृषि प्रदर्शनी का अवलोकन कर किसानों को फलदार पौधों, सब्जियों की पौध, वर्मी कम्पोस्ट खाद और वर्मी वॉश इकाइयों की उपयोगिता के बारे में जानकारी दी। इस अवसर पर वैज्ञानिकों द्वारा तैयार फोल्डर ‘प्राकृतिक खेती-किसान जैविक खाद अपनाएं, रासायनिक खाद से मुक्ति पाएं’ का भी विमोचन किया गया।
प्राकृतिक खेती विशेषज्ञ पवन टांक ने किसानों को प्राकृतिक खेती के मूल सिद्धांतों और इसके प्रमुख स्तंभों की विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि यह खेती मॉडल लागत घटाने के साथ भूमि की सेहत सुधारने में भी मददगार है।
विधायक श्रीचंद कृपलानी ने किसानों से रसायन मुक्त खेती को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि स्वस्थ समाज के लिए जहर मुक्त खेती समय की जरूरत है। वहीं सांसद सी.पी. जोशी ने रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों का उल्लेख करते हुए जैविक एवं प्राकृतिक खेती को भविष्य का रास्ता बताया।
जिला कलेक्टर डॉ. मंजू चौधरी ने प्राकृतिक खेती के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डालते हुए किसानों को अधिकाधिक संख्या में इस पद्धति से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल पर्यावरण संरक्षण में सहायक है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने का भी प्रभावी माध्यम बन सकती है।
संयुक्त निदेशक कृषि डॉ. शंकर लाल जाट ने किसानों की कृषि संबंधी जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए विभागीय योजनाओं, राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन और परम्परागत कृषि विकास योजना की जानकारी दी। उन्होंने किसानों से इन योजनाओं से जुड़कर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
कार्यशाला में विभिन्न विभागों और किसानों द्वारा तैयार उत्पादों की प्रदर्शनियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं। कार्यक्रम का संचालन डॉ. जोगेन्द्र सिंह राणावत ने किया।
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