उदयपुर के कन्नौज गांव में कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा खेत बचाओ अभियान के तहत कृषक संगोष्ठी आयोजित की गई। डॉ. रतन लाल सोलंकी ने किसानों को मिट्टी जांच, संतुलित उर्वरक उपयोग और प्राकृतिक खेती अपनाने की सलाह दी।
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उदयपुर
आज खेत हरे दिख रहे हैं, लेकिन उनकी सेहत लगातार बिगड़ रही है। रासायनिक उर्वरकों के बढ़ते इस्तेमाल से मिट्टी की ताकत कमजोर पड़ रही है और यही आने वाले समय में खेती के लिए सबसे बड़ा खतरा बन सकता है। इसी चिंता को लेकर कृषि विज्ञान केन्द्र ने बुधवार को खेत बचाओ अभियान के तहत कन्नौज गांव में कृषक संगोष्ठी आयोजित की, जिसमें 60 किसानों और कृषक महिलाओं ने भाग लिया।
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संगोष्ठी में कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. रतन लाल सोलंकी ने किसानों को खेती की बदलती चुनौतियों और मिट्टी की बिगड़ती सेहत के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ रही रासायनिक उर्वरकों की खपत न केवल खेती की लागत बढ़ा रही है, बल्कि खेतों की उर्वरता और उत्पादकता पर भी नकारात्मक असर डाल रही है।
डॉ. सोलंकी ने बताया कि उर्वरकों की आपूर्ति में आने वाली कठिनाइयों और उनकी बढ़ती कीमतों को देखते हुए केंद्र सरकार ने “खेत बचाओ अभियान” शुरू किया है। उन्होंने कहा कि कई किसान अधिक उत्पादन की उम्मीद में जरूरत से ज्यादा रासायनिक खाद का उपयोग कर रहे हैं, जिससे शुरुआत में तो फसल अच्छी दिखाई देती है, लेकिन धीरे-धीरे मिट्टी की गुणवत्ता खराब होने लगती है और उत्पादन पर असर पड़ता है।
उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे अपने खेतों की नियमित मिट्टी जांच करवाएं और मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर ही उर्वरकों का उपयोग करें। उन्होंने फसल की जरूरत के अनुसार संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि मिट्टी परीक्षण आधारित खेती ही भविष्य की टिकाऊ खेती का आधार बनेगी।
डॉ. सोलंकी ने जैविक खाद, कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की अपील की। साथ ही उन्होंने फसल चक्र और हरी खाद के उपयोग को बढ़ाने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि इससे मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनी रह सकती है और किसानों की लागत भी कम होगी।
कार्यक्रम में प्रगतिशील कृषक खाजू खां तथा वाटरशेड सचिव शंकर लाल भी उपस्थित रहे और किसानों से खेती में वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने का आह्वान किया।
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