‘खजाना खुल गया’ | RBI ने सरकार को दिया 2.87 लाख करोड़ का रिकॉर्ड डिविडेंड, मिडिल ईस्ट संकट के बीच मिली बड़ी आर्थिक ताकत

आरबीआई ने केंद्र सरकार को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 2.87 लाख करोड़ रुपए का रिकॉर्ड डिविडेंड देने का ऐलान किया है। जानिए कैसे बढ़ी RBI की आय, बैलेंस शीट और क्या है कंटिजेंट रिस्क बफर का पूरा मामला।

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नई दिल्ली 

देश की आर्थिक तस्वीर के बीच शुक्रवार को एक ऐसी खबर आई, जिसने केंद्र सरकार की तिजोरी को जबरदस्त मजबूती दे दी। भारतीय रिजर्व बैंक यानी भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र सरकार को करीब 2.87 लाख करोड़ रुपए का रिकॉर्ड डिविडेंड देने का ऐलान किया है। यह अब तक का सबसे बड़ा सरप्लस ट्रांसफर माना जा रहा है।

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माना जा रहा है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच यह रकम सरकार के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है। खासकर ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता और भू-राजनीतिक संकट आर्थिक दबाव बढ़ा रहे हैं।

यह फैसला मुंबई में आयोजित आरबीआई के केंद्रीय निदेशक मंडल की 623वीं बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने की। बैठक में वैश्विक और घरेलू आर्थिक हालात की समीक्षा की गई और भविष्य के जोखिमों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। इसी दौरान वित्त वर्ष 2025-26 के वार्षिक खातों को मंजूरी दी गई।

आरबीआई की बैलेंस शीट में भी इस साल बड़ा उछाल देखने को मिला। केंद्रीय बैंक की बैलेंस शीट का आकार सालाना आधार पर 20.61 प्रतिशत बढ़कर 91.97 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया। बैंक की सकल आय में पिछले वर्ष के मुकाबले 26.42 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि रिस्क प्रोविजन से पहले खर्च में 27.60 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक रिस्क प्रोविजन और वैधानिक निधियों में हस्तांतरण से पहले बैंक की शुद्ध आय वित्त वर्ष 2025-26 में 3,95,972.10 करोड़ रुपए रही। पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 3,13,455.77 करोड़ रुपए था। यानी सिर्फ एक साल में आय में भारी उछाल दर्ज हुआ है।

केंद्रीय बैंक ने अपने संशोधित आर्थिक पूंजी ढांचे यानी ECF का भी जिक्र किया। आरबीआई के अनुसार यह ढांचा बैलेंस शीट के आकार के 4.5 प्रतिशत से 7.5 प्रतिशत तक कंटिजेंट रिस्क बफर बनाए रखने की अनुमति देता है। मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों, बैंक के वित्तीय प्रदर्शन और संभावित जोखिमों को देखते हुए केंद्रीय बोर्ड ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कंटिजेंट रिस्क बफर में 1,09,379.64 करोड़ रुपए ट्रांसफर करने का फैसला लिया। पिछले साल यह राशि 44,861.70 करोड़ रुपए थी।

साथ ही बोर्ड ने यह भी तय किया कि कंटिजेंट रिस्क बफर को आरबीआई की बैलेंस शीट के 6.5 प्रतिशत स्तर पर बनाए रखा जाएगा। इन सभी प्रावधानों के बाद केंद्रीय बोर्ड ने केंद्र सरकार को 2,86,588.46 करोड़ रुपए का सरप्लस ट्रांसफर करने को मंजूरी दे दी।

दिलचस्प बात यह है कि केंद्र सरकार ने अपने बजट दस्तावेजों में पहले ही अनुमान लगाया था कि वित्त वर्ष 2026-27 में उसे आरबीआई, राष्ट्रीयकृत बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों से डिविडेंड और सरप्लस के रूप में करीब 3.16 लाख करोड़ रुपए प्राप्त होंगे। अब आरबीआई के इस फैसले ने उस अनुमान को और मजबूत आधार दे दिया है।

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