भरतपुर के ड्रेनेज पर बड़ा सवाल | रियासतकालीन ‘डाकन मोरी’ से ऊंचा बना CFC Drain, संघर्ष समिति बोली—बरसात में डूब जाएगा इलाका

भरतपुर (Bharatpur) में CFC ड्रेन के बेड लेवल को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। संघर्ष समिति ने रियासतकालीन डाकन मोरी ड्रेनेज से ऊंचा लेवल बनाने पर आपत्ति जताई और मुख्य अभियंता से जांच की मांग की।

भरतपुर 

भरतपुर शहर में बन रहे जल निकासी प्रोजेक्ट को लेकर अब नया विवाद खड़ा हो गया है। गणेश मंदिर अटलबंद क्षेत्र में रियासतकालीन डाकन मोरी ड्रेनेज सिस्टम और वर्तमान में बन रहे CFC ड्रेन के लेवल में अंतर को लेकर स्थानीय लोगों ने गंभीर आपत्ति जताई है।

जब जल संसाधन विभाग राजस्थान के मुख्य अभियंता जितेन्द्र दीक्षित भरतपुर में जल निकास निर्माण कार्यों का निरीक्षण करने पहुंचे, तो कच्चा परकोटा नियमन संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल ने मौके पर पहुंचकर उन्हें पूरी स्थिति से अवगत कराया।

जयपुर की रफ्तार अब और तेज होगी | 13,037 करोड़ के मेट्रो फेज-2 को कैबिनेट की हरी झंडी, शहर के आर-पार दौड़ेगी 41 किमी लाइन

‘लेवल ऊंचा हुआ तो पंप से निकालना पड़ेगा पानी’

समिति के सदस्यों ने बताया कि CFC ड्रेन का बेड लेवल गणेश मंदिर स्थित रियासतकालीन पुलिया से ऊंचा बनाया जा रहा है। अगर समय रहते इसे ठीक नहीं किया गया तो इलाके का पानी प्राकृतिक ढलान से बाहर नहीं निकल पाएगा और फिर पंप लगाकर पानी निकालना पड़ेगा। प्रतिनिधियों ने मुख्य अभियंता से मांग की कि CFC ड्रेन का लेवल पुरानी रियासतकालीन पुलिया के मुताबिक ही तय किया जाए।

‘मेडिकल लीव पास करनी है तो 20 हजार दो!’ | रोडवेज के मुख्य प्रबंधक को ACB ने रिश्वत लेते ही दबोचा

पुराने नक्शे दिखाकर बताया पूरा सिस्टम

मौके पर पहुंचे पूर्व नेता प्रतिपक्ष इन्द्रजीत भारद्वाज ने रियासतकालीन ड्रेनेज सिस्टम का मानचित्र दिखाते हुए बताया कि कच्ची खाई और अटलबंद की डाकन मोरी का लेवल पहले बराबर था, जिससे बरसात या प्राकृतिक आपदा के समय पानी सुरक्षित तरीके से शहर के बाहर निकल जाता था।

उन्होंने कहा कि पहले नीमदा गेट और चौधरी मैरिज होम के पास की पुलियाओं से पानी CFC ड्रेन के जरिए बाहर जाता था, लेकिन अब नए निर्माण में बेड लेवल ऊंचा होने से यह व्यवस्था बेकार हो सकती है।

हाईकोर्ट के मामले का भी उठाया मुद्दा

भारद्वाज ने मुख्य अभियंता को बताया कि Rajasthan High Court की जयपुर खंडपीठ में सूओ मोटो बनाम राजस्थान सरकार मामले में जो फ्लड एरिया का राजस्व सुपर इम्पोज नक्शा पेश किया गया है, उसके अनुसार वर्तमान में CFC ड्रेन का एलाइनमेंट बदलकर कच्चे डंडे और बुर्जों की आबादी को काटते हुए नया जलभराव मार्ग बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे गरीब और मजदूर परिवारों के पट्टाधारी मकानों पर भी खतरा पैदा हो रहा है।

मुख्य अभियंता ने मांगी रिपोर्ट

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य अभियंता ने स्थानीय अभियंताओं से CFC ड्रेन के लेवल और न्यायालय में पेश किए गए नाले के एलाइनमेंट के सुपर इम्पोज नक्शे की पूरी जानकारी मांगी। अधिकारियों ने बताया कि अदालत में संयुक्त हस्ताक्षरित नक्शा प्रस्तुत किया गया है। मुख्य अभियंता ने आश्वासन दिया कि मामले की गहन जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।

मौके पर इन लोगों ने उठाई आपत्ति

इस दौरान पार्षद शैलेष पाराशर, संघर्ष समिति के संयोजक जगराम धाकड़, उप संयोजक श्रीराम चंदेला, भागमल वर्मा, रणधीर सिंह, साविर खान, अकील खान समेत कई स्थानीय लोग मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में नाले के एलाइनमेंट बदलने और लेवल में अंतर की जांच कराने तथा तकनीकी खामियों को तुरंत ठीक करने की मांग की।

नई हवा खबरें अपने मोबाइल पर नियमित और डायरेक्ट प्राप्त करने  के लिए व्हाट्सएप नंबर 9460426838 सेव करें और ‘Hi’ और अपना नाम, स्टेट और सिटी लिखकर मैसेज करें। आप अपनी खबर या रचना भी इस नंबर पर भेज सकते हैं।

अब यूनिवर्सिटी की जिम्मेदारी सिर्फ डिग्री तक नहीं | UGC बोला– पास की आंगनवाड़ी अपनाइए, बच्चों की पढ़ाई में हाथ बंटाइए

अब किताबें ही नहीं, डिग्री भी देगा NCERT | सरकार ने दिया ‘डीम्ड यूनिवर्सिटी’ का दर्जा, शिक्षा जगत में बड़ा बदलाव

‘नई हवा’ की खबरों को Subscribe करने के लिए हमारे WhatsApp Channel से जुड़ें।