एक मासूम बच्ची, आया की डरावनी कहानियों से इतना सहम गई कि अंधेरे में उसे चुड़ैल दिखाई देने लगी। पढ़ें “डरी हुई नन्ही” — बचपन के डर और माता-पिता के स्नेह को दर्शाती एक भावनात्मक लघु कथा।
लघुकथा
डॉ. अलका अग्रवाल, सेवानिवृत कॉलेज प्राचार्य, जयपुर
तीन साल की नन्ही के मम्मी-पापा दोनों ऑफिस जाते थे। दिन भर वह आया के साथ ही रहती थी। जब कभी वह शैतानी करती थी, आया उसे अपने पास बिठाकर कहानियां सुनाती थी। पर कहानी में हमेशा ही भूतनी, राक्षस और चुड़ैल जैसे डरावने पात्र होते थे। इन कहानियों से नन्ही बेहद डर जाती और चुपचाप आया की गोद में बैठी रहती। लेकिन आया के डर से उसने डरावनी कहानी की बात भी मम्मी को नहीं बताई।
उस रात जब नन्ही सो रही थी, उसे प्यास लगी और वह पानी पीने के लिए उठी कि उसे अंधेरे में दो बहुत बड़ी-बड़ी डरावनी आंखें दिखाई देने लगीं। वह डर के कारण कांपने लगी। उसे लगा, ये जरूर चुडैल की ही आंखें हैं। अब तो वह अंदर घुसकर उसे पकड़ लेगी। चारों तरफ अंधेरा था, उसने अपनी मम्मी को पकड़कर जोर से हिलाया। उसके मुंह से ज़ोर की चीख निकल गई। नन्ही की मम्मी चौंक कर उठ गईं। उन्होंने उसे गोद में लेकर प्यार किया । पापा ने लाइट जलाई और पूछा, ‘क्या बात है, डर कैसे गई थी नन्ही? हम दोनों तो तुम्हारे पास ही हैं।’
डरी सहमी नन्ही बड़ी मुश्किल से बोल पाई, ‘आप दोनों मेरे पास हैं, इसीलिए तो चुड़ैल डर कर भाग गई, नहीं तो मुझे खा जाती। आया ने मुझे कहानी सुनाई थी। वह बच्चों को खा जाती है।’
और उसने मम्मी को कसकर पकड़ लिया। वह डर के मारे कांप रही थी।
….पापा ने भी उसके सर पर प्यार से हाथ फेरा। पर नन्ही का डर कम नहीं हो रहा था। मम्मी ने उसे गोद में लिटाकर प्यार से थपकी दी, धीरे धीरे वह गहरी नींद में सो गई। पर उसके मम्मी पापा की नींद नए सत्य के रहस्योद्घाटन से उड़ गई थी।
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