जयपुर/अलवर
राजस्थान (Rajasthan) पुलिस के ऑपरेशन साइबर संग्राम के तहत अलवर (Alwar) में एक ऐसा सनसनीखेज साइबर रैकेट उजागर हुआ है जिसने पूरे बैंकिंग सिस्टम की जड़ें हिला दी हैं। खुलासा हुआ है कि बैंक के ही कर्मी कमीशन लेकर करंट/कॉर्पोरेट खाते (म्यूल अकाउंट्स) साइबर ठगों को बेच रहे थे। इसी धंधे के जरिये देशभर में 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी को अंजाम दिया गया, जबकि कुल लेन-देन का आंकड़ा 500 करोड़ रुपये पार कर चुका है।
एसपी सुधीर चौधरी ने बताया कि थाना वैशाली नगर पुलिस ने दबिश देकर 4 बैंक कर्मचारियों और मास्टरमाइंड समेत 6 आरोपियों को दबोच लिया। इस केस में गिरफ्तारियों का आंकड़ा अब 16 तक पहुंच गया है।
कौन हैं आरोपी?
पुलिस ने बताया कि मास्टरमाइंड वरुण पटवा (40) निवासी उदयपुर, हाल गुरुग्राम और सतीश कुमार जाट (35) निवासी हिसार सहित एक्सिस बैंक हिसार शाखा के चार कर्मचारी पकड़े गए हैं—
- साहिल अग्रवाल (33), गुलशन पंजाबी (33) – सेल्स मैनेजर
- आसु शर्मा (23) – मर्चेंट इंक्वायरी बिजनेस (MIB)
- आंचल जाट (24) – सेल्स ऑफिसर
ये आरोपी ग्राहकों को मामूली कमीशन देकर फर्जी फर्मों के नाम पर खाते खुलवाते और फिर इन्हें ठगों तक पहुँचा देते थे। खातों से जुड़ा मोबाइल नंबर अलग फोन में डालकर, APK फाइल इंस्टॉल कराकर साइबर अपराधियों को ओटीपी और इंटरनेट बैंकिंग का सीधा एक्सेस उपलब्ध कराया जाता था।
कैसे चलता था अरबों का खेल?
इन खातों से पैसा बेटिंग, गेमिंग फ्रॉड और क्रिप्टो एक्सचेंजों (जैसे Binance) के जरिये साफ किया जाता था। अकेले एनसीआरपी पोर्टल पर ऐसे खातों के खिलाफ 4000 से ज्यादा शिकायतें दर्ज हैं।
पुलिस की बड़ी बरामदगी
कार्रवाई में ₹2.51 लाख नकद, करीब ₹5 लाख की राशि 10 खातों में फ्रीज, 26 एटीएम कार्ड, 33 मोबाइल फोन, 34 सिम, 12 चेकबुक, 6 पासबुक, 12 साइन किए चेक, आधार-पैन, पहचान पत्र, आरसी, मोहर, रसीद बुक और दो कारें जब्त की गईं।
अब निशाने पर सरगना
एएसपी मुख्यालय कांबले शरण गोपीनाथ के नेतृत्व में गठित एसआईटी रैकेट के बाकी सदस्यों और असली सरगना तक पहुंचने की कोशिश में है। इससे पहले भी इसी टीम ने इस केस में 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
यह खुलासा साफ बताता है कि ठग अकेले नहीं, बल्कि बैंक के अंदर बैठे लोग भी साइबर क्राइम की काली साजिश में बराबर के हिस्सेदार हैं।
