ये काल रात्रि अब अंतिम है,
कल फ़िर इक नया सवेरा है l
ग़म के सागर छूट गए सब,
खुशियो का नया बसेरा है
Tag: poem
ये काल रात्रि अब अंतिम है…
पारिजात…
श्वेत पंखुड़ियों का स्पर्श मधुर,
हरसिंगार मानो चित्रित स्वप्न,
सजीव रंगों का जादू सा सिंगार,
अचानक से मेरी बातें, बस यादें बन जाएंगी…
ये सांसें यूं ही कम होती जाएंगी,
धड़कनें बस यूं ही थमती जाएंगी
पर्वाधिराज पर्व ‘पर्यूषण’
पर्वाधिराज पर्व पर्यूषण है अलौकिक
आठ दिवस नियमित होती सामायिक
धर्म-ध्यान, पूजा-अर्चना, तप-तपस्या द्वारा
सुप्त आत्मा को कर के जाग्रत
