ना कोई चाहत ना कोई आस
करती हूं बस एक यही प्रयास
ना कोई मुझसे हो निराश
Tag: poem
इंसानियत…
इस वर्ष कुछ ज्यादा ही भीषण गर्मी पड़ रही थी। सुबह से ही नलों में गरम पानी आ रहा था। शालिनी ने जब सूरज को आग उगलते देखा तो गर्मी से बचाव के उपाय में
तू मेरी धरती मेरा आकाश…
मां तू मेरे जीवन का विश्वास है।
तेरी सांसों से जीवन को सांस मिली,
तेरी उंगली से आंखों की राह खुली,
