अरमान…

ना कोई चाहत ना कोई आस
करती हूं बस एक यही प्रयास
ना कोई मुझसे हो निराश

वट वृक्ष…

बचपन में कंधों पर घुमाते,
हर छोटी बड़ी फरमाइश को
पूरा करते पिता

इंसानियत…

इस वर्ष कुछ ज्यादा ही भीषण गर्मी पड़ रही थी। सुबह से ही नलों में गरम पानी आ रहा था। शालिनी ने जब सूरज को आग उगलते देखा तो गर्मी से बचाव के उपाय में

भव सागर सहज तर जाएं…

चार दिनों का है ये जीवन
खुशियों से हो जाए रोशन

अगले क्षण का कुछ पता नहीं…

सबसे पहले हम
उसी का हाथ छोड़ते हैं,
जिसका हाथ सबसे पहले

तू मेरी धरती मेरा आकाश…

मां तू मेरे जीवन का विश्वास है।
तेरी सांसों से जीवन को सांस मिली,
तेरी उंगली से आंखों की राह खुली,

अनमोल रिश्ता…

मन की हर बात जिसे कह
दिल हल्का हो जाता,
सबसे अच्छी सहेली, दोस्त,

मां, मां होती है…

मां, मां होती है
जब हम गर्भ में आते हैं
तब से कष्ट सह रही होती है।

याद पुरानी…

कुछ उधड़े रिश्ते सी लें
कुछ याद पुरानी जी लें।
निष्फिक्र गांव- घर जाने

चलो, आज कुछ अच्छा करते हैं…

चलो, आज कुछ अच्छा करते हैं।
कष्टों से रोती दुनिया में