पानी के बुलबुले की भांति क्षणिक,
कांच की भांति भंगुर,
स्वयं की परछाई की भांति
हाथ ना आने वाला
होता है सुख।
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सुख…
अतीत की भूल…
यह तो कोई बात नहीं है ,
एक भूल यदि कोई हो गई
उसको लेकर के ही सोचें
कैसे ,क्यों कर हुआ ये हमसे।
गाजर का हलवा…
रामवती सुबह 7:00 बजे जब अपने घर से काम करने के लिए निकली, तब कुछ दूरी पर भी कोहरे के कारण कुछ दिखाई नहीं दे रहा था । सर्दी से वह कांप रही थी ,उसने अपने शॉल को और कस कर
मेरी गलती क्या है…
आजकल मेरा पोता जो चेन्नई में पढ़ रहा है, छुट्टियों में घर आया हुआ है, लेकिन अक्सर वह दोस्तों के यहां चला जाता है। जब घर में रहता है तो हमेशा मोबाइल में ही आंखें गड़ाए रहता है। आज जब दोपहर में
‘सब के लिए खिलौने’
डॉ. अलका अग्रवाल (Dr. Alka Agarwal) की पुस्तक ‘सब के लिए खिलौने’ एक महत्वपूर्ण बाल नाटक संकलन है ,जो आधुनिक बच्चों की शैक्षणिक और नैतिक आवश्यकताओं को पूरा करता है। इसके सभी नाटकों के प्रमुख पात्र
रौनक…
सुबह उठी तो कुछ शोर सा सुनाई दिया । मेरे सामने के मकान में कॉलेज के सेवनिवृत्त प्राचार्य रहते हैं, उनके यहां चोरी हो गई थी। पड़ोस वाली आंटी से बात करने पर पता चला कि चोर खिड़की तोड़कर अंदर घुसे थे।…. शायद उन्हें कुछ
अंतिम घड़ी…
80 वर्षीय दादाजी में जीने की अदम्य इच्छा थी। लेकिन पिछले दिनों, शहर में उनके कई परिचित, रिश्तेदार और मित्र एक-एक कर भगवान को प्यारे हो गए। इस कारण दादाजी की सकारात्मकता भी डगमगाने लगी और उनके मन में
ऐसी हैं आजकल की लड़कियां…
अब वे अन्याय नहीं सहतीं।
अब वे चुपचाप नहीं रहतीं।
अब वे बेबाक हो सब कहतीं।
पुरस्कार की हकदार…
एक स्कूल में प्रार्थना सभा चल रही थी। हेड मास्टर साहब ने प्रातः अनन्या का नाम पुरस्कार हेतु घोषित किया। अनन्या को समझ में नहीं आया, उसे क्यों बुलाया जा रहा है? उसने तो ऐसा कोई
