जयपुर
चयन समिति ने 218 कॉलेज शिक्षकों को प्राचार्य बनाने पर लगाई मुहर
राजस्थान के कई सरकारी महाविद्यालयों में लम्बे अरसे से प्राचार्य पदों को लेकर चल रही चल रही एक बड़ी समस्या का समाधान अब होने वाला है। इसके लिए 29 जनवरी को चयन समिति की बैठक हुई। इसमें 218 कॉलेज शिक्षकों को प्राचार्य पद के योग्य पाया गया। इसके बाद इनके चयन पर बैठक में मुहर लगा दी गई। फलस्वरूप कई महाविद्यालयों को अब स्थायी प्राचार्य मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
उल्लेखनीय है कि राजस्थान के अनेक सरकारी महाविद्यालय लम्बे अरसे से बिना प्राचार्य के ही चल रहे थे। इससे उनका प्रशासनिक और शैक्षिणिक कार्य प्रभावित हो रहा था। 29 जनवरी को चयन समिति की बैठक में इस मामले में विचार करके प्राचार्यों की सूची को अंतिम रूप दिया गया। जानकारी के अनुसार वर्ष 2018-19 के लिए 126 शिक्षक प्राचार्य पद हेतु चयनित किए गए हैं जबकि वर्ष 2019-20 के लिए 92 शिक्षकों को प्राचार्य पद हेतु योग्य पाया गया है।
इस प्रकार कुल 218 महाविद्यालय शिक्षक प्राचार्य पद हेतु चयनित हुए हैं, हालांकि इनमें से कई शिक्षकों को यह लाभ सेवानिवृत्ति के बाद मिलेगा।
कई बार अटकती- भटकती रही फाइल
वित्त विभाग और कार्मिक विभाग के द्वारा नियमों में बदल करने से मना करने तथा बार-बार फाइल लौटाए जाने के बाद मामला लटकता-भटकता रहा। आखिरकार प्राचार्य के चयन का काम सचिवालय स्तर पर केंद्रित किया गया। तब जाकर वर्तमान में लागू नियमों से ही इस कार्य को शीघ्र संपन्न करने के निर्देश दिए।
विधानसभा में भी उठ चुका है यह मामला
सरकारी महाविद्यालयों में प्राचार्य के पद रिक्त रहने का मामला विधान सभा में भी उठ चुका है। विधानसभा में इस संबंध में प्रश्नोत्तर हुए थे। इस दौरान उच्च शिक्षा मंत्री ने नए शैक्षणिक सत्र 2020-21 से पूर्व सभी महाविद्यालयों में प्राचार्य लगाने का आश्वासन दिया था। रुक्टा (राष्ट्रीय) के अध्यक्ष डा.नारायण लाल गुप्ता ने इसके लिए उच्च शिक्षा मंत्री भंवर सिंह भाटी का आभार प्रकट करते आशा व्यक्त की कि इस प्रक्रिया के बाद भी जो महाविद्यालय बिना स्थायी प्राचार्य के रहेंगे, उनके लिए शीघ्र वर्ष 2020-21 की चयन समिति की बैठक आयोजित करवाई जाएगी।
कॉलेज शिक्षकों के दूसरे गुट ने फैलाया था भ्रम
रुक्टा (राष्ट्रीय) ने इस विषय को प्रमुखता से उठाया था। और कहा था कि अपने कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए एक गुट द्वारा लगातार भ्रम फैलाया गया और नियमों में संशोधन करवाने की बात को लेकर निरंतर पदोन्नति को लंबित करवाया गया। रुक्टा (राष्ट्रीय) ने मंत्री को अपना मत लिखित में बहुत ही स्पष्ट रूप से बता दिया था कि नियमों में संशोधन के साथ अथवा नियमों में संशोधन के बिना जिस भी प्रकार हो, महाविद्यालयों में स्थायी प्राचार्य लगाना बहुत आवश्यक है। इसके बिना शिक्षकों के न्यायोचित अधिकारों का हनन हो रहा है तथा महाविद्यालयों का सामान्य प्रशासन अस्त-व्यस्त हो रहा है।
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