भरतपुर के एम.एस.जे राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के भूगोल विभाग में भूगोल छात्र परिषद् आयोजित हुई। कार्यक्रम में भौगोलिक चिंतन, आधुनिक प्रयोगशाला और सुदूर संवेदन तकनीक पर चर्चा की गई।
भरतपुर
भूगोल केवल नक्शों और रेखाओं का विषय नहीं, बल्कि समय, समाज और विज्ञान से जुड़ा जीवंत अध्ययन है—इसी भाव के साथ एम.एस.जे राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, भरतपुर के भूगोल विभाग में भूगोल छात्र परिषद् का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को भूगोल की आधुनिक दिशा, तकनीकी उपयोग और विषय के बदलते स्वरूप से रूबरू कराया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सुनीता पाण्डेय ने कहा कि भूगोल विभाग में उपलब्ध सुसज्जित एवं आधुनिक प्रयोगशाला विद्यार्थियों के लिए बड़ी शैक्षणिक संपदा है, जिसका अधिकतम लाभ उठाया जाना चाहिए। उन्होंने प्रयोगात्मक अध्ययन को भूगोल शिक्षा की रीढ़ बताया।
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मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित पूर्व प्राचार्य प्रो. डॉ. मानसिंह मीणा ने भूगोल के ऐतिहासिक विकास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि मध्यकाल से लेकर वर्तमान समय तक भूगोल के विभिन्न आयाम किस प्रकार बदले हैं और उनका अन्य विषयों—इतिहास, समाजशास्त्र, पर्यावरण और विज्ञान—से गहरा अंतःसंबंध रहा है।
विशिष्ट अतिथि सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. गंगाराम सिंह ने भूगोल में आधुनिक तकनीकों, विशेषकर सुदूर संवेदन (Remote Sensing) और तकनीकी वीडियो टूल्स के बढ़ते उपयोग की उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा की और इसे भविष्य की जरूरत बताया।
भूगोल विभागाध्यक्ष डॉ. जैनेंद्र कुमार गुप्ता ने वर्चुअल माध्यम से सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए विषय के प्रति निरंतर जिज्ञासा बनाए रखने का संदेश दिया।
कार्यक्रम का संचालन भूगोल परिषद अध्यक्ष गौरंगी सिंह (एम.ए. फाइनल) एवं उपाध्यक्ष रोहित डागुर (एम.ए. प्रीवियस) ने संयुक्त रूप से किया। परिषद के संयोजक डॉ. धर्मवीर गुर्जर ने परिषद् के अंतर्गत आयोजित होने वाले विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों एवं प्रतियोगिताओं का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया।
समापन अवसर पर वरिष्ठ संकाय सदस्य डॉ. अभयवीर सिंह चौधरी ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में कृष्ण पाल सिंह, प्रयोगशाला सहायक अभिषेक सिंह सहित भूगोल विभाग के अनेक विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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