जयपुर
राजस्थान (Rajasthan) के वित्त पोषित विश्वविद्यालयों (University) के वरिष्ठ पेंशनर्स (Pensioner) अपने अधिकारों के लिए वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन जब समाधान के सारे दरवाजे बंद नजर आए, तो जीवन संध्या की शांति छोड़कर उन्हें फिर से आंदोलन की राह पकड़नी पड़ी। जयपुर के शहीद स्मारक, पुलिस आयुक्त कार्यालय के सामने राजस्थान के विभिन्न विश्वविद्यालयों के सैकड़ों पेंशनर्स ने मंगलवार को अपनी न्यायोचित मांगों को लेकर विशाल धरना प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन का आह्वान ऑल राजस्थान राज्य वित्त पोषित विश्वविद्यालय पेंशनर्स फेडरेशन, जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय पेंशनर्स सोसायटी एवं ऑल राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय पेंशनर्स फेडरेशन ने किया था।
एम.पी.यू.ए.टी. (महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय) के पेंशनर साथियों ने भी इस प्रदर्शन में बढ़-चढ़कर भाग लिया। एम.पी.यू.ए.टी. पेंशनर्स वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष डॉ. एस.के. भटनागर ने बताया कि इस ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शन में राज्यभर से भारी संख्या में वरिष्ठ नागरिक पेंशनर्स ने भाग लिया। डॉ सुभाष भार्गव एवं प्रतिनिधि मण्डल ने विधानसभा में mpuat पेंशनर्स की समस्याओं के संबंध में मांग पत्र और ज्ञापन भी दिया।
राज्यभर से उमड़ा पेंशनर्स का सैलाब
जयपुर में हुए इस विरोध प्रदर्शन में उदयपुर, भीलवाड़ा, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़ और डूंगरपुर से 65 से अधिक पेंशनर्स ने भागीदारी निभाई। प्रदर्शन में पूर्व कुलपति डॉ. ओ.पी. गिल, वरिष्ठ प्रोफेसर, प्राचार्य, सहायक अधिकारी एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। इस अवसर पर पेंशनर्स का नेतृत्व कर रहे वरिष्ठ पदाधिकारियों ने सभा को संबोधित किया, जिनमें प्रमुख रूप से –
- प्रो. हरिशंकर शर्मा, अध्यक्ष, फेडरेशन
- प्रो. बी.के. शर्मा, महासचिव, फेडरेशन
- श्री मूलचंद, जोबनेर कृषि विश्वविद्यालय
- डॉ. एस.के. भटनागर, अध्यक्ष, एम.पी.यू.ए.टी. पेंशनर्स वेलफेयर सोसाइटी
- आर.के. राजपूत, महासचिव, एम.पी.यू.ए.टी. पेंशनर्स वेलफेयर सोसाइटी
दो वर्षों से समस्याओं का कोई हल नहीं
एम.पी.यू.ए.टी. में वर्तमान में 1370 पेंशनर्स हैं, जो बीते दो वर्षों से गंभीर आर्थिक समस्याओं का सामना कर रहे हैं। बार-बार विश्वविद्यालय प्रशासन और सोसायटी कार्यकारिणी के बीच बैठकें और वार्ताएँ होने के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं निकला। डॉ. एस.के. भटनागर ने बताया कि पेंशनर्स को अपनी मांगों के लिए विश्वविद्यालय प्रांगण में भी कई बार सामूहिक धरना देना पड़ा, लेकिन प्रशासन की अड़ियल नीति के कारण समाधान अधर में लटका है।
क्या हैं पेंशनर्स की मुख्य मांगे?
- सेवानिवृत्त कर्मचारियों की बकाया राशि का भुगतान
- सातवें वेतन आयोग के एरियर की बकाया राशि
- ग्रेच्युटी और कम्युटेशन का बकाया भुगतान
- बकाया राहत भत्ता राशि का शीघ्र निपटान
- राजस्थान के विश्वविद्यालयों के पेंशनर्स को अन्य राज्यों की तरह ट्रेजरी से भुगतान सुनिश्चित करना
असंतोष और आक्रोश के बीच संघर्ष जारी
राज्य सरकार की ढुलमुल नीति और अनिर्णय के कारण पेंशनर्स के लिए जीवनयापन कठिन हो गया है। पेंशन का समय पर भुगतान न होने से वरिष्ठ नागरिकों को गंभीर वित्तीय संकट का सामना करना पड़ रहा है। सभी संगठनों ने मिलकर राज्य सरकार से जल्द से जल्द पेंशन समस्या का स्थायी समाधान निकालने की अपील की। पेंशनर्स ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो वे अपने आंदोलन को और उग्र करने के लिए बाध्य होंगे।
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