भरतपुर के स्वास्थ्य मंदिर रणजीत नगर में राजस्थान जन सांस्कृतिक परिषद के तत्वावधान में काव्य गोष्ठी आयोजित हुई। इस दौरान ‘प्रेम की परछाइयां’ पुस्तक का विमोचन और कवियों का सम्मान किया गया।
भरतपुर
शहर के रणजीत नगर स्थित स्वास्थ्य मंदिर साहित्यिक रंग में रंगा नजर आया। Rajasthan Jan Sanskritik Parishad के तत्वावधान में आयोजित काव्य गोष्ठी में कवियों और साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं से ऐसा माहौल बनाया कि श्रोतागण देर तक काव्य रस में डूबे रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता परिषद के प्रांतीय अध्यक्ष Ved Prakash Ved ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में Mohan Swaroop Parashar मौजूद रहे। विशिष्ट अतिथियों में Umesh Parashar और Chandrabhan Chanchal शामिल रहे। कार्यक्रम का संचालन कवि श्याम सिंह जघीना ‘मधुर’ ने किया।
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गोष्ठी की शुरुआत संस्था सचिव लोकेश सिंघल द्वारा मां शारदे की वंदना से हुई। इसके बाद अतिथियों और साहित्यकारों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
इस अवसर पर कु. देवेंद्र कोठिया की पुस्तक “प्रेम की परछाइयां” का लोकार्पण भी उपस्थित साहित्यकारों के हाथों हुआ। पुस्तक की विवेचना डॉ. अशोक कुमार गुप्ता ने करते हुए इसके भाव पक्ष और संवेदनाओं पर प्रकाश डाला। साथ ही प्रांतीय अध्यक्ष वेद प्रकाश वेद का माला, साफा और प्रतीक चिह्न देकर सम्मान किया गया।
कार्यक्रम में एक और महत्वपूर्ण घोषणा भी हुई। प्रांतीय अध्यक्ष और प्रांतीय सचिव ने मोहन स्वरूप पाराशर को डीग जिले का अध्यक्ष मनोनीत करते हुए उन्हें मनोनयन पत्र सौंपा और नई कार्यकारिणी के गठन का दायित्व भी सौंपा।
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काव्य गोष्ठी में कवियों ने भक्ति, राष्ट्रभक्ति, समाज और मानवीय संवेदनाओं से जुड़ी रचनाओं का पाठ किया। उमेश पाराशर ने “मंगलमय व्यवहार से सदा सब का उद्धार होता है” सुनाया तो राजेंद्र अनुरागी की पंक्तियां “जिस दिन मेरा मन राधेमय हो जाएगा” श्रोताओं को भावुक कर गईं। चंद्रभान चंचल की “ओ ले चल मैं तो योग सीखवै जाऊं” और डॉ. मोहकम सिंह सहजी की “जरा पानी में गहरे उतर जाइए” ने खूब सराहना बटोरी।
प्रांतीय अध्यक्ष वेद प्रकाश वेद ने “पिघलते पीर के पर्वत सहारा जब मिले कोई” सुनाकर माहौल को गंभीरता से भर दिया। वहीं डॉ. सुरेश चतुर्वेदी की राष्ट्रभावना से ओतप्रोत पंक्तियों और डॉ. कृष्ण कन्हैया शर्मा की देशभक्ति रचना ने श्रोताओं को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया।
कार्यक्रम में देवेंद्र कोठिया, लोकेंद्र सुमन, डीके हंसमुख, जया गुप्ता, प्रियंका पुरोहित, डॉ. अविनाश सोनी, डॉ. शैलेश तिवारी, राधाकिशन सैनी, सी.एस. कृष्णा, खेमेन्द्र देव, रामनिवास, डॉ. गोविंद डागुर और राकेश राजस्थानी सहित अनेक कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
गोष्ठी के अंत में डॉ. अशोक कुमार गुप्ता ने सभी अतिथियों और साहित्यकारों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संस्था लगातार नए साहित्यिक आयाम स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही है।
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