नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, जयपुर द्वारा प्रस्तुत ‘बिना शर्त और अयोग्य माफी’ को स्वीकार कर लिया और हड़ताल के हिस्से के रूप में 27 सितंबर को हाईकोर्ट की एक पीठ का बहिष्कार करने के लिए उनके खिलाफ शुरू की गई अवमानना कार्यवाही को बंद कर दिया।
न्यायमूर्ति एमआर शाह और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों द्वारा दायर हलफनामों और प्रस्ताव पर गौर करने के बाद यह निर्देश पारित किया। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने जयपुर में राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के माफी के हलफनामे को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि माफी बिना शर्त नहीं है और अयोग्य है।
इस अवमानना मामले में राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, जयपुर के अध्यक्ष और महासचिव की पूरी कार्यकारिणी ने सुप्रीम कोर्ट में बिना शर्त माफी मांग ली है। एसोसिएशन ने आश्वस्त किया कि वे भविष्य में हड़ताल नहीं करेंगे। वहीं यदि कोई समस्या होगी तो उसके लिए भी सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशानुसार विधिपूर्वक कार्रवाई की जाएगी।
एसोसिएशन की ओर से शपथ पत्र और बार के प्रस्ताव को भी अदालत में पेश किया गया। इसमें सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन करने और सीजे पर रोस्टर में बदलाव नहीं करने की भी बात कही गई। जिस पर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एमआर शाह व संजीव खन्ना की खंडपीठ ने बार एसोसिएशन को राहत देते हुए कार्यकारिणी के खिलाफ लिए गए स्वप्रेरित प्रसंज्ञान मामले में अवमानना की कार्रवाई को रद्द कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बार और बेंच एक दूसरे के पूरक हैं और दोनों के बीच सामंजस्य का होना जरूरी है।
सदैव बेंच सही हो और बार गलत हो, ऐसा होना भी जरूरी नहीं
खंडपीठ ने कहा कि एसोसिएशन भी सही हो सकती है, लेकिन उसके विरोध का तरीका गलत था। वकील विधिपूर्वक अपना विरोध दर्ज करा सकते हैं और इस संबंध में उन्हें सीजे के समक्ष प्रतिवेदन भी देना चाहिए। वहीं अदालत ने मामले में मध्यस्थता के लिए बीसीआई के चेयरमैन मनन मिश्रा से भी चर्चा करते हुए हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के खिलाफ अवमानना के मामलेे को रद्द कर दिया।
विवाद निपटारे के लिए हर हाईकोर्ट में बनेगी कमेटी
सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के हाईकोर्ट में बार व बेंच के बीच होने वाले विवादों के निपटारे के लिए हर हाईकोर्ट मेंं एक ग्रीवांस रिड्रेसल कमेटी गठित करने के संकेत दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कमेटी में सीजे, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सहित अन्य सदस्य होंगे। इस कमेटी में विवाद का निपटारा नहीं होने पर वकील विधिपूर्वक विरोध दर्ज करा सकते हैं।
जस्टिस ने ये कहा
“बार भी न्याय वितरण प्रणाली का एक हिस्सा है, इसलिए उन्हें भी जिम्मेदारी से काम करना चाहिए। आप समाज को क्या संदेश देंगे? कि एक महान पेशा, हड़ताल पर जा रहा है और अदालत में नारे लगाए जा रहे हैं। कई आदेशों के बावजूद ऐसा हो रहा है। बार काउंसिल भारत के एक कॉल लेने की जरूरत है।”
बेंच ने कहा कि किसी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को रोस्टर बदलने या किसी खास तरीके से फैसला लेने के लिए धमकाना खतरनाक चलन बन गया है।
“क्या संदेश दिया जाएगा, हड़ताल पर जाओ, न्यायाधीश सख्त हैं या नहीं, मुख्य न्यायाधीश पर दबाव डालें और रोस्टर बदलवाएं और परिणाम प्राप्त करें। यह एक खतरनाक प्रवृत्ति है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है।”
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