राजस्थान सरकार का बड़ा फैसला: उप प्रधानाचार्य का पद खत्म, 5,012 को सीधे प्रधानाचार्य बनाया

जयपुर 

राजस्थान सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक और शैक्षणिक फैसला लेते हुए उप प्रधानाचार्य (वाइस प्रिंसिपल) पद को ‘डाइंग कैडर’ घोषित कर दिया है। इस ऐतिहासिक निर्णय के तहत 5,012 उप प्रधानाचार्यों को सीधे प्रधानाचार्य पद पर पदोन्नति दी गई है। राज्य की शिक्षा व्यवस्था में यह बदलाव लंबे समय तक प्रभावी रहेगा और इसे नेतृत्व को मजबूत करने की दिशा में एक साहसिक कदम माना जा रहा है।

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कौन-कौन हुए प्रमोट?
पदोन्नत किए गए 5,012 उप प्रधानाचार्यों में विभिन्न श्रेणियों के शिक्षक शामिल हैं:

  • सामान्य श्रेणी: 3,746
  • अनुसूचित जाति (SC): 680
  • अनुसूचित जनजाति (ST): 586
  • विकलांग श्रेणी (PwD): 90

इस फैसले से राजस्थान के उच्च माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाचार्य के खाली पदों की संख्या काफी घट जाएगी, जिससे शिक्षा व्यवस्था में स्थिरता आएगी।

कांग्रेस सरकार के फैसले को पलटा
पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में स्कूलों में उप प्रधानाचार्य का पद सृजित किया गया था। हालांकि, भाजपा सरकार ने इसे अनावश्यक मानते हुए यह फैसला पलट दिया। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा, “उप प्रधानाचार्य का पद व्यर्थ था। इसे खत्म करके अब शिक्षकों को सीधे प्रधानाचार्य बनने का अवसर मिलेगा, जिससे नेतृत्व सशक्त होगा और शिक्षकों की कमी भी दूर होगी।”

कौन-कौन से पद भरे गए?

  • राजस्थान के 17,785 स्वीकृत प्रधानाचार्य पदों में से 7,489 पद खाली थे। इस प्रमोशन के बाद खाली पदों की संख्या में बड़ी कमी आएगी।

इसके अलावा संस्कृत शिक्षा विभाग में भी 992 पदों पर प्रमोशन किया गया, जिनमें शामिल हैं:

  • उप निदेशक
  • संभागीय संस्कृत शिक्षा अधिकारी
  • प्रधानाचार्य (वरिष्ठ उपाध्याय विद्यालय और प्रवेशिका विद्यालय)
  • प्राध्यापक और वरिष्ठ अध्यापक (विभिन्न विषयों में)

डाइंग कैडर क्यों घोषित किया गया?
पिछले साल दिसंबर में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में उप प्रधानाचार्य पद को ‘डाइंग कैडर’ घोषित करने की आवश्यकता महसूस की गई थी। अधिकारियों ने इसे अनावश्यक बताया क्योंकि:

  • इस पद के कारण व्याख्याताओं की कमी हो रही थी।
  • विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी।
  • व्याख्याताओं को सीधे प्रधानाचार्य बनने का अवसर मिलना चाहिए था।

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शिक्षा मंत्री का बयान
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने इस फैसले को “शिक्षा क्षेत्र में नेतृत्व को मजबूत बनाने वाला ऐतिहासिक कदम” बताया। उन्होंने नवपदोन्नत प्रधानाचार्यों को बधाई देते हुए कहा, “अब प्रधानाचार्य बेहतर नेतृत्व देकर राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे।”

क्या है आगे का असर?
राजस्थान सरकार के इस फैसले से न केवल स्कूलों में नेतृत्व मजबूत होगा, बल्कि शिक्षकों को बेहतर प्रमोशन अवसर भी मिलेंगे। साथ ही, विद्यार्थियों को शिक्षा का उच्च स्तर मिलेगा। यह फैसला राजस्थान के शिक्षा इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा।

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