जयपुर
पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खेमों के बीच बंटी कांग्रेस में पंचायत चुनावों में टिकट बंटवारे को लेकर कलह और बढ़ा गई है। भरतपुर और दौसा जिलों के बाद अब जयपुर जिले में भी विवाद गहरा गया है।
विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी रहे नेताओं ने प्रदेश नेतृत्व के सामने ही निर्दलीय विधायकों की राय से टिकट वितरण पर सवाल खड़े किए तो निर्दलीय विधायक ने विरोध करने वाले नेताओं को इमैच्योर बताते हुए कहा कि 15 दिन से कांग्रेस का झंडा उठाने वाले हम पर सवाल खड़े नहीं करें।
आपको बता दें कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंदसिंह डोटासरा गहलोत के खेमे के हैं और उन्हीं की अध्यक्षता में जिलों के पार्टी कार्यकर्ताओं से पंचायत चुनावों में उम्मीदवारों के चयन को लेकर राय ली जा रही है। पायलट समर्थक उन्हीं पर अंगुली उठा रहे हैं।
क्या है विवाद
दरअसल विधानसभा चुनावों में पराजित सचिन पायलट समर्थक उम्मीदवारों को पंचायत चुनाव के टिकट बंटवारे में तवज्जो नहीं दी जा रही। सचिन समर्थकों का कहना है कि संगठन उन लोगों को तरजीह दे रहा है जो कांग्रेस को हराकर ही विधायक बने और जिनकी पार्टी में निष्ठा नहीं रही और सत्ता सुख पाने के लिए कांग्रेस में शामिल हो गए।
इन्हीं विवादों के चलते भरतपुर और दौसा के बाद जयपुर में भी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविन्द डोटासरा को दो-चार होना पड़ रहा है। जयपुर में भी पायलट समर्थकों ने पायलट समर्थक हारे हुए उम्मीदवारों ने टिकट वितरण में उनकी राय लेने की मांग रखी। बैठक के बाद पायलट समर्थक मनीष यादव और निर्दलीय विधायक और गहलोत खेमे के बाबूलाल नागर के बयानों से कांग्रेस में रार थमती नजर नहीं आ रही।
शाहपुरा से विधानसभा चुनाव हार चुके पायलट समर्थक नेता मनीष यादव ने कहा, पार्टी ने 2018 के विधानसभा चुनाव में हमें टिकट दिया। उसमें हार गए लेकिन उसके बाद हमारे साथ सौतेला बर्ताव हो रहा है। हमने प्रदेशाध्यक्ष के सामने पक्ष रखा है कि पंचायत चुनाव में सिंबल देने की जिम्मेदारी विधानसभा चुनाव के उम्मीदवारों को सौंपे। पंचायत चुनावों में टिकट उस व्यक्ति को मिलना चाहिए, जो विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ था। उन कार्यकर्ताओं को टिकट मिले जिन्होंने विधानसभा चुनाव में पार्टी के लिए काम किया।
सवाल बड़ा-संगठन को बचाना या सरकार
मनीष यादव ने सवाल खड़ा किया कि हमको इस पर विचार करना होगा कि संगठन को बचाना है सरकार को। उन्होंने कहा कि निर्दलियों के सहयोग से सरकार बचाने में उनका सहयोग लें। इसमें हमें कोई दिक्कत नहीं है। जिस कार्यकर्ता ने 5 साल पार्टी के लिए लड़ाई लड़ी है, उसका मनोबल कम न हो, यह बात भी ध्यान में रखनी होगी। हम आलाकमान को बार-बार कह चुके हैं कि विपरीत हालात में जिस कार्यकर्ता ने पार्टी के लिए काम किया, उसका सम्मान होना चाहिए। अब यह नेतृत्व को देखना है कि संगठन को बचाना है या केवल सरकार बचाने पर ही ध्यान है।
नागर ने पायलट समर्थकों को कहा; उनके मन में गड़बड़, इसलिए ऐसे बात कर रहे हैं
गहलोत समर्थक निर्दलीय विधायक बाबूलाल नागर ने पायलट समर्थकों के तर्कों जवाब देते हुए उन्हें इमैच्योर बता दिया। उन्होंने कहा कि इन चुनावों में सिंबल वाली बात ही नहीं है। सिंबल की बात वो करते हैं जिनके मन में गड़बड़ है। सिंबल की बात करने वाले इमैच्योर हैं। हमारा लक्ष्य इन चुनावों में कैसे कांग्रेस के ज्यादा से ज्यादा प्रधान और जिला प्रमुख बनें, इस पर है। टिकट बांटने से पहले स्थानीय स्तर पर राय ले रहे हैं। पंचायत समिति स्तर पर प्रमुख लोगों की राय ली जा रही है। ये चुनाव कोई एमएलए-एमपी के चुनाव नहीं हैं।
नागर ने नाम लिए बिना पायलट समर्थकों पर निशाना साधा और कहा, 15 दिन कांग्रेस का झंडा पकड़ने में और 30 साल तक काम करने में फर्क होता है। हम कांग्रेस के सच्चे सिपाही हैं। हाईकमान हमें जो आदेश देगा, उसे मानने को तैयार हैं। जयपुर जिले में केवल एक बार कांग्रेस का जिला प्रमुख बना है। हमारा ध्यान जयपुर में कांग्रेस का जिला प्रमुख बनाने पर है।
कांग्रेस निर्दलीयों के सामने इसलिए सरेंडर
जयपुर जिले के तीन विधायक सरकार का समर्थन कर रहे हैं। इसलिए यहां कांग्रेस पूरी तरह निर्दलीयों के सामने सरेंडर पड़ी हुई है। जयपुर जिले के 3 विधानसभा क्षेत्रों दूदू, शाहपुरा और बस्सी में निर्दलीय विधायक गहलोत सरकार का समर्थन कर रहे हैं। दूदू में बाबूलाल नागर ने कांग्रेस उम्मीदवार रितेश बैरवा को, शाहपुरा में निर्दलीय आलोक बेनीवाल ने पायलट समर्थक कांग्रेस उम्मीदवार मनीष यादव और बस्सी में निर्दलीय लक्ष्मण मीणा ने भी कांग्रेस उम्मीदवार को हराया था। अब टिकट वितरण में भी इन निर्दलीय विधायकों की राय को कांग्रेस के हारे हुए उम्मीदवारों से ज्यादा तरजीह दी जा रही है। इसका पायलट समर्थक विरोध कर रहे हैं।
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