कविता से कथा तक का सफ़र | जयपुर लिट्रेचर फेस्टिवल में ‘इच्छा मृत्यु’ के साथ अंशु हर्ष का नया अध्याय

जयपुर लिट्रेचर फेस्टिवल (Jaipur Literature Festival) में लेखिका अंशु हर्ष के पहले नॉवल ‘इच्छा मृत्यु’ का लोकार्पण। सत्र “पोएट्री – खुद से बात” में कविता से नॉवल तक की रचनात्मक यात्रा पर गहन संवाद।

जयपुर 

शब्द जब भावनाओं से आगे बढ़कर जीवन का सवाल पूछने लगें, तो कविता कथा बन जाती है। जयपुर लिट्रेचर फेस्टिवल में ऐसा ही एक आत्मीय और विचारोत्तेजक क्षण देखने को मिला, जब लेखिका-कवयित्री अंशु हर्ष ने अपनी रचनात्मक यात्रा को साझा करते हुए अपने पहले नॉवल ‘इच्छा मृत्यु’ को पाठकों के सामने रखा। यह सिर्फ एक किताब का लोकार्पण नहीं था, बल्कि कविता से नॉवल तक की एक गहरी साहित्यिक छलांग का उत्सव था।

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जयपुर लिट्रेचर फेस्टिवल के पहले दिन आयोजित साहित्यिक संवाद सत्र “पोएट्री – खुद से बात” में कवि और पीआर एक्सपर्ट जगदीप सिंह ने अंशु हर्ष से उनके लेखन, अनुभव और साहित्यिक दृष्टि पर खुलकर बातचीत की। इसी सत्र में अंशु हर्ष के पहले नॉवल ‘इच्छा मृत्यु’ का औपचारिक लोकार्पण हुआ, जिसका विमोचन वरिष्ठ लेखिका एवं अनुवादक माला श्री लाल ने किया।

कविता बनाम नॉवल: भाव से संघर्ष तक

संवाद के दौरान अंशु हर्ष ने बताया कि कविता और नॉवल की प्रकृति एक-दूसरे से बिल्कुल अलग होती है। उनके शब्दों में, “कविता भावनाओं का तात्कालिक विस्फोट होती है, जबकि नॉवल धैर्य, अनुशासन और पात्रों के साथ लंबे समय तक जीने की प्रक्रिया है।” उन्होंने कहा कि ‘इच्छा मृत्यु’ जीवन और मृत्यु के बीच चलने वाले आंतरिक संघर्ष की कहानी है, जो पाठक को केवल पढ़ने नहीं, बल्कि सोचने और खुद से सवाल करने पर मजबूर करती है।

अनुवाद: भाषा से आगे की उड़ान

अपनी कविता संग्रह “समंदर – दी ओशन” के अंग्रेज़ी अनुवाद पर चर्चा करते हुए अंशु हर्ष ने अनुवाद को साहित्य का विस्तार बताया। उनका मानना है कि सही अनुवाद रचना की आत्मा को बचाए रखते हुए उसे नई भाषाओं और संस्कृतियों तक पहुँचाता है। “अनुवाद दीवारें नहीं, पुल बनाता है,” उन्होंने कहा।

साहित्य से भरा रहा पहला दिन

जयपुर लिट्रेचर फेस्टिवल के पहले दिन अलग-अलग सत्रों में बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी जुटे। पाठकों ने अपने प्रिय लेखकों को सुना, सवाल पूछे और विचारों के इस उत्सव का हिस्सा बने। अंशु हर्ष का यह सत्र खास इसलिए भी रहा, क्योंकि यहां भावनाओं, विचारों और रचनात्मक संघर्ष—तीनों का सजीव संगम देखने को मिला।

कुल मिलाकर, ‘इच्छा मृत्यु’ का लोकार्पण सिर्फ एक नई किताब की शुरुआत नहीं, बल्कि एक लेखिका की कविता से कथा तक की परिपक्व साहित्यिक यात्रा का ऐलान था।

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