पूंछरी का लोठा ब्रजभाषा के रस में सराबोर | मुकुट मुखारविंद पर गूंजे कृष्ण, गुरु और राष्ट्रभक्ति के स्वर, ‘ब्रज लोक बांसुरी’ का हुआ विमोचन

भरतपुर के मुकुट मुखारविंद, पूंछरी का लोठा में अखिल भारतीय ब्रजभाषा कवि सम्मेलन आयोजित हुआ। ‘ब्रज लोक बांसुरी’ पुस्तक का विमोचन हुआ और देशभर के कवियों ने काव्यपाठ किया।

गुरु महिमा …

गुरु केवल ज्ञान नहीं देते, वे जीवन का मार्ग भी प्रकाशित करते हैं। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर पढ़िए डॉ. अनिता जैन ‘विपुला’ की हृदयस्पर्शी कविता, जिसमें गुरु को ज्ञान-गंगा, जीवन-सार और मुक्ति का द्वार बताया गया है।

इंद्रजाल …

डॉ. अलका अग्रवाल की कविता ‘इंद्रजाल’ में बदलते बादलों, आकाश, हवा और प्रकृति के मायावी रूप का बेहद सुंदर और भावपूर्ण चित्रण किया गया है। पढ़ें प्रकृति और कल्पना का अनूठा काव्य।

हर आम आदमी का सपना …

पना घर बनाने का सपना, EMI का संघर्ष और बुढ़ापे की तन्हाई—आनन्द ‘अविरल’ की यह भावुक हिंदी कविता हर मिडिल क्लास परिवार की कहानी बयां करती है।

होठों पर मुस्कान …

होठों पर मुस्कान’ डॉ. अलका अग्रवाल की एक भावपूर्ण हिंदी कविता है, जो यादों, दर्द, आत्मसंयम और जीवन में मुस्कुराते रहने का प्रेरक संदेश देती है।

कागज़ पर ही सही…

यह कविता समाज में न्याय और अन्याय के दोहरे मापदंडों पर सवाल उठाती है। जब निर्दोष को छोटी भूल पर कठोर दंड और प्रभावशाली व्यक्ति को बड़ी गलती पर भी छूट मिलती है, तब एक संवेदनशील मन अपने शब्दों के माध्यम से मौन प्रतिरोध दर्ज करता है।

निर्मोही कौन?

पति की मृत्यु के बाद शोक में डूबी विभा को सांत्वना देने के बजाय एक कटाक्ष उसकी पीड़ा को और गहरा कर देता है। यह मार्मिक लघुकथा बताती है कि दुख की घड़ी में शब्द भी मरहम बन सकते हैं और घाव भी। अंत में कहानी पाठक से एक सवाल पूछती है—आखिर निर्मोही कौन है?

ये ‘काश’ क्या है?

‘ये काश क्या है?’ एक ऐसी कविता है जो ‘काश’ शब्द के भीतर छिपी उम्मीद, अधूरे सपनों, जीवन की बेचैनी और मुस्कान के द्वंद्व को बेहद संवेदनशील ढंग से व्यक्त करती है। यह कविता पाठक को अपने जीवन के उन अनकहे एहसासों से जोड़ती है जिन्हें अक्सर सिर्फ एक शब्द—’काश’—बयां कर देता है।

काव्य, व्यंग्य और साहित्य का संगम: भरतपुर में पुस्तक विमोचन के साथ सजी भव्य काव्य गोष्ठी, 45 कवियों ने बांधा समां

भरतपुर के स्वास्थ्य मंदिर रणजीत नगर में राजस्थान जन सांस्कृतिक परिषद् एवं राष्ट्रीय कवि संगम के तत्वावधान में काव्य गोष्ठी और पुस्तक विमोचन समारोह आयोजित हुआ। 45 कवियों ने काव्य पाठ किया और ओमप्रकाश कुंतल की पुस्तक का विमोचन किया।

अपना हाथ जगन्नाथ …

दादा जी, आरव और अमायरा की प्रेरक लघुकथा ‘अपना हाथ जगन्नाथ’ बताती है कि शिकायत करने के बजाय स्वयं पहल करने से कैसे एक उजड़ा पार्क हरा-भरा बगीचा बन सकता है। पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और सामूहिक प्रयास का सुंदर संदेश।