भरतपुर के नेकी दरबार में जरूरतमंदों और बुजुर्गों को निःशुल्क भोजन, आवास, उपचार और राशन सहायता दी जाती है। जानिए इस अनूठी सेवा पहल के बारे में।
भरतपुर। घर में राशन खत्म हो रहा हो, दवाइयों का खर्च उठाना मुश्किल हो जाए और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए भी पैसे न बचें, तो परेशानी सिर्फ आर्थिक नहीं रहती। उन लोगों के लिए यह संकट और गहरा हो जाता है, जिन्होंने हमेशा अपने दम पर जिंदगी जी है और अब भी अपनी मजबूरी किसी के सामने जाहिर नहीं करना चाहते।
भरतपुर में ऐसा ही एक सेवा केंद्र इन लोगों के लिए सहारा बनने की कोशिश कर रहा है। सुभाष नगर स्थित संत कौशिक आश्रम में चलने वाला ‘नेकी दरबार’ जरूरतमंदों की सहायता इस तरह करता है कि मदद लेने वाले की पहचान और स्वाभिमान दोनों सुरक्षित रहें। यहां सेवा का मकसद किसी की मजबूरी को सामने लाना नहीं, बल्कि मुश्किल वक्त में उसे संबल देना है।
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आर्थिक संकट में भी स्वाभिमान से समझौता नहीं
रोडवेज बस स्टैंड हीरादास के निकट स्थित इस सेवा केंद्र का संचालन आशा मल्टीपरपज सोसाइटी, भरतपुर की ओर से किया जा रहा है। संस्था के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में इसके माध्यम से हजारों जरूरतमंद लोग लाभान्वित हो चुके हैं। यहां उन लोगों की जरूरतों पर खास ध्यान दिया जाता है, जो मेहनत और आत्मसम्मान के साथ जीवन बिताते आए हैं, लेकिन बदलते हालात ने उन्हें आर्थिक संकट में डाल दिया है। इनमें ऐसे लोग भी शामिल हैं, जो अपनी परेशानी न तो दूसरों को बताना चाहते हैं और न ही किसी के सामने मदद के लिए हाथ फैलाने की स्थिति में खुद को सहज महसूस करते हैं। नेकी दरबार की पहल इसी खामोश परेशानी को समझने पर केंद्रित है। प्रयास है कि आर्थिक तंगी किसी व्यक्ति को भोजन, इलाज या दूसरी बुनियादी जरूरतों से वंचित न करे और उसे सहायता लेने में संकोच भी न हो।
जरूरत पड़ने पर चौबीसों घंटे सहारा
नेकी दरबार की सेवादार साधना शर्मा के अनुसार, यहां सख्त जरूरतमंद लोगों और विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों को आपात परिस्थितियों में निःशुल्क आवास, भोजन, उपचार और देखरेख की सुविधा दी जाती है। यह सेवा चौबीसों घंटे और साल के सभी 365 दिन उपलब्ध रहती है। सहायता में धर्म, जाति और लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता।
सेवा का दायरा उन बुजुर्गों तक भी है, जो अपने दैनिक काम खुद कर सकते हैं और अपने घर में रह रहे हैं, लेकिन आर्थिक परेशानी के चलते भोजन सामग्री जुटाना उनके लिए कठिन हो गया है। ऐसे लोगों को घर पर ही हर महीने निःशुल्क राशन किट पहुंचाई जाती है, जिसमें एक माह तक भोजन तैयार करने के लिए जरूरी सामग्री शामिल होती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य सिर्फ राशन देना नहीं, बल्कि बुजुर्गों को अपने घर में रहते हुए सम्मान के साथ जीवन बिताने में मदद करना है।
मदद मिले, लेकिन पहचान सामने न आए
नेकी दरबार की एक अहम विशेषता सहायता पाने वाले व्यक्ति की गोपनीयता बनाए रखना है। यहां मदद लेने वालों का नाम, पता, तस्वीर और पहचान से जुड़ी दूसरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती। यानी किसी की परेशानी को प्रचार का माध्यम बनाए बिना सहायता पहुंचाने की कोशिश की जाती है। दरबार की सोच है कि आर्थिक संकट से जूझ रहे व्यक्ति को राहत मिलनी चाहिए, न कि अपनी मजबूरी सार्वजनिक करने का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़े। यही व्यवस्था उन लोगों के लिए मदद मांगने का रास्ता आसान बना सकती है, जो जरूरत होने के बावजूद सामाजिक संकोच या आत्मसम्मान के कारण सामने आने से बचते हैं।
सहयोग से चल रही सेवा की व्यवस्था
इस सेवा केंद्र का संचालन परोपकारी और उदार लोगों के आर्थिक सहयोग से किया जा रहा है। संस्था का प्रयास है कि जरूरत के समय किसी व्यक्ति को भोजन, आश्रय और आवश्यक देखभाल के अभाव का सामना न करना पड़े। साधना शर्मा के अनुसार, जरूरतमंद व्यक्ति सहायता प्राप्त करने के लिए और सेवा कार्य में आर्थिक सहयोग देने के इच्छुक लोग नेकी दरबार के अधिकृत मोबाइल नंबर 9461642950 पर संपर्क कर सकते हैं।
नेकी दरबार की पहल एक ऐसी जरूरत की ओर ध्यान खींचती है, जो अक्सर दिखाई नहीं देती। हर परेशान व्यक्ति अपनी स्थिति सार्वजनिक नहीं करना चाहता और हर जरूरतमंद मदद मांगने के लिए आगे नहीं आ पाता। ऐसे में किसी की पहचान उजागर किए बिना उसकी जरूरत पूरी करना ही इस सेवा का मूल उद्देश्य है—ताकि मदद भी पहुंचे और उसका स्वाभिमान भी बना रहे।
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