नई दिल्ली | नई हवा ब्यूरो
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत आने वाले कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर है। EPFO के तहत कर्मचारियों की सैलरी लिमिट बढ़ सकती है। एक हाई लेवल कमेटी ने इसकी सिफारिश की है। कमेटी ने सरकार को प्रस्ताव दिया है कि, ईपीएफओ की सैलरी लिमिट में इजाफा किया जाए।
हाई लेवल कमेटी ने वेतन सीमा में करीब 40 फीसदी के इजाफे का प्रस्ताव दिया है। सरकार ने इसे मंजूर कर लिया तो EPF सैलरी लिमिट मौजूदा 15,000 रुपए से बढ़ाकर 21,000 रुपए प्रति माह कर दी जाएगी। समिति ने अपनी सिफारिश में यह भी कहा है कि, सरकार सभी प्रस्तावों पर विचार करते हुए बैक डेट से वृद्धि को लागू कर सकती है।
उच्च स्तरीय समिति ने कहा है कि, सैलरी लिमिट को मौजूदा 15,000 रुपए से बढ़ाकर 21,000 रुपए प्रति माह कर दिया जाए। समिति का कहना है कि सरकार इस पर विचार भी कर रही है।
किसे मिलेगा फायदा?
नए प्रस्ताव के एक बार लागू होने के बाद अनुमानित 7.5 लाख अतिरिक्त श्रमिकों को योजना के दायरे में लाया जा सकेगा। उन्हें वेतन बढ़ोतरी में भी शामिल किया जा सकेगा। यह अंतिम बार साल 2014 में लागू हुआ था।
सरकारी खजाने को भी राहत
दरअसल, नियोक्ताओं ने कोरोना महामारी के प्रकोप के कारण बिगड़े बजट का हवाला देते हुए इस बढ़ोतरी की मांग की थी।अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो सरकारी खजाने को भी राहत मिलेगी, क्योंकि केंद्र सरकार वर्तमान में ईपीएफओ की कर्मचारी पेंशन योजना के लिए हर साल लगभग 6,750 करोड़ रुपए का भुगतान करती है। सरकार इस योजना के लिए ईपीएफओ ग्राहकों के कुल मूल वेतन का 1.16 फीसदी योगदान करती है।
ईपीएफओ के न्यासियों के केंद्रीय बोर्ड में शामिल केई रघुनाथन (K E Raghunathan) ने कहा कि ईपीएफओ के भीतर एक आम सहमति है कि ईपीएफओ और ईएसआईसी दोनों के तहत सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए समान मानदंडों का पालन किया जाना चाहिए। दोनों योजनाओं के तहत मानदंडों में अंतर के कारण श्रमिकों को अपनी सामाजिक सुरक्षा के लाभों से वंचित नहीं रहना चाहिए।’
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया, ‘दि ईपीएफओ के न्यासी के केंद्रीय बोर्ड की ओर से इस सुझाव को स्वीकार कर लिया जाता है, तो यह उन नियोक्ताओं को राहत देगा, जो किसी भी अतिरिक्त वित्तीय बोझ को तुरंत उठाने के लिए अनिच्छुक हैं।’
क्या है EPS के नियम
जब नौकरी शुरू करते हैं तो EPF के सदस्य बन जाते हैं। इसके साथ ही इसी दौरान हम EPS के भी सदस्य बन जाते हैं। कर्मचारी अपनी सैलरी का 12 फीसदी हिस्सा EPF में देता है, इतनी ही रकम उसकी कंपनी की ओर से भी दी जाती है, लेकिन इसमें से एक हिस्सा 8.33 परसेंट EPS में भी जाता है।
मौजूदा समय में पेंशन योग्य वेतन अधिकतम 15 हजार रुपए ही है। यानि हर महीने पेंशन का हिस्सा अधिकतम (15,000 का 8.33%) 1250 रुपए होता है। ऐसे में कर्मचारी जब रिटायर होता है तो भी पेंशन की गणना करने के लिए अधिकतम वेतन 15 हजार रुपए ही माना जाता है। इसके तहत एक कर्मचारी EPS के तहत अधिकतम पेंशन 7,500 रुपए ही पा सकता है।
आपने EPS में योगदान 1 सितंबर, 2014 से पहले शुरू किया है तो आपके लिए पेंशन योगदान के लिए मंथली सैलरी की अधिकतम सीमा 6500 रुपए होगी। 1 सितंबर, 2014 के बाद अगर आप EPS से जुड़े हैं तो अधिकतम सैलरी की सीमा 15,000 होगी।
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