नई दिल्ली
रेलवे बोर्ड की लापरवाही के चलते 20 हजार यात्री ट्रेनों-मालगाड़ियों और रेल संरक्षा की कमान संभाल रहे दो हजार से अधिक रेल अधिकारी (ग्रुप-बी) पिछले चार साल से प्रमोशन के लिए तरस रहे हैं। इससे आर्थिक नुकसान उठाने के साथ ही रेलवे ग्रुप-ए के पदों पर उनकी नियुक्ति नहीं हो पा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि रेलवे में रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले इस वर्ग की उपेक्षा कर रेल संरक्षा से समझौता किया जा रहा है। यदि इन अधिकारियों को समयबद्ध चरण से सम्बंधित पदों पर पदोन्नति नहीं मिली तो उन पदों के खत्म होने का खतरा पैदा हो गया है।
प्रमोशन प्रक्रिया ही आगे नहीं बढ़ाई
रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि विभागीय प्रोन्नति समिति (डीपीसी) द्वारा ग्रुप बी के अधिकारियों की प्रमोशन प्रक्रिया को ही आगे नहीं बढ़ाया गया है। यह सिलसिला 2016-17 से चल रहा है। 2021-22 ग्रुप बी को सूचीबद्ध नहीं किया गया है। जबकि केंद्र सरकार के नियम कहते हैं कि डीपीसी समय पर होनी चाहिए, जिससे अधिकारियों को 1 अप्रेल से प्रोन्नत कर नियुक्त किया जा सके।
दिलचस्प ये है कि रेलवे को विशेषज्ञ अफसरों की आवश्यकता तो है और इसी कारण वह ग्रुप ए के पदों को संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के जरिए समय पर भर भी रहा है, लेकिन रेलवे में प्रमोशन के लिए पहले से ही कतार में खड़े अफसरों को पदोन्नति के लिए इन्तजार कराया जा रहा है।
पचास फीसदी पदों को पदोन्नति से भरने का नियम, पर पालना करना भूले
इस बाबत इंडियन रेलवे प्रमोटी ऑफिसर्स फेडरेशन की ओर से रेलवे बोर्ड के चेयरमैन को लगातार पत्र लिखे जा रहे हैं। मौजूदा रेलवे बोर्ड के चेयरमैन व सीईओ सुमित शर्मा को अप्रेल 2021 में लिखे पत्र में कहा गया है कि रेलवे ग्रुप ए के कुल पदों में से 50 फीसदी पदों पर ग्रुप बी के अधिकारियों को प्रमोट कर नियुक्त करने का नियम है। लेकिन इसकी पालना नहीं हो रही। रेलवे में ग्रुप ए के पदों को संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) से समय पर भरा जा रहा है, लेकिन प्रमोटी अफसरों का प्रमोशन चार साल से लटका हुआ है।
पदों के समाप्त होने का खतरा
रेलवे विशेषज्ञ पूर्व चीफ रोलिंग स्टॉक इंजीनियर एसके बंसल के मीडिया में आए बयानों के अनुसार वित्त मंत्रालय ने 2017 में नियम बनाया था। इसके अनुसार जो पद दो साल तक भरे नहीं जाएंगे, सरकार उनको सीज (समाप्त) कर देगी। रेलवे में ग्रुप बी के साथ हमेशा भेदभाव किया जा रहा है। गत वर्ष ग्रुप बी के पर्सनल कैडर को प्रमोशन दिया गया, लेकिन मैकेनिकल इंजीनियर, सिविल इंजीनियर, इलेक्ट्रिकल इंजीनियर, सिग्नल एंड टेलीकॉम इंजीनियर सहित सात कैडर का प्रमोशन चार साल से नहीं हो पा रहा है।
रेल संरक्षा व ट्रेन परिचालन पर असर
प्रमोशन नहीं मिलने से ग्रुप बी के अधिकारियों में हताशा और निराशा घर कर रही है। इसका सीधा असर रेल संरक्षा व ट्रेन परिचालन पर पड़ रहा है। रोलिंग स्टॉक (इंजन-कोच-डिब्बे) की मरम्मत-रखरखाव, रेलवे ट्रैक की मरम्मत व निगरानी, सिग्नल सिस्टम आदि कार्य ग्रुप बी के अधिकारियों के कंधों पर हैं। सरकार 15 से 20 साल के अनुभवी ग्रुप बी के अधिकारियों की अनदेखी कर ग्रुप ए के अधिकारियों को आगे बढ़ा रही है, जिनका अधिकांश कार्य प्रशासन से जुड़ा होता है।
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