अफसरों की गलती, भुगत रहे पटाखा कारोबारी, हो सकता है एक हजार करोड़ का नुकसान

जयपुर 

राजस्थान में अफसर अदूरदर्शिता पूर्ण फैसले ले रहे हैं और उसका खामियाजा कारोबारी भुगत रहे हैं। और सरकार की स्थति ये है कि वह इन अफसरों से ये नहीं पूछ रही कि ऐसे फैसले सरकार के संज्ञान में लाए बिना लिए क्यों? अफसरों के ऐसे अदूरदर्शिता पूर्ण फैसलों से लग रहा कि इस सरकार में बिना समन्वय एवं संवाद के निर्णय किए जा रहे हैं।

ताजा मामला पटाखा कारोबारियों से जुड़ा हुआ है। इस मामले में अफसरों ने पटाखा कारोबारियों से दीपावली पर पटाखों की बिक्री के लिए लाइसेंस देने को आवेदन मांग लिए और जब आवेदन मांग लिए गए तो पटाखा व्यापारियों ने स्टॉक उठा लिया। इस सबके बाद अचानक सरकार ने पटाखों पर प्रतिबन्ध लगा दिया। अब सरकार और उसके अफसरों के ऐसे अदूरदर्शिता पूर्ण फैसलों का खामियाजा पटाखा व्यापारी भुगत रहे हैं। आशंका है कि ऐसे अदूरदर्शिता पूर्ण फैसलों से पटाखा कारोबारियों को करीब एक हजार करोड़ का नुकसान हो सकता है।

इस बाबत ऑल राजस्थान ट्रेड एण्ड इण्डस्ट्री एसोसियेशन (आरतिया) ने मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर पटाखों पर लगे बैन पर पुर्नविचार करने का आग्रह किया है। पत्र में मांग की गई कि इसमें ढील दी जाए। ‘आरतिया’ के अध्यक्ष विष्णु भूत ने बताया कि पत्र में मुख्यमंत्री से आग्रह किया गया है कि वे  पटाखा कारोबारियों के साथ सहानुभूति रखते हुए बैन में ढील प्रदान कर कारोबार की इजाजत प्रदान करें ताकि प्रदेश के लाखों पटाखा कारोबारी अपनी रोजी-रोटी चला सकें।

‘आरतिया’ के मुख्य संरक्षक आशीष सर्राफ ने बताया कि सरकार द्वारा कोरोना की तीसरी लहर की संभावनाओं को देखते हुए 31 जनवरी तक पटाखों पर बैन लगाया गया है, जबकि अधिकतम पटाखा कारोबार दीपावली से प्रारम्भ होकर जनवरी-फरवरी तक विवाह आदि के सावों  तक चलता है तथा इस त्यौहारी एवं सावों के सीजन को देखते हुए पहले से ही पटाखों के कारखानों में 8 से 10 माह तक निर्माण कार्य होता है तथा सीजन के दौरान राज्य में करीब 1000 करोड़ रुपए का कारोबार होता है।

‘आरतिया’ के के मुख्य सलाहकार कमल कन्दोई ने बताया कि पटाखों के विक्रय के लाइसेंस हेतु आवेदन भी पूर्व में विभाग ने ले लिए और चूंकि विभाग द्वारा आवेदन लिए गए तो पटाखा व्यवसायियों को आस रही कि इस बार आतिशबाजी होगी तथा पटाखों की बिक्री भी होगी, जिससे व्यापारियों ने पटाखों का स्टॉक भी उठा लिया। उन्होंने कहा कि यह विभागीय अधिकारियों की अदूरदर्शिता ही है कि उन्होंने बिना समन्वय एवं संवाद के पहले तो पटाखों के लाइसेंस हेतु आवेदन ले लिए  और अब सरकार द्वारा पटाखों पर बैन की घोषणा कर दी गई है।

बैन से सड़क पर आ जाएंगे पटाखा व्यापारी
‘आरतिया’ के कार्यकारी अध्यक्ष प्रेम बियानी ने बताया कि पटाखों पर बैन लगाने से पटाखा व्यापारी सड़क पर आ जाएंगे क्योंकि विभाग द्वारा आवेदन लिए जाने से उन्होंने पटाखों का प्रचुर मात्रा में स्टॉक ले लिया है। लगभग सभी व्यवसायों में कोरोना के बाद कुछ कार्य हो रहा है तथा उनकी निरन्तरता भी बन रही है, किन्तु पटाखा व्यवसाय गत 2 वर्षो से लगभग बन्द पड़ा है तथा मरणासन्न अवस्था में है।

‘आरतिया’ के उपाध्यक्ष प्रकाश सराफ ने बताया कि राज्य के विभिन्न संगठनों द्वारा भी पटाखों पर लगाए  गए बैन में रियायत प्रदान किए जाने हेतु सरकार से आग्रह किया गया है, जिसको देखते हुए उचित निर्णय लिया जाना चाहिए ।

बीच का रास्ता निकाले सरकार
‘आरतिया’  के महामंत्री अनिल सिंघल ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि पटाखा कारोबारियों को राहत प्रदान करते हुए कोई बीच का रास्ता निकाला जाए ताकि पटाखा व्यापारियों की रोजी-रोटी चल सके और उनसे सम्बद्ध कारीगरों, मजदूरों, कामगारों का जीवन यापन हो सके।

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