अलवर
राजस्थान की REET परीक्षा में धांधली का एक और बड़ा खुलासा हुआ है। इस बार धांधली में बिहार की गैंग का कनेक्शन सामने आया है। इस गैंग ने आठ-आठ लाख रुपए लेकर REET परीक्षा में डमी कैंडिडेट को बिठाया। इसका खुलासा तब हुआ जब भरतपुर के एक अभ्यर्थी की जगह डमी कैंडीडेट परीक्षा नहीं दे सका और फिर उसने पोल खोल दी। इसके बाद यह गैंग अलवर पुलिस के हत्थे चढ़ गया।
सूत्रों के अनुसार अलवर पुलिस ने इस गैंग के आधा दर्जन लोगों को पकड़ा है। इनके कब्जे से बड़ी तादाद में मोबाइल और टेबलेट बरामद हुए हैं। पुलिस अब इनसे गहन पूछताछ कर रही है। सूत्र बता रहे हैं कि इस फर्जीवाड़े को लेकर और बड़ा मामला खुल सकता है। गिरोह में कई अन्य लोग भी हैं। उन तक पुलिस पहुंचने के प्रयास में जुटी है।
मुख्य सरगना बिहार का बताया जा रहा है। परीक्षा देने वाले बिहार के हैं। एक अभ्यर्थी भरतपुर का है। जयपुर के एक बिचौलिया को भी पुलिस ने पकड़ा है। इस मामले का खुलासा तब हुआ जब भरतपुर के अभ्यर्थी की जगह डमी कैंडीडेट परीक्षा नहीं दे सका तो वह खाली चेक, स्टॉम्प, अंकतालिका लेने पहुंचा। तब पुलिस ने पहले से योजना बना कर कार्रवाई को अंजाम दिया।
ऐसे पकड़ में आया गैंग
राजगढ़ थानाप्रभरी ने बताया कि राजगढ़ में त्रिवेणी उच्च माध्यमिक स्कूल में ड्यूटी पर तैनात कांस्टेबल दयाराम एक-एक अभ्यर्थी को चेक कर परीक्षा केंद्र में प्रवेश करा रहा था। उसी समय भरतपुर निवासी अभ्यर्थी वीरपाल सिंह का प्रवेश पत्र चेक किया। उसे दूसरा प्रवेश पत्र लाने को बोला गया। इसके बाद परीक्षा केंद्र में आने दिया गया। इस अभ्यर्थी पर पुलिस को शक हुआ। इसके बाद उस पर पूरी नजर रखी गई। लेकिन परीक्षा के बाद यह अभ्यर्थी भीड़ में से निकल गया।
पुलिस ने गैंग तक पहुँचने के लिए ऐसे बिछाया जाल
पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि अभ्यर्थी वीरपाल सिंह सिकंदरा में किसी दूसरे व्यक्ति से मिलने गया है। उसकी कार के नम्बर भी बता दिए गए। इसके बाद पुलिस सिकंदरा पहुंची। वहां कांस्टेबल ने देखा कि कुछ देर बाद एक कार आई और उसमें बैठा व्यक्ति वीरपाल से बातचीत करने लगा। उनकी बातचीत सुनने के लिए सादा वर्दी में मौजूद कांस्टेबल अजीत को भेजा। तब पता चल गया कि वे REET परीक्षा में लेन-देन की बातें कर रहे हैं।
कार में बैठे व्यक्ति को यह भनक लग गई कि पुलिस उनका पीछा कर रही है और वह युवक कार लेकर भागने लगा। लेकिन कार स्टार्ट करने से पहले ही पुलिस ने उसे पकड़ लिया। उसने अपना नाम रामफूल गुर्जर निवासी जयपुर बताया। जो वीरपाल की जगह डमी कैंडिडेट बैठाने वाला था। लेकिन डमी नहीं पहुंचा तो वीरपाल ने चेक वापस लेने का दबाव बनाया। गिरोह के सदस्य चेक वापस देने में आनाकानी कर रहे थे और वीरपाल को REET में पास करने का भरोसा दे रहे थे। और यह भी कह रहे थे कि परिणाम आने के बाद ही कागज व चेक लौटाए जाएंगे।
भरतपुर के अभ्यर्थी से सख्ती से पूछा तो उगला राज
इसके बाद पुलिस ने वीरपाल से सख्ती से पूछताछ की तो बताया कि रामफूल ने बिहार के रहने वाले हेमंत व राजू सहित कुछ लोगों को परीक्षा पास कराने के नाम पर चेक व मूल दस्तावेज दिए हैं। इन्होंने ऐसे अनेक अभ्यर्थियों के साथ किया है। इसके बाद रामफूल से सख्ती से पूछा तो बताया कि उसने बताया हेमंत उसके साथी राजू मिलकर यही काम करता है। अभ्यर्थियों की जगह डमी कैंडीडेट बैठाता है। 8 लाख रुपए रीट में देना तय है। जिसके लिए पहले ही अभ्यर्थी के मूल दस्तावेज, स्टाम्प व चेक जमा कर लिए।
टहला बाइपास से तीन युवकों को दबोचा
इसके बाद पुलिस को टहला बाइपास पर एक कार में तीन युवकों के बैठे होने की सूचना मिली। पुलिस वहां पहुंची तो पहले तो संतोषजन जवाब नहीं दिया। फिर बाद में कहा कि वे वीरपाल को छुड़वाने आए हैं। उनके कब्जे से 8 मोबाइल, दो टेबलेट, चेक व मार्कशीट मिली हैं। ये पकड़े गए लोग गिरोह के मुख्य हैं और डमी कैंडीडेट हैं।
इन्हें किया गया गिरफ्तार
रामफूल गुर्जर पुत्र मंगलराम गुर्जर, निवासी मारवाड़ा कच्ची बस्ती जयपुर,
वीरपाल सिंह पुत्र भग्गी सिंह, निवासी बयाना भरतपुर
राज उर्फ बंटी पुत्र कौशेंद्र निवासी गोटिया नालंदा बिहार,
नीरज कुमार पुत्र विजेंद्र निवासी लंगडिया, विगाहा दीप नगर, नालंदा बिहार
राहुल कुमार पुत्र भोला प्रसादी निवासी दीहरा, लक्खीसराय, बिहार
रवि कुमार पुत्र युगल प्रसाद निवासी माटिहानी, मोहनपुरा गया बिहार।
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