राजस्थान के RAS अधिकारी पंकज ओझा को अक्टूबर 2025 की करीब 14 फेसबुक पोस्ट के मामले में कार्मिक विभाग ने चार्जशीट दी है। उन्हें 15 दिन में जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं।
जयपुर। सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट अब राजस्थान के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी आरएएस पंकज ओझा के लिए विभागीय कार्रवाई का कारण बन गई हैं। राजस्थान सरकार के कार्मिक विभाग ने उन्हें चार्जशीट थमाते हुए 15 दिन में लिखित जवाब देने के निर्देश दिए हैं। मामला अक्टूबर 2025 में फेसबुक पर की गई करीब 14 पोस्ट से जुड़ा है। इन पोस्ट को लेकर सरकारी सेवा में रहते हुए कथित आपत्तिजनक, धार्मिक, जातिगत और सांप्रदायिक टिप्पणियां करने तथा सरकार की छवि धूमिल होने के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, पंकज ओझा ने इन आरोपों को गलत बताया है।
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अक्टूबर की 14 पोस्ट बनीं विभागीय कार्रवाई की वजह
विभागीय कार्रवाई का आधार अक्टूबर 2025 में पंकज ओझा की फेसबुक आईडी से की गई करीब 14 पोस्ट को बनाया गया है। आरोप है कि गोपालन विभाग के तत्कालीन निदेशक के पद पर रहते हुए उन्होंने सार्वजनिक रूप से ऐसी टिप्पणियां कीं, जिन्हें विभाग ने सरकारी अधिकारी के आचरण के अनुरूप नहीं माना।
इन पोस्ट को लेकर धार्मिक, जातिगत और सांप्रदायिक टिप्पणियां करने के साथ केंद्र सरकार की नीतियों और राजनीतिक नेताओं की आलोचना करने के आरोप भी सामने आए हैं। विभाग ने इन गतिविधियों को सरकारी सेवा में रहते हुए अधिकारी के आचरण से जुड़ा मामला माना है।
पहले भी मांगा गया था जवाब, अब 15 दिन की मोहलत
विभागीय जानकारी के अनुसार, कार्मिक विभाग ने पंकज ओझा से 19 जनवरी 2026 को भी स्पष्टीकरण मांगा था। आरोप है कि उन्होंने निर्धारित समय में जवाब नहीं दिया। अब चार्जशीट जारी कर उन्हें अपना लिखित पक्ष रखने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि तय अवधि में जवाब नहीं मिलने पर उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर एकतरफा कार्रवाई की जा सकती है। यानी निर्धारित समय में जवाब नहीं आने की स्थिति में विभाग उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर आगे की प्रक्रिया बढ़ा सकता है।
जुलाई 2026 में भी सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर हुई थी शिकायत
पंकज ओझा के खिलाफ सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर इससे पहले भी शिकायत सामने आई थी। जुलाई 2026 में छात्र प्रदर्शनों, जिनमें नीट परीक्षा विवाद से जुड़े प्रदर्शन भी शामिल थे, के समर्थन में की गई एक पोस्ट को लेकर उनके खिलाफ सिविल सेवा आचरण नियम, 1971 के उल्लंघन की शिकायत मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और कार्मिक विभाग तक पहुंची थी। वर्तमान चार्जशीट का आधार अक्टूबर 2025 की करीब 14 फेसबुक पोस्ट को बनाया गया है। ऐसे में विभागीय कार्रवाई में अधिकारी के सोशल मीडिया पर किए गए कथित बयानों और सरकारी सेवा के दौरान उनके आचरण से जुड़े आरोपों की जांच महत्वपूर्ण होगी।
बचाव में सरकारी रिकॉर्ड देखने की अनुमति, प्रभाव डालने पर भी चेतावनी
कार्मिक विभाग ने पंकज ओझा को अपने बचाव की तैयारी के लिए संबंधित सरकारी रिकॉर्ड देखने की अनुमति दी है। इससे वे आरोपों से जुड़े दस्तावेजों का अध्ययन कर अपना पक्ष रख सकते हैं। विभाग ने यह चेतावनी भी दी है कि राजनीतिक या अन्य प्रभाव के जरिए कार्रवाई को प्रभावित करने की कोशिश किए जाने पर अलग से कार्रवाई हो सकती है।
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