दौसा के मुर्शिद नगर लालसोट बाइपास स्थित हजरत ख्वाजा सूफी हकीमुद्दीन शाह के 43वें उर्स की शुरुआत चादरपोशी से हुई। 28 अक्टूबर को रात 9 बजे महफिले समाअ और कव्वाली होगी।
दौसा (अजीमुद्दीन)। चादर शरीफ का जुलूस, कव्वाली की गूंज और दरगाह में देश की खुशहाली के लिए उठे हाथ। दौसा में हजरत ख्वाजा सूफी हकीमुद्दीन शाह के 43वें उर्स की शुरुआत मंगलवार को धार्मिक रस्मों और अकीदत के माहौल में हुई। मुर्शिद नगर लालसोट बाइपास स्थित दरगाह पर आयोजित उर्स के पहले दिन चादरपोशी की गई और जायरीनों के लिए लंगर की व्यवस्था रही।
उर्स की शुरुआत शेखान मोहल्ला स्थित महफिल खाना से चादर शरीफ के जुलूस के साथ हुई। जुलूस नागौरी पुलिया से गुजरते हुए गुप्तेश्वर सर्किल पहुंचा, जहां कव्वाली पेश की गई। इसके बाद जुलूस दरगाह शरीफ पहुंचा। यहां मजार-ए-पाक पर मखमल की चादर पेश कर देश में अमन, खुशहाली और तरक्की की दुआ मांगी गई।
जायरीनों ने एक साथ बैठकर किया लंगर
उर्स के पहले दिन दरगाह पर पहुंचे जायरीनों के लिए लंगर यानी भोजन की व्यवस्था की गई। जायरीनों ने एक साथ बैठकर लंगर किया। रात को मीलाद शरीफ और नात ख्वानी का आयोजन हुआ, जिसमें धार्मिक माहौल बना रहा। दरगाह के सज्जादानशीन सूफी इकबाल शाह मुजफ्फरी ने बताया कि उर्स में जायरीनों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है। दरगाह परिसर में दुकानें भी लगाई गई हैं।
दूसरे दिन रात 9 बजे होगी महफिले समाअ
चार दिवसीय उर्स के दूसरे दिन बुधवार, 28 अक्टूबर को बाद नमाज-ए-इशा रात 9 बजे हल्का-ए-जिक्र और महफिले समाअ का आयोजन होगा। सूफी डॉ. अब्दुल लतीफ शाह अन्ना मियां ने बताया कि इस दौरान देश के मशहूर कव्वाल सूफियाना कलाम पेश करेंगे।
ये लोग रहे मौजूद
उर्स के अवसर पर सूफी शब्बन मियां, सूफी रहीस मियां, सूफी जलालुद्दीन, सूफी नवाजुद्दीन, सूफी रफीक अहमद, सूफी डॉ. अब्दुल लतीफ उर्फ अन्ना मियां, सूफी अज्जी बाबा, सूफी अहसान, सूफी शाकिर वकील, सूफी शाहीन बाबा और सूफी सलाउद्दीन सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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