रेलवे कर्मचारियों को 78 दिन का प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस मंजूर। 11.40 लाख कर्मचारियों को फायदा, जानिए ₹17,951 की गणना और वेतन सीमा बढ़ाने की मांग।
नई दिल्ली। त्योहारों से पहले रेलवे के लाखों कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर आई है। केंद्र सरकार ने रेलकर्मियों को 78 दिनों के वेतन के बराबर प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस (PLB) देने की मंजूरी दे दी है। बुधवार, 14 अक्टूबर को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में लिए गए इस फैसले से 11,40,770 कर्मचारियों को लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है। बोनस के भुगतान पर सरकार करीब ₹2,009 करोड़ खर्च करेगी।
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए इसे रेलकर्मियों के लिए दिवाली का तोहफा बताया। यह बोनस पात्र नॉन-गजेटेड रेलवे कर्मचारियों को दिया जाएगा। इससे त्योहारों के दौरान कर्मचारियों और उनके परिवारों को आर्थिक मदद मिलने की उम्मीद है।
कितनी मिलेगी बोनस की रकम?
रेलवे कर्मचारियों के बोनस की गणना फिलहाल ₹7,000 की मासिक वेतन सीमा और 78 दिनों के आधार पर की जाती है। इसी गणना के अनुसार अधिकतम बोनस की राशि ₹17,951 बनती है। हालांकि, कर्मचारियों को मिलने वाली वास्तविक राशि पात्रता और लागू नियमों के अनुसार तय होगी।
प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस रेलवे कर्मचारियों को हर साल दिया जाता है। इसका उद्देश्य कर्मचारियों के योगदान को प्रोत्साहित करना और उनके काम की सराहना करना है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब बोनस राशि के भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
11 साल से क्यों नहीं बदली बोनस की गणना?
बोनस को मंजूरी मिलने के बावजूद इसकी गणना के लिए निर्धारित वेतन सीमा में बदलाव की मांग फिर चर्चा में है। रेलकर्मियों के संगठनों का कहना है कि ₹7,000 की मासिक वेतन सीमा लंबे समय से स्थिर है, जबकि कर्मचारियों के वेतन और महंगाई भत्ते में बदलाव हुआ है।
भारतीय रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन (IRTSA) सहित कई संगठनों ने बोनस की गणना के लिए वेतन सीमा बढ़ाने की मांग की है। इन संगठनों का सुझाव है कि कर्मचारियों के वेतन स्तर के अनुसार बोनस की गणना होनी चाहिए। एक प्रमुख मांग इस सीमा को बढ़ाकर ₹18,000 करने की भी है।
₹46 हजार से ज्यादा बोनस की मांग क्यों?
यदि बोनस की गणना में मासिक वेतन सीमा ₹7,000 से बढ़ाकर ₹18,000 कर दी जाए और 78 दिनों का आधार बरकरार रखा जाए, तो इसी गणित से बोनस की रकम करीब ₹46,184 हो सकती है। यही वजह है कि रेलकर्मी मौजूदा बोनस व्यवस्था में संशोधन की मांग कर रहे हैं।
बोनस के मुद्दे पर राज्यसभा सांसद और माकपा नेता जॉन ब्रिटास ने भी रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर हस्तक्षेप का आग्रह किया था। उन्होंने वित्त वर्ष 2025-26 के बोनस के लिए भुगतान वाले दिनों की संख्या बढ़ाने और गणना की वेतन सीमा में संशोधन करने की मांग उठाई।
पत्र में श्रमिक संगठन सीटू की मांग का हवाला देते हुए बोनस की गणना के लिए मासिक वेतन सीमा कम से कम ₹28,440 करने की अपील की गई। यह आंकड़ा न्यूनतम वेतन और महंगाई भत्ते के आकलन पर आधारित बताया गया है। पत्र में त्योहारों को देखते हुए जल्द निर्णय लेने का आग्रह भी किया गया था।
कोल इंडिया और सेल से क्यों हो रही तुलना?
रेलवे कर्मचारियों के बीच बोनस की रकम को लेकर असंतोष की एक वजह दूसरे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में मिलने वाला बोनस भी है। रेलकर्मियों का कहना है कि कोल इंडिया और स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) में बोनस की रकम में पिछले वर्षों के दौरान बढ़ोतरी हुई है, जबकि रेलवे में गणना की सीमा लंबे समय से नहीं बदली।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पिछले साल कोल इंडिया के कर्मचारियों को करीब ₹1.03 लाख और सेल के कर्मचारियों को लगभग ₹29,500 बोनस मिला था। इस साल कोल इंडिया के कर्मचारियों के लिए ₹1.10 लाख और सेल के कर्मचारियों के लिए ₹40,000 बोनस मिलने की चर्चा है।
ऐसे में रेलवे कर्मचारियों के लिए 78 दिन के बोनस की मंजूरी राहत जरूर लेकर आई है, लेकिन गणना की पुरानी सीमा में बदलाव का सवाल अभी भी अहम बना हुआ है। अब देखना होगा कि बोनस की रकम बढ़ाने की मांग पर सरकार आगे क्या कदम उठाती है।
नई हवा खबरें अपने मोबाइल पर नियमित और डायरेक्ट प्राप्त करने के लिए व्हाट्सएप नंबर 9460426838 सेव करें और ‘Hi’ और अपना नाम, स्टेट और सिटी लिखकर मैसेज करें। आप अपनी खबर या रचना भी इस नंबर पर भेज सकते हैं।
चीन की दादागिरी पर भारत का कड़ा प्रहार: लद्दाख की 28 जगहों के नाम तय, बौखलाए ड्रैगन को दो टूक जवाब
RAS से IAS बने 16 अधिकारी, लिस्ट में CM की संयुक्त सचिव भी; अब किसे मिलेगी नई जिम्मेदारी?
RSS जिला प्रचारक से मारपीट, थानाधिकारी समेत 6 पुलिसकर्मी सस्पेंड
पति-पत्नी की एक जगह पोस्टिंग पर राजस्थान हाईकोर्ट का फैसला, फिर भी कर्मचारियों के लिए खुला ये रास्ता
