उदयपुर के सांसद स्वदेशी मेले में एमपीयूएटी के स्टॉल पर लहसुन बल्ब ब्रेकर, एलोवेरा जूस एक्सट्रैक्टर और मशरूम उत्पादन की तकनीकों का प्रदर्शन किया जा रहा है।
उदयपुर। किसान सिर्फ फसल पैदा करने तक सीमित न रहें, बल्कि उसी उपज की प्रोसेसिंग कर उसका बेहतर मूल्य हासिल करें—इसी सोच के साथ उदयपुर के राजस्थान कृषि महाविद्यालय के खेल मैदान में चल रहे ‘सांसद स्वदेशी मेला-2026’ में महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी) की ओर से कृषि प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन की तकनीकों का प्रदर्शन किया जा रहा है। स्टॉल संख्या 202 पर लगी मशीनें किसानों, युवाओं और आमजन का ध्यान खींच रही हैं।
2 से 5 अक्टूबर तक आयोजित मेले में एमपीयूएटी के स्टॉल पर लहसुन बल्ब ब्रेकर मशीन और एलोवेरा जूस एक्सट्रैक्टर मशीन का जीवंत प्रदर्शन किया जा रहा है। इन तकनीकों के जरिए किसानों को फसल कटाई के बाद होने वाले प्रसंस्करण, उत्पाद की उपयोगिता बढ़ाने और कृषि आधारित छोटे उद्योग शुरू करने की संभावनाओं की जानकारी दी जा रही है।
लहसुन की कलियां अलग करने से लेकर एलोवेरा के प्रसंस्करण तक
एमपीयूएटी के कुलगुरु प्रो. प्रताप सिंह के मार्गदर्शन में किसानों तक आधुनिक कृषि तकनीक पहुंचाने और कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह प्रदर्शन किया जा रहा है।
अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना—फसल कटाई उपरांत अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी (AICRP on PHET), कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी एंड इंजीनियरिंग (CTAE) की ओर से कृषि प्रसंस्करण से जुड़ी तकनीकों की जानकारी दी जा रही है।
AICRP on PHET, CTAE के प्रोफेसर एवं परियोजना प्रभारी डॉ. दीपक राजपुरोहित ने स्टॉल पर लहसुन बल्ब ब्रेकर मशीन और एलोवेरा जूस एक्सट्रैक्टर का प्रदर्शन किया। लहसुन बल्ब ब्रेकर मशीन से लहसुन की कलियों को अलग करने की प्रक्रिया को तेज और व्यवस्थित करने की तकनीक दिखाई गई। वहीं एलोवेरा जूस एक्सट्रैक्टर के जरिए एलोवेरा के प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन की प्रक्रिया समझाई गई।
डॉ. राजपुरोहित ने किसानों और आगंतुकों को मशीनों की कार्यप्रणाली, उपयोगिता तथा कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण से जुड़ी संभावनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आधुनिक प्रसंस्करण तकनीकों से समय और श्रम की बचत के साथ कृषि उत्पादों का बेहतर मूल्य प्राप्त किया जा सकता है। इससे युवाओं को कृषि उद्यमिता और स्वरोजगार से जोड़ने की संभावनाएं भी बनती हैं।
‘उत्पादन से प्रसंस्करण और प्रसंस्करण से मूल्य संवर्धन’
डॉ. राजपुरोहित ने कहा कि ‘उत्पादन से प्रसंस्करण और प्रसंस्करण से मूल्य संवर्धन’ की अवधारणा को अपनाकर किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं। उनके अनुसार AICRP on PHET, CTAE की ओर से किसानों की जरूरतों के अनुरूप विकसित और प्रदर्शित की जा रही पोस्ट हार्वेस्ट तकनीकें कृषि उत्पादों की गुणवत्ता, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
मंत्री, सांसद और विधायक ने भी देखा एमपीयूएटी का स्टॉल
मेले के दौरान राजस्थान सरकार के जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री बाबूलाल खराड़ी, सांसद डॉ. मन्नालाल रावत और उदयपुर ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा ने विश्वविद्यालय के स्टॉल का अवलोकन किया। इस दौरान डॉ. दीपक राजपुरोहित ने अतिथियों को प्रदर्शित मशीनों और तकनीकों की जानकारी दी। जनप्रतिनिधियों ने किसानों के हित में विश्वविद्यालय की ओर से किए जा रहे तकनीकी और प्रसार कार्यों की सराहना की।
स्टॉल पर मशरूम उत्पादन सहित अन्य कृषि नवाचारों की जानकारी भी दी जा रही है। किसान, युवा और मेले में आने वाले लोग इन तकनीकों को उत्सुकता से देख रहे हैं। सांसद स्वदेशी मेले में एमपीयूएटी की यह सहभागिता विश्वविद्यालय के किसान हितैषी अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और प्रसार गतिविधियों को सामने ला रही है।
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