हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों की 5 लंबित डीए किस्तों और 1 जुलाई 2022 से बकाये के अभ्यावेदन पर सरकार को 6 सप्ताह में फैसला लेने के निर्देश दिए हैं।
शिमला। हिमाचल प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते (डीए) की पांच लंबित किस्तों और 1 जुलाई 2022 से चले आ रहे बकाये का मामला अब सरकार के पाले में पहुंच गया है। कर्मचारियों की ओर से दायर आठ याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को इस मामले में छह सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने साफ किया कि कर्मचारियों की ओर से दिए गए अभ्यावेदनों पर कानून और संबंधित सरकारी ज्ञापनों के आधार पर फैसला किया जाए। साथ ही लिए गए निर्णय की जानकारी याचिकाकर्ताओं को भी दी जाए।
मामला केवल फैसला लेने तक सीमित नहीं है। कोर्ट ने कहा है कि यदि कर्मचारी अपने दावे के अनुसार डीए की लंबित किस्तों और एरियर के लिए पात्र पाए जाते हैं, तो उस राशि का भुगतान भी निर्धारित छह सप्ताह की अवधि के भीतर करना होगा।
आखिर पांच किस्तों का मामला यहां तक कैसे पहुंचा?
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में कहा गया कि सरकार ने 2 मार्च 2024, 16 अक्टूबर 2024 और 15 अक्टूबर 2025 को अलग-अलग कार्यालय ज्ञापन जारी किए थे। इनका हवाला देते हुए कर्मचारियों ने दावा किया कि वे 1 जुलाई 2022 से डीए के बकाये के हकदार हैं, लेकिन उन्हें अभी तक भुगतान नहीं मिला।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि सरकार की 10 अक्टूबर 2024 और 3 मार्च 2026 की अधिसूचनाओं के जरिए राज्य कर्मचारियों की एक विशेष श्रेणी को संबंधित देय तारीखों से केंद्र सरकार की दरों पर डीए दिया गया। ऐसे में उनके साथ भी समान व्यवहार किए जाने की मांग उठाई गई।
इस विवाद के बीच कर्मचारियों ने 18 मई 2026 को सक्षम अधिकारियों के सामने अपने अभ्यावेदन भी सौंप दिए थे। लेकिन इन पर फैसला नहीं हुआ और मामला लंबित रहा।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय दिए बिना सरकार और संबंधित विभागीय अधिकारियों को लंबित अभ्यावेदनों पर कानून के अनुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया।
इन अभ्यावेदनों में कर्मचारियों ने पांच लंबित डीए किस्तों और 1 जुलाई 2022 से देय एरियर की मांग की है। कोर्ट ने इसके लिए छह सप्ताह की समयसीमा तय कर दी है।
यानी अब कर्मचारियों के डीए बकाये का सवाल सीधे सरकार के निर्णय से जुड़ गया है। अगर संबंधित कर्मचारी नियमों और सरकारी आदेशों के अनुसार पात्र पाए जाते हैं, तो छह सप्ताह की तय अवधि में उनके डीए की किस्तों और एरियर का भुगतान भी करना होगा। हाईकोर्ट का यह आदेश संदीप कुमार और अन्य कर्मचारियों की ओर से दायर याचिकाओं पर आया है।
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